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मंगलुरु में पकड़े गए 8 बांग्लादेशी, मुर्शिदाबाद बॉर्डर से भारत में की थी अवैध घुसपैठ

कर्नाटक के मंगलुरु में पुलिस ने अवैध रूप से भारत में रह रहे आठ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है. सभी एक निर्माणाधीन इमारत में मजदूरी कर रहे थे और उनके पास वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं था. शुरुआती जांच में पता चला कि वे तीन महीने पहले मुर्शिदाबाद सीमा के रास्ते भारत में घुसे थे. पुलिस अब फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने और उन्हें रोजगार दिलाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.

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कर्नाटक के मंगलुरु में फर्जी दस्तावेजों के सहारे आकर मजदूरी कर रहे 8 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में . (Photo: AI Generated)
कर्नाटक के मंगलुरु में फर्जी दस्तावेजों के सहारे आकर मजदूरी कर रहे 8 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में . (Photo: AI Generated)

कर्नाटक के मंगलुरु में पुलिस ने अवैध रूप से भारत में रह रहे आठ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है. पुलिस के मुताबिक, ये सभी एक निर्माणाधीन इमारत में मजदूरी कर रहे थे और इनके पास भारत में रहने के लिए वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे. मामले में अवैध घुसपैठ और इन्हें रोजगार दिलाने वाले लोगों की भी जांच शुरू कर दी गई है. 

मंगलुरु के पुलिस आयुक्त सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर 9 जुलाई को सुरथकल थाना क्षेत्र के तहत एक निर्माणाधीन इमारत में छापेमारी की गई. इस दौरान वहां काम कर रहे 54 मजदूरों के दस्तावेजों की जांच की गई. जांच में आठ मजदूर बांग्लादेशी नागरिक पाए गए, जो बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के भारत में रह रहे थे.

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये सभी करीब तीन महीने पहले पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद सेक्टर के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे. पुलिस के अनुसार, इनके पास न तो पासपोर्ट था और न ही वीजा. जांच के दौरान यह भी पता चला कि इन लोगों को पश्चिम बंगाल के पते वाले आधार कार्ड की रंगीन फोटोकॉपी उपलब्ध कराई गई थी, जिन पर उनकी तस्वीरें लगी हुई थीं. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वे पिछले करीब दो महीनों से सुरथकल के मुक्का इलाके में स्थित एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे.

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पूछताछ के दौरान मजदूरों ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (नेशनल आईडी कार्ड), जन्म प्रमाणपत्र और परिवार से जुड़े दस्तावेज पुलिस को दिखाए, जिससे उनकी बांग्लादेशी नागरिकता की पुष्टि हुई. पुलिस ने मामले की जानकारी बेंगलुरु स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को दे दी है. अब इन लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बांग्लादेश भेजने (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई की जाएगी.

साथ ही पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने, फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने और निर्माण स्थल पर रोजगार दिलाने में किन लोगों की भूमिका रही. अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है.

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