समलैंगिक संबंधों की चाह की ये कहानी गुजरात के सुरेंद्रनगर की है. यहां एक युवक ने गे-डेटिंग एप डाउनलोड किया. कुछ लोगों से चैट हुई. दोस्ती हुई. फिर मिलने का प्लान बना. कहानी किसी रोमांटिक डेट की तरह शुरू हुई थी. फिर तय जगह पर पहुंचा तो वहां 7 लोग कमरे में इंतजार कर रहे थे. युवक को समझ आ गया कि वह डेट पर नहीं, एक ट्रैप में फंस चुका है. कुछ ही मिनटों में उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो बना लिए गए और फिर शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल.
दरअसल, सुरेंद्रनगर जिले के लखतर तालुका के रहने वाले एक युवक ने गे-डेटिंग ऐप डाउनलोड किया था. ऐप पर उसकी कुछ लोगों से बातचीत शुरू हुई. धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में बदली और फिर सामने वाले लोगों ने युवक को सुरेंद्रनगर में मिलने के लिए बुलाया. युवक समलैंगिक संबंधों की चाह में तय जगह पर पहुंच गया.
मुलाकात का ठिकाना सुरेंद्रनगर मेडिकल कॉलेज के पीछे एक सुनसान मकान था. पुलिस का कहना है कि वहां पहले से सात लोग मौजूद थे. जैसे ही युवक वहां पहुंचा, उसे घेर लिया गया. आरोपियों ने युवक के साथ मारपीट की और उसे धमकाकर उसके प्राइवेट फोटो और वीडियो बना लिए. इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 31 हजार रुपये नकद वसूल लिए.

युवक को चेतावनी दी गई कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया या पुलिस के पास गया तो उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे. ऐसी स्थिति में कई लोग डर जाते हैं और शिकायत नहीं करते. लेकिन इस मामले में पीड़ित युवक ने हिम्मत दिखाई और सीधे पुलिस से संपर्क किया.
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युवक की शिकायत मिलने के बाद सुरेंद्रनगर सिटी ए-डिवीजन पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से कुछ ही घंटों में पूरे गिरोह का पता लगा लिया. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिल चौहान, शक्ति बाजीपरा, भार्गव परमार, समीर कोडिया, फरदीन शेख, समीर दीवान और अंकित त्यागी के रूप में हुई है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पीड़ित युवक से वसूले गए रुपये भी बरामद कर लिए हैं.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल शक्ति बाजीपरा पहले भी इसी तरह के मामलों में आरोपी रह चुका है. उसके खिलाफ हनीट्रैप से जुड़े दो गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं.
पुलिस को आशंका है कि गैंग लंबे समय से सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बना रहा था. ऐसे में यह भी जांच की जा रही है कि कहीं और लोग भी इस गैंग के शिकार तो नहीं हुए. जिला पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस गिरोह या किसी अन्य ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, हनीट्रैप या डेटिंग ऐप फ्रॉड का शिकार हुआ है, तो वह बिना डरे पुलिस के पास आए और शिकायत दर्ज कराए.
पुलिस का कहना है कि कई बार बदनामी के डर से पीड़ित सामने नहीं आते, जिसका फायदा ऐसे गिरोह उठाते हैं. समय रहते शिकायत करने से न सिर्फ अपराधियों को पकड़ा जा सकता है, बल्कि दूसरे लोगों को भी उनका शिकार बनने से बचाया जा सकता है.
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर बनी हर पहचान असली नहीं होती. कई बार स्क्रीन के पीछे दोस्त नहीं, बल्कि अपराधी बैठे होते हैं. एक गलत भरोसा किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव जैसी गंभीर समस्याओं में धकेल सकता है. ऑनलाइन दुनिया में दोस्ती करने से पहले सावधानी बरतना उतना ही जरूरी है, जितना असल जिंदगी में किसी अजनबी पर भरोसा करने से पहले अलर्ट होना जरूरी है.