हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर (अब सेक्टर-83) जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को दिल्ली की विशेष अदालत में सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की. एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले में रियल एस्टेट कंपनी DLF की भूमिका को लेकर आगे की जांच जारी है. यह मामला कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा, जो कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं, और अन्य आरोपियों से जुड़ा है. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा की अदालत में हुई.
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी केवल सिंह विर्क द्वारा दाखिल जमानत और जमानतदार के बॉन्ड स्वीकार कर लिए. इसके बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ईडी ने सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है, जिसके अनुसार DLF की भूमिका की जांच अभी जारी है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त के लिए निर्धारित की है. इससे पहले मई में रॉबर्ट वाड्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपनी वह याचिका बिना किसी शर्त के वापस ले ली थी, जिसमें उन्होंने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती दी थी.
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वाड्रा के वकील ने तब कहा था कि वह उचित समय पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे. बता दें कि 15 अप्रैल को विशेष अदालत ने जुलाई 2025 में ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों को पेश होने का आदेश दिया था. यह पहला मौका था जब किसी जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल की थी. इससे पहले अप्रैल 2025 में ईडी ने वाड्रा से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी.
चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और चार्जशीट की प्रारंभिक जांच से वाड्रा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार बनता है. अदालत ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और धारा 70 के तहत अपराधों का संज्ञान लिया था, जो धारा 4 के तहत दंडनीय हैं. हालांकि बाद में अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा और केवल सिंह विर्क को जमानत दे दी थी.