प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली का युद्ध लगातार जारी है. यह केवल एक मौसम की नहीं, बल्कि 365 दिन साफ हवा और बेहतर जनस्वास्थ्य के लिए चलने वाला अभियान है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने कैबिनेट सहयोगी पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और विधायक हरीश खुराना के साथ 'मेड इन इंडिया' अत्याधुनिक एयर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी का ऑन-ग्राउंड निरीक्षण किया.
दिल्ली मे 21 डिवाइस लगाए गए हैं. जानकारी के मुताबिक ये एडवांस्ड सेल्फ‑क्लीनिंग सिस्टम स्मोक, डस्ट, PM2.5, PM10 और हानिकारक प्रदूषकों को नियंत्रित करते हुए प्रति घंटे लगभग 3 लाख लीटर हवा को ट्रीट करते है.
मुख्यमंत्री ने रेखा गुप्ता बताया कि प्रदूषण नियंत्रण कोई मौसमी अभियान नहीं, बल्कि लगातार प्राथमिकता का विषय है. उन्होंने कहा कि ये मेड इन इंडिया तकनीकें प्रदूषण कम करने और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए तैयार की गई हैं.
भारत का पहला जीरो‑एमिशन मूविंग एंटी‑स्मॉग सिस्टम
भारत का पहला जीरो‑एमिशन मूविंग एंटी‑स्मॉग सिस्टम कीर्ति नगर और मायापुरी क्षेत्र में तैनात है. यह सड़कों की धूल और प्रदूषण को कम कर क्लीन एयर कॉरिडोर बनाता है, जिससे बेहतर विजिबिलिटी और सांस लेने में आराम मिल सकता है.
ट्रायल के तहत इस्तेमाल की जा रही तकनीक PAWAN III पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस है, जिसे कीर्ति नगर फायर स्टेशन के पास लगाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह सिस्टम वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को स्रोत स्तर पर ही नियंत्रित करता है.
कैसे काम करते हैं डिवाइस?
डिवाइसेज के काम करने के तरीके को समझाते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ये सिस्टम अपने आप धूल इकट्ठा करते हैं, और जब स्टोरेज क्षमता भर जाती है, तो 15-20 दिनों बाद अलर्ट भेजते हैं.
सिरसा ने कहा कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में पहले ही 15-16 पायलट परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं और उन्होंने आगे कहा कि आईआईटी और अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा मूल्यांकन के बाद प्रभावी पाई गई तकनीकों को पूरे शहर में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है.