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पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे दिल्ली के 13 ट्रीटमेंट प्लांट? DPCC ने ठोका 12 करोड़ का जुर्माना

डीपीसीसी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए इन 13 सीईपीटी पर 12 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोका है. डीपीसीसी ने सीईटीपी के खिलाफ यह कार्रवाई तमाम निर्देश दिए जाने के बावजूद तय मानकों का अनुपालन नहीं किए जाने पर की है.

यमुना नदी में बढ़ रहा प्रदूषण (फाइल फोटोः पीटीआई) यमुना नदी में बढ़ रहा प्रदूषण (फाइल फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मासिक विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर एक्शन
  • सीईटीपी ने निर्धारित मानकों का नहीं किया पालन

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 13 सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को नोटिस जारी किया है. डीपीसीसी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए इन 13 सीईपीटी पर 12 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोका है. डीपीसीसी ने सीईटीपी के खिलाफ यह कार्रवाई तमाम निर्देश दिए जाने के बावजूद तय मानकों का अनुपालन नहीं किए जाने पर की है. जांच में पाया गया है कि सीईटीपी ठीक से काम नहीं कर रहे जिसकी वजह से यमुना में प्रदूषण बड़े पैमाने पर बढ़ रहा है.

डीपीसीसी प्रयोगशालाओं की मासिक विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर सीईटीपी पर 12.05 करोड़ रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर देने का नोटिस जारी किया है. उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को शोधित करने में सीईटीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए निर्धारित मानकों का पालन किया जाना चाहिए. डीपीसीसी के मुताबिक सीईटीपी को बार-बार निर्देश दिए गए जिनका पालन नहीं किया गया है. इसके कारण कड़ी कार्रवाई की गई है.

डीपीसीसी की विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी निर्धारित एफिलिएंट मानकों का सीईटीपी ने पालन नहीं किया. 5 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे. डीपीसीसी प्रयोगशाला की रिपोर्ट का फरवरी 2020 के बाद से मासिक विश्लेषण किया गया जिसके आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए 12.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

दिल्ली में 212.3 एमएलडी की क्षमता के 13 सीईटीपी चालू हैं. वजीरपुर, मायापुरी, बवाना, नरेला, एसएमए, जीटीके, ओखला, मंगोलपुरी, नांगलोई, बादली, झिलमिल, लॉरेंस रोड और नारायणा में 13 सीईटीपी का निर्माण 17 औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधित करने के लिए किया गया है. इनमें से 11 सीईटीपी का संचालन संबंधित सोसाइटी की ओर से किया जा रहा है. नरेला और बवाना सीईटीपी का संचालन पीएनसी दिल्ली और बवाना इंफ्रा डेवलपमेंट की ओर से किया जा रहा है. इन्हें डीएसआईआईडीसी की ओर से लगाया गया है.

दिल्ली सीईटीपी अधिनियम 2000 के अनुसार दिल्ली में सीईटीपी की जांच और नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी उद्योग आयुक्त के पास है. सीईटीपी नियमों के अनुसार दिल्ली में इनके संचालन और रखरखाव के लिए सीईटीपी सोसाइटी का गठन किया गया है. ये सीईटीपी सोसाइटी इनके संचालन और रखरखाव के साथ ही औद्योगिक इकाइयों से शुल्क एकत्रित करने के लिए भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं. पर्यावरण से जुड़े कानूनों का पालन कराना भी सीईटीपी सोसाइटी की जिम्मेदारी है. सीईटीपी को अपग्रेड कराने की जिम्मेदारी भी सीईटीपी सोसाइटी की ही है.

 

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