बिहार के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश और बाढ़ से आम जनजीवन प्रभावित है. कोरोना संकट के बीच राज्य के कई इलाकों में लोगों को बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. घरों में पानी भर आया है. इसकी वजह से मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं.
बिहार में सारण जिले के तरैया प्रखंड के पचरौड़ में बाढ़ का भयावह रूप देखने को मिल रहा है. बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कैसे पानी के तेज बहाव में एक दो मंजिला मकान अचानक ध्वस्त होकर गिर पड़ा.
गनीमत यह थी कि उस मकान में कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था. इस घटना का वीडियो वायरल है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाढ़ के पानी की धारा कितनी तेत रफ्तार से बह रही है. बाढ़ विशालकाय पेड़ को पहले ही गिरा चुकी है. बाढ़ के पानी ने पक्के मकान को ताश की पत्तियों की तरह जमींदोज कर दिया.
क्षतिग्रस्त मकान पचरौड़ गांव के रहने वाले बिंदेश्वरी सिंह का था. मकान में नीचे कपड़े की दुकानें थीं और ऊपर के हिस्से में लोग रहते थे. मकान में बाढ़ का पानी दाखिल होने के बाद लोग घर खाली कर ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए थे. बताया जा रहा है कि यह मकान 2017 की बाढ़ में भी चपेट में आ चुका था.
मकान मालिक बिंदेश्वरी सिंह ने मुआवजे के लिए तरैया अंचल अधिकारी को आवेदन दिया था. लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. थक-हारकर बिंदेश्वरी सिंह ने अपने खर्च से मकान का मरम्मत कराया था, और आज यह मकान पूरी तरह ध्वस्त होकर गिर गया.
राजमिस्त्री का काम करने वाले बिंदेश्वरी सिंह ने बताया कि पाई-पाई जोड़कर मकान का निर्माण कराया था जिसे बाढ़ के पानी ने एक ही झटके में तबाह कर दिया. मेरे वर्षों की कमाई पूंजी पल भर में खत्म हो गई. पीड़ित गृहस्वामी ने स्थानीय प्रशासन से जांच कर उचित मुआवजे के मांग की है.
बिंदेश्वरी सिंह कहते हैं, 'मेरा मकान बाढ़ के पानी से गिर गया है. मकान गिरने की आशंका को लेकर सीओ के पास गया था. तीन चार दिन गया. लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हुई. थक कर बैठ गया. सरकार कुछ मदद करेगी तभी परिवार का गुजारा हो पाएगा. मैं राजमिस्त्री हूं. कमा कर खाने वाला आदमी हूं. कितना कमाएंगे कि खाएंगे और मकान बनाएंगे? इसमें कपड़े की तीन दुकान थीं, उनका भी बहुत नुकसान हुआ है.'