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दिल्ली में जलजमाव पर हाई कोर्ट ने पूछा- क्या कर रही है सरकार और एजेंसियां?

राजधानी दिल्ली में पिछले हफ्ते जबरदस्त बारिश के चलते जलजमाव के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और सभी सिविक एंजेसी समेत दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.

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31 अगस्त को जलजमाव से बुरी तरह घिरी दिल्ली
31 अगस्त को जलजमाव से बुरी तरह घिरी दिल्ली

राजधानी दिल्ली में पिछले हफ्ते जबरदस्त बारिश के चलते जलजमाव के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और सभी सिविक एंजेसी समेत दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.

कोर्ट ने यह नोटिस एक जनहित यचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है, जिसमें दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात से निपटने को लेकर पूरे सिस्टम के अब तक फेल होने और आगे के लिए सभी की तैयारी पर सवाल खड़ा किया गया है.

31 अगस्त को खुली मानसून की तैयारियों की पोल
राजधानी दिल्ली में 31 अगस्त को 2 घंटे हुई बारिश ने और सभी सिविक एजेंसियों की मानसून को लेकर हुई तैयारियों की पोल खोल दी थी. दो-तीन घंटे हुई बारिश से राजधानी दिल्ली की रफ्तार थम सी गई थी. राजधानी दिल्ली में बारिश से वीवीआईपी इलाकों से लेकर लो लाइन इलाकों तक में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे. हाई कोर्ट में लगाई गई याचिका में कहा गया है कि राजधानी दिल्ली पैदा हुए इन हालातों में बचाव और राहत के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी. लोग घंटों जाम में फंसे रहे. लोगों का उस दिन का रोजगार छिन गया. घरों, दुकानों और ऑफिस में पानी भर जाने से सरकार और आम लोगों का आर्थिक नुकसान हुआ.

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तय हो एजेंसियों की जिम्मेदारी
याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में इस तरह के हालात से निपटने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए जो यह तय करे कि किसी विभाग की इस तरह की इमरजेंसी हालात में क्या जिम्मेदारी होगी. याचिकाककर्ता जोगिंदर सुखीजा का कहना है कि जब भी ऐसी स्थिति हो, तमाम सरकारी विभागों के अधिकारी सड़क पर लोगों की मदद के लिए उतरे. जिसमें वो मीडिया या सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करे. कोर्ट ने यचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार, सिविक एजेंसियों समेत की इस तरह की इमरजेंसी हालात में क्या तैयारी होती है और अब तक वह उस पर कितना खरे उतरे हैं. केंद्र और राज्य सरकार को अपना जवाब 16 नवंबर से पहले देना है.

दिल्ली मे अर्बन फ्लडिंग सिर्फ 31 अगस्त को ही नहीं दिखाई दी, बल्कि इससे पहले भी लगभग हर साल मिलते-जुलते हालात सड़कों पर दिखाई देते रहे हैं. ऐसे में इस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मुमकिन है कि तमाम विभागों की जिम्मेदारी अगर कोर्ट तय कर दे तो अगले साल के मानसून में शायद में कुछ सुधार नजर आए.

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