भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर बसे हजारों परिवारों के लिए सरहद कभी लकीर भर हुआ करती थी. उनके रिश्ते, परंपराएं और शादियां उन्हें इस लकीर सीमा को पार करवाती रही है. लेकिन, अब कुछ महीनों से सरहद पर आना-जाना बंद है. पहलगाम अटैक के बाद से बदले हालात ने इनके रिश्तों पर भी असर डाला है. दोनों देशों के बीच वीजा सेवाएं बंद होने से कई शादियां अटक गई हैं, रिश्ते तय होने के बावजूद फेरे नहीं हो पा रहे हैं और परिवार अपने लोगों से मिल नहीं पा रहे हैं. इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं- भारत-पाकिस्तान की सीमा पर रहने वाले सोढ़ा राजपूत, जिनकी बेटियां भारत में ही ब्याही जाती हैं. यहां लोग शगुन के साथ वीजा लेकर शादियों में शिरकत करते हैं. लेकिन, कुछ वक्त से ये सब बंद है.
आपको बता दें कि राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और गुजरात के कुछ जिलों से लेकर पाकिस्तान के सिंध और थारपारकर तक सोढ़ा राजपूत रहते हैं. वैसे तो अब पाकिस्तान में रहने वाले ये कई हिंदू परिवार भारत में आ गए हैं, जिनमें कुछ को नागरिकता मिल गई है, जबकि कुछ नागरिकता के इंतजार में हैं. भारत और पाकिस्तान की सीमा के दोनों ओर बसे इन लोगों का भारत-पाकिस्तान में आना जाना रहा है. पाकिस्तान में रह रहे अधिकांश सोढ़ा राजपूत अपनी बेटियों की शादी भारत में ही करते हैं, जिनके पीछे का कारण है इनका गौत्र सिस्टम और पाकिस्तान के बिगड़ते हालात.
ये तो जगजाहिर है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को काफी परेशान किया जा रहा है, जिनके पीड़ित ये भी हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इस समय पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू सोढ़ा राजपूत किन परिस्थितियों में जी रहे हैं और सीमा पर बढ़े तनाव ने उनके सामाजिक रिश्तों को कितना प्रभावित किया है....
मिलता है अलग वीजा
सोढा परिवारों के जीवन के बारे में बात करने से पहले आपको बता दें कि आखिर ये लोग पाकिस्तान से भारत कैसे आते हैं. दरअसल, भारत सरकार की ओर से पाकिस्तानी नागरिकों को 14 तरह के वीजा दिए जाते हैं, जिसमें एक विजिटर वीजा भी शामिल है. ये वीजा कुछ समय के लिए ही मिलता है, लेकिन ये टूरिस्ट वीजा से अलग होता है. जब पाकिस्तानी नागरिक का भारत में रहने वाला कोई रिश्तेदार उन्हें बुलाता है या शादी के लिए जाना होता है तो विजिटर वीजा के जरिए सरहद पार की जाती है. लेकिन, अब सरकार की ओर से सभी वीजा सेवाएं (डिप्लोमेटिक को छोड़कर) बंद कर दी है.
नहीं हो पा रही हैं शादियां
ऐसे में जब हमने पाकिस्तान से आकर भारत में बसे दिलीप सिंह सोढ़ा से बात की तो उन्होंने बताया, 'अभी वीजा सर्विस बंद होने की वजह से करीब एक-डेढ़ साल से हमारे यहां शादियां नहीं हो पा रही हैं. जो काफी अमीर और ऊपर की पहुंच वाले लोग हैं, वो सिर्फ भारत आ जा रहे हैं. इसका कारण ये है कि अभी वीजा बहुत कम मिल रहा है और अटारी बॉर्डर का रास्ता बिल्कुल बंद है. ऐसे में जो लोग पाकिस्तान से आ भी रहे हैं, वो वाया दुबई आदि होकर आते हैं, जिसमें बहुत ज्यादा खर्चा है. काफी महंगी टिकटें हैं, जो हर कोई नहीं खरीद सकता. ऐसे में लोग भारत नहीं आ पा रहे हैं और शादियां नहीं हो पा रही हैं. खास बात ये है कि हम अपनी बेटियों की शादियां भारत में ही करते हैं.'
उन्होंने बताया कि इससे पहले ऐसा कारगिल युद्ध के वक्त हुआ था और लंबे समय तक हमारे यहां शादियां नहीं हुई थी. अभी हमारे काफी रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं और पहले हम आराम से आते जाते थे. लेकिन, अब कुछ सालों से नियम बदल गए हैं तो थोड़ी मुश्किल होती है. लेकिन, पहलगाम हमले के बाद से तो सबकुछ बंद है. हालात ऐसे हैं कि जिनके रिश्ते हो गए हैं, वो सिर्फ ये चाहते हैं कि उनकी बेटी और सिर्फ एक आदमी को भी आने की परमिशन मिल जाए तो वो शादी करके चले जाएं. लेकिन अटारी बॉर्डर पर आवाजाही बिल्कुल बंद है.

पाकिस्तान से साल 2011 में भारत आए दिलीप सिंह सोढ़ा को 2023 में भारत की नागरिकता मिल गई थी. भारत-पाकिस्तान वीजा को लेकर दिलीप सिंह सोढ़ा कहना है कि कुछ सालों पहले भारत आने के लिए बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट देखा जाता था और अन्य सामान्य कागजों के आधार पर वीजा मिल जाता था. लेकिन, अब पहले यहां वीजा अप्रूव करवाने के लिए ए ग्रेड ऑफिसर के साइन करवाने होते हैं. ऐसे में कोई भी ऑफिसर ऐसा नहीं करते हैं और उनकी इजाजत ना मिल पाने की वजह से हम बॉर्डर क्रॉस नहीं कर पाते.
अभी की वीजा स्थिति को लेकर दिलीप सिंह ने बताया कि अभी दो तरह के वीजा मिल रहे हैं. अगर आप वहां जाना चाहते हैं तो आपको 90 दिन में वापस आना होगा. अगर वहां ज्यादा दिन रुक गए तो वहां ही रहना पड़ेगा और फिर से वीजा की प्रोसेस शुरू करनी होगी. लेकिन, वो भी इस रूट से नहीं जा सकते, इसके लिए फ्लाइट से ही जाना होगा. इसके अलावा पाकिस्तान में हिंदू महिला को वीजा मिल जाता है और मुस्लिम पुरुष को वीजा मिल जाता है. ऐसे ही भारत में मुस्लिम महिला या हिंदू पुरुष को वीजा मिल सकता है.
भारत में ही क्यों करते हैं शादी?
अब जानते हैं कि आखिर पाकिस्तान में रहे सोढ़ा राजपूत भारत में ही अपनी बेटियों की शादी क्यों करते हैं. दिलीप सिंह बताते हैं कि पाकिस्तान में जो सोढ़ा राजपूत रह रहे हैं, उनके दूसरे गौत्र के सोढ़ा भारत में हैं. यानी पाकिस्तान में जिन गौत्र के सोढ़ा रहते हैं, वो उनसे शादी नहीं कर सकते. दूसरे गौत्र में शादी करना जरूरी है और वो भारत में ज्यादा है. सोढ़ा राजपूत में प्रमुख तौर पर चार गौत्र होते हैं, जिनमें राम सोढ़ा, बेरसी सोढ़ा, गंगदास सोढ़ा, सूरतान सोढ़ा शामिल हैं. ऐसे में पाकिस्तानी सोढ़ा राजपूतों की शादी भारत में ही होती है.
इसके अलावा जिस तरह हिंदुओं को वहां परेशान किया जाता है, वो भी भारत में शादी करने का एक कारण है. उन्होंने बताया कि उन्हें काफी परेशान किया जाता है, लेकिन जो हिंदू मुस्लिम बने हैं, वो उन्हें फिर भी सपोर्ट करते हैं. वैसे मौलवी वगैहरा काफी परेशान करते हैं.
पाकिस्तान में हिंदुओं के हालात पर आजतक डॉट इन ने हिंदू सिंह सोढ़ा से भी बात की, जो कुछ साल पहले भारत में आकर बसे थे और अब पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं के लिए 35 साल से काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के हालात काफी ज्यादा खराब हैं. सिर्फ जबरदस्ती धर्मांतरण ही नहीं, वहां के हिंदू हर रोज अपमान की जिंदगी जी रहे हैं. हिंदू महिलाओं को परेशान किया जा रहा है, उन्हें उठा लिया जाता है, रेप किया जाता है. अलग-अलग तरीकों से वहां हिंदू लोगों को परेशान किया जा रहा है. लेकिन, उन्होंने एक सवाल ये भी खड़ा किया कि वहां से भारत आने वाले हिंदुओं की स्थिति भी अच्छी नहीं है.
हिंदू बताते हैं कि वहां उन्हें काफिर और यहां पाकिस्तानी होने का टैग हमेशा परेशान करता है. भारत में आने के बाद भी उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती है, कोई आईडी ना होने की वजह से उन्हें दिक्कत होती है. यहां रोटी, आवास, हेल्थ जैसी सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिल पाती है. उन्होंने बताया कि वहां से आने का सबसे बड़ा कारण ये है कि वहां समाज में उनका काफी उत्पीड़न होता है और यहां तक कि कई अच्छे परिवार के लोग, अच्छे पैसे वाले लोग भी भारत में आकर बसना चाहते हैं.

किन जिलों में ज्यादा हिंदू हैं?
आपको बता दें कि पाकिस्तान में सबसे ज्यादा हिंदू सिंध प्रांत में ही रहते हैं. पाकिस्तान से आकर भारत में रहने वाले लोगों की संख्या हजारों में हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी 55 लाख है, लेकिन पाकिस्तान की हिंदू पंचायत ये संख्या 80 लाख बताती है. इसमें 90 फीसदी हिंदू सिंध में रहते हैं, जिनमें उमरकोट, थारपारकर, मीरपुर खास, संघर, बादिन में सबसे ज्यादा आबादी है. उमरकोट जैसे जिलों में तो 50 फीसदी से ज्यादा हिंदू हैं.