गुजरात के साबरकांठा रेप केस में स्थानीय लोगों को भड़काने का आरोप झेल रही कांग्रेस के लिए एक और मुसीबत सामने आई है. कांग्रेस की विधायक गेनीबेन ठाकोर ने इस रेप के बाद विवादित बयान दिया था. कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर की करीबी गेनीबेन ठाकोर ने कहा है कि बलात्कार के आरोपी को पुलिस को सौंपने के बदले जिंदा जला देना चाहिए. बता दें कि साबरकांठा रेप के बाद अल्पेश ठाकोर पर भी गुजरात के स्थानीय लोगों को वहां रह रहे बिहार और यूपी के मजदूरों के खिलाफ भड़काने का आरोप लगा था.
गनीबेन के बयान से जुड़ा एक वीडियो बृहस्पतिवार को वायरल हुआ जिसमें महिला विधायक महिलाओं के एक समूह को कथित रूप से यह कह रही हैं. हालांकि, ठाकोर ने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ महिलाओं को शांत करने की कोशिश कर रही थीं क्योंकि वे सब 14 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार से आक्रोशित थीं. ठाकोर बनासकांठा जिले की वाव सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं.
इस वीडियो को दिल्ली बीजेपी के नेता तजिंदर बग्गा ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है. यह वीडियो एक मोबाइल फोन से बनाया गया है और इसमें विधायक कुछ आक्रोशित महिलाओं से घिरी हैं. ठाकोर महिलाओं से कहती दिख रही हैं, "भारत में, हर किसी को कानून की प्रक्रिया (न्याय पाने के लिए) से गुजरना पड़ता है। लेकिन, जब कभी ऐसी घटनाएं होती हैं, 50-150 लोगों को एक साथ आना चाहिए और उसी दिन उसे (बलात्कार आरोपी) जला देना चाहिए। उसे खत्म करो, उसे पुलिस को मत सौंपो."After Alpesh Thakor another video of Congress MLA Geniben Thakore, Congress MLA spreading Violence in Gujarat
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga)
ठाकोर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह 28 सितंबर की घटना से नाराज महिलाओं को शांत करने की कोशिश कर रही थीं. आरोपी को उसी दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. वह बिहार का रहने वाला है.
ठाकोर ने कहा, "वीडियो मेरे निवास के अंदर तैयार किया गया था. वह कोई सार्वजनिक रैली या संवाददाता सम्मेलन नहीं था. मैंने करीब 100 महिलाओं को शांत करने के लिए उन शब्दों का प्रयोग किया था जो बलात्कार की घटना को लेकर काफी परेशान थीं. इसके अलावा कोई अन्य इरादा नहीं था."
बच्ची के साथ बलात्कार और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हिंदी भाषी लोगों पर हुए हमलों को लेकर अल्पेश आलोचना का सामना कर रहे हैं. सत्तारूढ़ भाजपा ने हिंसा के लिए अल्पेश ठाकोर और उनके संगठन गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना को दोषी ठहराया है.