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'न्यूयॉर्क का मेयर तो चुन नहीं पाए, हमारे देश...' ट्रंप को ईरान के उप-विदेश मंत्री ने दिखाया आईना

जंग के बीच ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने नई दिल्ली में अमेरिका की आलोचना की. उन्होंने इसे ईरान के अस्तित्व की लड़ाई बताया और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के आरोप खारिज किए.

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रायसीना डायलॉग में ट्रंप पर भड़के ईरानी नेता (Photo: Screengrab/X)
रायसीना डायलॉग में ट्रंप पर भड़के ईरानी नेता (Photo: Screengrab/X)

जंग के बीच ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में बोलते हुए US पर तीखा हमला किया है. उन्होंने मौजूदा लड़ाई को ईरान के लिए 'अस्तित्व की लड़ाई' बताया है.

खाड़ी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “क्या US के रडार फारस की खाड़ी में मछली पकड़ने के लिए हैं?” 

इसके साथ ही, सईद ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है.

'शतरंज की तरह सोच रहा ईरान...'

खतीबज़ादेह ने ईरान की लीडरशिप के बारे में डोनाल्ड ट्रंप की बातों का भी मज़ाक उड़ाया और कहा कि US प्रेसिडेंट ईरान का लीडर अपॉइंट करना चाहते हैं, लेकिन वह न्यूयॉर्क के मेयर को भी अपॉइंट नहीं कर सकते. उन्होंने आगे कहा कि जहां वॉशिंगटन लड़ाई को 'अमेरिकन फुटबॉल की सोच' से देख रहा है, वहीं ईरान 'शतरंज' की तरह सोच रहा है.

'आखिरी गोली और अपने आखिरी सैनिक...'

सईद खतीबज़ादेह ने कहा है कि तेहरान के पास अमेरिकी और इज़रायली हमले के खिलाफ वीरतापूर्ण राष्ट्रवादी बचाव करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है. देश आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक विरोध करेगा. 

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रायसीना डायलॉग 2026 के मौके पर ANI से बात करते हुए, खतीबज़ादेह ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान इस वक्त पूरी तरह से युद्ध की स्थिति से गुज़र रहा है. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अभी ईरान के लिए सबसे ज़रूरी बात हमलावर के खिलाफ़ पूरी तरह से विरोध करना है. हम पर अमेरिकी और इज़रायली हमला कर रहे हैं और वे ईरान को ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. जब हम बात कर रहे हैं, मेरे साथी नागरिकों पर कारपेट-बॉम्बिंग का लगातार हमला हो रहा है, जो अमेरिकी और इज़रायली कर रहे हैं."

ईरानी डिप्टी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि तेहरान पर लगातार हमला हो रहा है और हमारे पास अपनी आखिरी गोली और अपने आखिरी सैनिक तक विरोध करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है. उन्होंने इस लड़ाई को बाहरी ज़ुल्मों के खिलाफ़ एक ज़रूरी कदम बताया.

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