scorecardresearch
 

जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर नोएडा पुलिस अलर्ट, सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट के आरोप में दो मुकदमे दर्ज

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP प्रोेटेस्ट के बीच नोएडा पुलिस ने दो सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज की है. पुलिस का आरोप है कि सोशल मीडिया के माध्यम से फेक पोस्ट कर भ्रामक और झूठी जानकारियां फैलाई जा रही हैं. पुलिस ने चेतावनी दी है कि फेक पोस्ट कर झूठा नैरेटिव बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

Advertisement
X
नोएडा पुलिस ने दो सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं. (फाइल फोटो-PTI)
नोएडा पुलिस ने दो सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं. (फाइल फोटो-PTI)

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच नोएडा पुलिस सोशल मीडिया पर कड़ी नजर बनाए हुए है. नोएडा के साइबर थाना पुलिस ने कथित रूप से भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट प्रसारित करने के आरोप में तीन अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

लोगों में डर और भ्रम फैलाने की कोशिश का आरोप
पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों के जरिए नोएडा में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और लोगों में भय और भ्रम फैलाने की कोशिश की गई.

पुलिस ने बताया कि, पहला मामला 22 जुलाई 2026 का है।  इंस्टाग्राम अकाउंट jantar_mantar__live_24 (Sach Ki Baat Gen-Z) से एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें दावा किया गया कि नोएडा में बड़े पैमाने पर औद्योगिक अशांति फैली हुई है, हजारों मजदूर आंदोलन कर रहे हैं और सेक्टर-63, चिल्ला बॉर्डर पर यातायात प्रभावित है. पुलिस टीम की जांच में यह दावा झूठ और भ्रामक पाया गया.

पुलिस ने दर्ज किए दो मुकदमे
दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सुनियोजित तरीके से अफवाह फैलाकर आम लोगों में भय, आक्रोश और प्रशासन के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया गया, जिससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी.

Advertisement

फेक पोस्ट से अविश्वास फैलाने की कोशिश

दूसरा मामला 23 जुलाई 2026 का है। साइबर थाना पुलिस ने इंस्टाग्राम अकाउंट charchajunctionnews और एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल Truth @TruthfulCriticI के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है. इन अकाउंट्स से एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें दावा किया गया कि नोएडा पुलिस ने आम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया.
पोस्ट में वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं होने की बात भी लिखी गई थी, लेकिन पुलिस का कहना है कि वीडियो और उससे जुड़े दावे भ्रामक और झूठे पाए गए.

पुलिस के मुताबिक, इन पोस्टों में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सहित कई संस्थाओं और मीडिया संगठनों को टैग कर सामग्री प्रसारित की गई. जांच में पाया गया कि पोस्टों के जरिए लोगों को उकसाने, अफवाह फैलाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश की गई.

पुलिस बोली-भ्रामक जानाकारी फैलाने पर होगी कार्रवाई
नोएडा पुलिस ने दोनों मामलों में संबंधित धाराओं के तहत साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक या अपुष्ट जानकारी प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि जरूर करें.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement