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30 साल से जोत रहे थे 400 हेक्टेयर जमीन, फिर पहुंचीं 20 जेसीबी... कच्छ में ऐसे चला 'दादा का बुलडोजर'

गुजरात के कच्छ में वन विभाग ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए 400 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को कब्जामुक्त कराया है. यहां आरक्षित वन क्षेत्र में 30 वर्षों से चल रही अवैध खेती पर बुलडोजर चलाया गया, जबकि कार्रवाई में 20 जेसीबी, 15 ट्रैक्टर और वन विभाग-पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही.

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20 जेसीबी, 15 ट्रैक्टर और भारी पुलिस फोर्स के साथ चलाया अभियान. (Photo: Screengrab)
20 जेसीबी, 15 ट्रैक्टर और भारी पुलिस फोर्स के साथ चलाया अभियान. (Photo: Screengrab)

कच्छ में इन दिनों बुलडोजर एक्शन की चर्चा है. लेकिन यह किसी सड़क, मकान या बाजार की कहानी नहीं है. मामला सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि का है, जिस पर वर्षों से कब्जा करके खेती की जा रही थी. अब वन विभाग ने ऐसी कार्रवाई की है कि इलाके में इसकी चर्चा 'दादा का बुलडोजर' के नाम से हो रही है.

कहानी गुजरात के कच्छ जिले की है. यहां नखत्राणा के निरोणा आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 300 हेक्टेयर जमीन पर पिछले तीन दशक से अवैध खेती होने का दावा किया जा रहा था. यानी ऐसी जमीन, जो कागजों में वन विभाग की थी, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर कुछ और ही थी. फिर वन विभाग ने कार्रवाई का फैसला किया.

20 जेसीबी मशीनें, 15 ट्रैक्टर, वन विभाग के 65 कर्मचारी और पुलिस बल के जवान. पूरा अमला मैदान में उतरा. वन भूमि को कब्जे से मुक्त कराने के लिए अभियान शुरू हुआ. देखते ही देखते वर्षों पुराने अतिक्रमण हटाए जाने लगे. वन विभाग के मुताबिक, सिर्फ निरोणा आरक्षित वन क्षेत्र से ही करीब 300 हेक्टेयर भूमि वापस अपने नियंत्रण में ली गई. यह वही जमीन है जहां लंबे समय से खेती की जा रही थी.

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forest department clears over 400 hectares of encroached land in kutch

नखत्राणा (पूर्व) रेंज के सायरा गांव में भी विभाग ने कार्रवाई की और करीब 20 हेक्टेयर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया. इसके बाद दयापर (उत्तर) रेंज के शिणापर आरक्षित वन क्षेत्र में भी बुलडोजर पहुंचे, जहां लगभग 100 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जे हटाए गए.

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तीनों इलाकों को जोड़ें तो आंकड़ा 400 हेक्टेयर से ज्यादा बैठता है. यानी इतना बड़ा क्षेत्र, जिसे वन विभाग अब फिर से अपने नियंत्रण में लेने का दावा कर रहा है. वन विभाग की योजना है कि साल 2027-28 में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए. दूसरे शब्दों में कहें तो जहां अभी तक खेती हो रही थी, वहां भविष्य में फिर से जंगल उगाने की तैयारी है.

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन भूमि पर अतिक्रमण सिर्फ कानूनी मसला नहीं है. इसका सीधा असर पर्यावरण, जैव विविधता और वन संरक्षण पर पड़ता है. इसलिए ऐसे मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. डीसीएफ हर्ष ठक्कर ने कहा है कि सरकारी या वन भूमि पर कब्जा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. विभाग ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखे हुए है.

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