राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली... यानी लाखों आखों में समाए ख़्वाबों का शहर, देश की दिशा और दशा बदलने वाली सियासत का मरकज़ और माज़ी की खट्टी-मीठी यादों से भरे तारीख़ के पन्नों में एक बड़ा चैप्टर. लेकिन अगर आप ज़िंदगी की बल खाती सीढ़ियों के ज़रिए क्लाइमेट चेंज से घायल और प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली के दिल में उतरें तो हर तरफ़ भागते-दौड़ते लोग, चकाचौंध भरी ज़िंदगी और उथल-पुथल वाले लम्हे महसूस करने को मिलते हैं. लेकिन दिल्ली के पास इसका सब्टीट्यूट भी मौजूद है, जिसका एक रूप सुंदर नर्सरी है. यह कोना शहर की कुछ ऐसी जगहों में से एक है, जो लोगों को सुकून का एहसास कराती हैं. दक्षिणी दिल्ली में हुमायूं के मकबरे के पास स्थित सुंदर नर्सरी ऐसी ही एक जगह है.

दिल्ली जैसे बड़े और बिज़ी शहर में सुंदर नर्सरी जैसी जगह बहुत ख़ास मानी जाती हैं. ये जगह शहर की भीड़ और शोर-शराबे के बीच सुकून और हरियाली का एहसास कराती हैं.
ऐतिहासिक अहमियत और ख़ूबसूरत बाग़-बग़ीचों की वजह से लोग परिवार के साथ घूमने सुंदर नर्सरी आते हैं, कुछ लोग पेड़ों के नीचे बैठकर किताबें पढ़ते हैं और प्रकृति प्रेमी यहां सुकून के लम्हे गुज़ारते हैं.

सुंदर नर्सरी मुग़ल सल्तनत के दौर का एक ख़ूबसूरत बाग़ है, जिसे काफी मेहनत से आधुनिक टच देकर डेवलप किया गया है. यह सिर्फ़ पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत का एक अहम हिस्सा भी है. सुंदर नर्सरी के आस-पास कई ऐतिहासिक मकबरे और स्मारक मौजूद हैं, जिनमें सुंदर बुर्ज और सुंदरवाला मकबरा जैसे स्मारक शामिल हैं.

मुग़लों के दौर में यह इलाक़ा 'अज़ीम बाग़' के नाम से मशहूर था, जिसके अंतर्गत कई इमारतें थीं. राजधानी में अंग्रेज़ी हुकूमत आई और इसे पौधों की नर्सरी के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा. इसी वजह से बाद मे इसका नाम 'अज़ीम बाग़' से 'सुंदर नर्सरी' पड़ गया.

साल 2007 के बाद आग़ा ख़ान ट्रस्ट फॉर कल्चर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और दिल्ली सरकार ने मिलकर इसे बड़े स्तर पर इसका रीडेवलपमेंट किया. कई सालों के काम के बाद, साल 2018 में सुंदर नर्सरी को आम लोगों के लिए एक आधुनिक हेरिटेज पार्क के रूप में खोल दिया गया.
क़रीब 90 एकड़ में फैला यह तारीख़ी बाग़ आज दिल्ली के सबसे ख़ूबसूरत हेरिटेज पार्कों में गिना जाता है. यहां हर दिन सैकड़ों लोग सुबह की सैर, योग, पिकनिक और नेचर की ख़ूबसूरती का आनंद लेने के लिए आते हैं. पेड़ों की घनी छांव, रंग-बिरंगे फूल, ठहरा हुआ तालाब, ऐतिहासिक इमारतें और साफ-सुथरे रास्ते इस जगह को ख़ास बनाते हैं.

सुंदर नर्सरी को दिल्ली के सबसे हेल्दी बायोडायवर्सिटी पार्कों में से एक माना जाता है. यहां सैकड़ों तरह के पौधे और फूल लगाए गए हैं. यहां मौसमी फूलों के अलावा गुलाब, चमेली, गेंदा, लिली और कई सजावटी पौधे भी देखने को मिलते हैं. वसंत और सर्दियों के मौसम में सुंदर नर्सरी के फूल पूरे बाग़ को रंगों से भर देते हैं. इसके अलावा यहां पर कई दुर्लभ और देसी प्रजातियों के पेड़ भी लगाए गए हैं, जो पक्षियों और तितलियों के लिए भी एक अच्छा आवास बनाते हैं.

सुंदर नर्सरी की सबसे ख़ूबसूरत जगहों में यहां के हौज़ और छोटे-छोटे पॉन्ड बनाए गए हैं. इनके आस-पास बने वॉकिंग ट्रैक पर लोग शाम के वक़्त टहलना पसंद करते हैं. शाम होते-होते सुंदर नर्सरी का माहौल बेहद ख़ूबसूरत हो जाता है. सूरज ढलते वक़्त पेड़ों और तारीख़ी इमारतों पर पड़ती रोशनी इस जगह को बेहद ख़ूबसूरत लुक देती है. लोग यहां बैठकर किताब पढ़ते हैं, कुछ परिवार पिकनिक मनाते हैं, तो कई लोग सिर्फ शांत माहौल का मज़ा लेने आते हैं.

सुंदर नर्सरी को एक मॉडर्न हेरिटेज पार्क के तौर पर डेवलप किया गया है. यहां आने वाले लोगों के लिए कई सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. साफ-सुथरे वॉकिंग ट्रैक, कैफ़े, बैठने की जगह, बच्चों के खेलने के लिए जगहें और साफ़-सुथरे शौचालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. इसके अलावा पार्क के अंदर इवेंट स्पेस, ओपन ग्रीन लॉन और नेचर ट्रेल्स भी बनाए गए हैं, जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनियां भी आयोजित होती रहती हैं.

सुंदर नर्सरी सिर्फ एक पार्क नहीं बल्कि दिल्ली की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का हिस्सा है. यहां आने वाले लोग इसे सुकून और नेचर से जुड़ने की जगह मानते हैं.
सुंदर नर्सरी में हमारी मुलाक़ात संपन्ना से हुई, जो कोलकाता से हैं और दिल्ली में रहकर पढ़ाई करती हैं. सुंदर नर्सरी को लेकर उन्होंने aajtak.in के साथ अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया. इस जगह को लेकर संपन्ना के चेहरे पर ख़ुशी और सुकून देखने लायक था. वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि मैं इस जगह की ब्रांड एंबेसडर हूं क्योंकि देश के किसी भी कोने से मेरे दोस्त आते हैं, तो मैं उन्हें यहां घुमाने ज़रूर लाती हैं. मेरे फ्रेंड्स बॉम्बे, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे कई शहरों से राजधानी आते हैं और कहते हैं कि दिल्ली घुमा दो... तो पहली जगह सुंदर नर्सरी होती है, जहां पर मैं उनको लेकर आती हूं. यह मेरी फ़ेवरेट जगहों में से एक है. मैं यहां पर आकर पूरी तरह से मेसमराइज़ हो जाती हूं, यह प्लेस बहुत असली सा लगता है. ऐसा लगता है, जैसे इस जगह पर बहुत सारी पोएट्री समाई हुई है. यहां चिड़ियों की रिदम है. मुझे यहां का नेचर बहुत अच्छा लगता है."

दिल्ली के दिलशाद गार्डेन इलाक़े के निवासी शुभम सुंदर नर्सरी को लेकर अपना एक्सपीरिएंस साझा करते हुए कहते हैं, "मैं यहां पर तीसरी बार आया हूं. शाम वक़्त यहां काफ़ी अच्छा लगता है क्योंकि यहां लाइटिंग बेहद ख़ूबसूरत होती है. दिन में नेचर सुकून देने वाला होता है. अगर आप सर्दियों में आते हैं, तो यहां पर कई तरह की बर्ड्स भी मिलती हैं. अगर हम नेचर के नज़रिए से देखें, तो यह जगह बेहद शानदार है. लोगों के लिए यह एक पिकनिक स्पॉट भी है, संडे को लोग अपने परिवारों के साथ आते हैं और यहां पर एंजॉय करते हैं. हम लोग यहां आते हैं, गाने बजाकर बातें करते हैं और टहलते हैं."

दिल्ली के ही रहने वाले चिराग़ कहते हैं, "मुझे यह जगह बहुत प्यारी लगती है. नेचर के तौर पर मैंने ऐसा एक्सपीरिएंस दिल्ली में और कहीं पर नहीं किया. यहां बर्ड्स की आवाज़ें आती रहती हैं, जो बेहद प्यारा लगता है. मुझे लगता है, इस जगह को मिनी कश्मीर कहा जा सकता है क्योंकि मैं हाल ही में कश्मीर गया हुआ था, वहां पर इसी तरह के मुग़ल गार्डन वग़ैरह हैं. सुंदर नर्सरी आकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है."

सुंदर नर्सरी में पहली विज़िट पर आईं दीपिका कहती हैं, "यहां आकर मुझे बेहद फ्रेश फ़ील हो रहा है. इस जगह पर आकर मुझे बहुत अच्छा लगा, जब मैंने मोर देखा, मैंने बेहद क़रीब से देखा, जो दिल्ली में शायद ही कहीं देखने को मिलता है. दिल्ली बहुत ज़्यादा पॉल्यूशन वाला शहर है. राजधानी में ऐसी जगहें बेहद ज़रूरी हैं, जहां पर ग्रीनरी हो, पेड़ हों और नेचर को संजो कर रखा गया हो. इससे हमारा पर्यावरण बेहतर स्थिति में बना रहेगा."
सुंदर नर्सरी सिर्फ एक ख़ूबसूरत बाग़ ही नहीं, बल्कि दिल्ली के अंदर मौजूद एक अर्बन बायोडायवर्सिटी स्पेस भी है. यहां सैकड़ों तरह के पेड़-पौधे, फूल, पक्षी और तितलियां पाई जाती हैं, जो इस जगह को प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के लिए खास बनाती हैं. इस पार्क में 300 से ज्यादा प्रजातियों के पेड़ और पौधे लगाए गए हैं. इनमें कई देसी प्रजातियां भी शामिल हैं, जैसे पीपल, नीम, अमलतास, कदंब और अर्जुन. ये पेड़ न सिर्फ पार्क की हरियाली बढ़ाते हैं, बल्कि पक्षियों और छोटे जीवों के लिए प्राकृतिक आवास का ज़रिया भी बनते हैं.

यहां अक्सर तोता, मैना, बुलबुल, किंगफिशर, सनबर्ड और कई प्रवासी पक्षी भी नजर आते हैं. सुबह के वक़्त पक्षियों की चहचहाहट इस जगह को और जीवंत बना देती है. इसके अलावा, सुंदर नर्सरी में कई तरह की तितलियां और कीट प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो बाग़ के इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं. फूलों और पौधों की विविधता के कारण तितलियों के लिए यहां अनुकूल वातावरण बनता है.
दिल्ली जैसे बड़े और प्रदूषित शहर में ऐसे ग्रीन स्पेस बेहद जरूरी होते हैं. ये जगहें सिर्फ लोगों को सुकून नहीं देतीं, बल्कि शहर की हवा को बेहतर बनाने, तापमान कम करने और जैव विविधता को बचाने में भी अहम रोल अदा करती हैं.