scorecardresearch
 

हवा से फैलने वाले वायरस को लेकर हाई अलर्ट, चॉपर और ट्रैकर्स के जरिए शेरों की निगरानी; जानें क्या है CDV और बेबेसिया बीमारी

Junagadh lion disease: एशियाटिक शेरों के एकमात्र निवास स्थान गुजरात के गिर के जंगलों में शेरों के बीच संभावित संक्रमण और बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट और एक्शन मोड में आ गया है. वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के निर्देश के बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम गिर फॉरेस्ट में डेरा डाले हुए है.

Advertisement
X
खतरे के बीच 24 घंटे मॉनिटरिंग; 41 शेरों का हुआ 'डी-टिकिंग'.(Photo:Screengrab)
खतरे के बीच 24 घंटे मॉनिटरिंग; 41 शेरों का हुआ 'डी-टिकिंग'.(Photo:Screengrab)

गुजरात के गिरनार जंगल में शेरों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग एक्शन मोड में है. DCF ने बताया कि गिर क्षेत्र में बीमारी फैलने की आशंका के बीच शेरों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. गिरनार के किसी भी शेर या शावक में अब तक किसी भी प्रकार के संक्रमण या बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं. साल 2025 की गणना के अनुसार गिरनार अभयारण्य में 54 शेरों का निवास है.

एहतियात के तौर पर पिछले एक सप्ताह में 41 शेरों और शावकों पर 'डी-टिकिंग' और 'डी-वॉर्मिंग' की गई है. ट्रैकर्स, गार्ड और फॉरेस्टर सहित वन विभाग के स्टाफ को शेरों के स्वास्थ्य पर 24 घंटे नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.

वन विभाग ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि किसी भी शेर में लक्षण दिखाई देने पर तुरंत रेस्क्यू कर इलाज शुरू किया जाएगा.

बेबेसिया (Babesia) और CDV यानी कैनाइन डिस्टेंपर वायरस जैसे रोग वन्यजीवों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देते हैं, जिससे उनमें एनीमिया, आंख और नाक से पानी आना व बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

गिरनार में फिलहाल किसी भी प्रकार के लक्षण सामने नहीं आने के कारण वैक्सीनेशन अभियान शुरू नहीं किया गया है. सिर्फ सामान्य प्रक्रिया के तहत 'डी-टिकिंग' और 'डी-वॉर्मिंग' की कार्रवाई की गई है. गिरनार सेंचुरी कुल 178 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई है, जहां शेरों के सुरक्षित होने का दावा किया गया है.

Advertisement

क्या हैं बेबेसिया और CDV?

दूसरी ओर, शेरों के जीवन पर संशोधन कर रहे डॉक्टर जलपन रूपापरा ने बताया कि बेबेसिया एक सामान्य बीमारी है, जो टिक (Tick) के माध्यम से फैलती है और इसका असर मलेरिया जैसा होता है. इससे शेरों में एनीमिया और कमजोरी आ जाती है.

बता दें कि चिचड़ी (Tick) को 'किलनी' भी कहा जाता है. यह कीट गाय, भैंस, कुत्तों, पक्षियों का खून चूसकर जीवित रहता है.

वहीं, CDV यानी कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक वायरस है, जो हवा के जरिए फैलता है. CDV की कोई दवा अभी तक नहीं मिली है.

डॉक्टर ने कहा कि फिलहाल शेरों में बाबेसिया के लक्षण पाए गए हैं और इलाज के बाद उन्हें फिर से जंगल में छोड़ दिया जाएगा. शेरों की बढ़ती आबादी को देखते हुए मौजूदा मौतों के आंकड़ों को सामान्य माना जा सकता है. देखें VIDEO:- 

 

अभयारण्य में स्टाफ को अलर्ट के निर्देश

वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के निर्देश के बाद गिर फॉरेस्ट में सीसीएफ से लेकर पूर्व वेटरनरी डॉक्टर्स, आरएफओ समेत विशेषज्ञों की टीम मौजूद है और बेबीसिया संक्रमण न फैले और CDV का खतरा न हो, इसलिए शेरों की सुरक्षा लेकर सभी प्रयास किए जा रहे हैं.

भावनगर से पोरबंदर तक एशियाटिक शेर

बता दें कि एशियाटिक शेर अब भावनगर से लेकर पोरबंदर तक निवास करते हैं, ऐसे में शेरों के अस्तित्व को लेकर जोखिम हो ऐसा बिल्कुल नहीं है. अभी CDV के कोई केस सामने नहीं आए हैं, फिर भी परीक्षण किया जा रहा है ताकि संक्रमण न फैले.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement