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हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है और यह मुगल स्थापत्य कला की पहली पूर्ण विकसित मिसाल माना जाता है. यह मकबरा मुगल सम्राट हुमायूं की स्मृति में उनकी पत्नी बेगा बेगम (हाजी बेगम) द्वारा बनवाया गया था. इसका निर्माण कार्य वर्ष 1565 में शुरू हुआ और लगभग 1572 में पूरा हुआ. यह स्मारक आज यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है (Humayun’s Tomb, Delhi).

यह मकबरा दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में यमुना नदी के पास स्थित है. इसकी स्थापत्य शैली में फारसी और भारतीय तत्वों का सुंदर संगम देखने को मिलता है. लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित यह इमारत ऊँचे चबूतरे पर बनी है, जिसके बीच में विशाल गुंबद स्थित है. चारों ओर फैले चारबाग शैली के उद्यान इसे और भी भव्य बनाते हैं, जहाँ पानी की नहरें और सममित रास्ते इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं.

हुमायूं का मकबरा भारत में बनने वाला पहला ऐसा उद्यान-मकबरा है, जिसने बाद में ताजमहल जैसी महान कृतियों की नींव रखी. इसका केंद्रीय कक्ष अष्टकोणीय आकार का है, जहां सम्राट हुमायूं की समाधि स्थित है. इसके चारों ओर कई अन्य मुगल शासकों और शाही परिवार के सदस्यों की कब्रें भी हैं, जिससे यह स्थान एक महत्वपूर्ण शाही कब्रिस्तान का रूप ले लेता है.

इतिहास और कला के प्रेमियों के लिए हुमायूं का मकबरा विशेष आकर्षण का केंद्र है. इसकी भव्यता, संतुलित वास्तुकला और शांत वातावरण पर्यटकों को मुगल काल की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराते हैं. आज यह स्मारक न केवल दिल्ली की पहचान है, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण प्रतीक भी है.

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