सूरत की एक रिहायशी सोसाइटी में लोग अपने रोजमर्रा के काम में लगे थे. तभी कैंपस में कुछ ऐसा दिखा कि लोगों के कदम रुक गए. जमीन पर एक सांप था. पहले लगा कोई सामान्य सांप होगा. लेकिन जैसे-जैसे लोग करीब से देखने लगे, कहानी बदल गई. ये सांप नहीं, बल्कि नन्हा अजगर था. लोगों ने तुरंत स्नेक रेस्क्यू टीम को फोन किया. टीम पहुंची, नन्हे अजगर को पकड़ा और सुरक्षित बॉक्स में रख दिया.
मामला सूरत के अडाजण इलाके का है. यहां एक रिहायशी अपार्टमेंट के कैंपस में लोगों को एक सांप दिखाई दिया. सांप को देखते ही आसपास मौजूद लोग सतर्क हो गए. जब लोगों ने थोड़ा ध्यान से देखा तो पता चला कि मामला थोड़ा अलग है. वो सांप नहीं, इंडियन रॉक पायथन यानी अजगर का बच्चा था.
अब सोसाइटी में खबर फैलते देर नहीं लगी. जिसे देखो, वही दूर से अजगर को देखने पहुंचने लगा. किसी को डर था कि कहीं ये अचानक किसी की तरफ न बढ़ जाए. अच्छी बात ये रही कि लोगों ने उसे पकड़ने या छेड़ने की कोशिश नहीं की. जैसे ही वन्यजीव रेस्क्यू टीम को जानकारी मिली, टीम मौके पर पहुंच गई.
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टीम ने सबसे पहले आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर किया. इसके बाद अजगर के बच्चे को सावधानी से पकड़ा गया. रेस्क्यू टीम ने उसे एक सुरक्षित बॉक्स में रखा और बाद में वन विभाग को सौंप दिया. वन विभाग के मुताबिक, ये इंडियन रॉक पायथन का बच्चा है. अजगर जहरीला नहीं होता. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि इसे देखकर कोई उसे पकड़ने की कोशिश करने लगे.
अजगर बड़ा होकर काफी विशाल हो सकता है. इसलिए वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद से ही ऐसे सांपों को रेस्क्यू करना बेहतर होता है. इस मामले में भी लोगों ने यही किया. अब सवाल ये कि अजगर सोसाइटी तक पहुंचा कैसे? इसका एक संभावित कारण बारिश हो सकता है. बारिश के मौसम में सांप और दूसरे रेंगने वाले जीव अक्सर अपने ठिकानों से बाहर निकल आते हैं. कई बार उनके बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में वे सूखी जगह तलाशते हुए नालों, झाड़ियों और दूसरी जगहों से होते हुए इंसानी बस्तियों तक पहुंच जाते हैं.
अडाजण में मिला अजगर भी आसपास के किसी प्राकृतिक इलाके या नाले से भटककर सोसाइटी तक पहुंचा हो सकता है. हालांकि वन विभाग इसकी जांच कर रहा है कि अजगर का बच्चा आखिर किस इलाके से आया था. फिलहाल अजगर का बच्चा वन विभाग की निगरानी में है. उसकी जांच के बाद उसे किसी सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी की जाएगी.