आज के समय में हड्डियों की बीमारियां काफी बढ़ रही है. कम उम्र में ही आर्थराइटिस हो रहा है. डॉक्टर बताते हैं कि हड्डियों को अच्छा रखना है तो इसके लिए एक्सरसाइज करनी चाहिए, लेकिन अब बीएमजे हेल्थ जर्नल में सबसे फायदेमंद एक्सरसाइज के बारे में बताया गया है. जिसको करने से हड्डियां मजबूत रहती हैं. बोन डेंसिटी कम होने का रिस्क घटता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी होने का भी खतरा कम रहता है.
BMJ में छपी इस स्टडीमें, चीन के रिसर्चर्स ने अलग-अलग एक्सरसाइज रूटीन और बोन मिनरल डेंसिटी (BMD), जो हड्डियों की मज़बूती का एक अहम पैमाना है . इसके बीच संबंध का पता लगाने की कोशिश की. इसमें ऑस्टियोपोरोसिस और उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों के कमजोर होने की समस्या से बचाव पर खास ध्यान दिया गया. स्टडी करने वाली टीम ने 124 पिछले ट्रायल्स से 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के 18,429 लोगों का डेटा इकट्ठा किया.
रिसर्चर्स के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ बोन मिनरल डेंसिटी में कमी का सीधा संबंध हड्डियों की मजबूती कम होने और फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ने से है.अच्छी एक्सरसाइज, दवा-आधारित इलाज के साथ एक बहुत ही आसान और किफायती तरीका है, जो हड्डियों और पूरे शरीर, दोनों को फायदा पहुंचाता है.
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हड्डियों को मजबूत करने के मामले में ये एक्सरसाइज सबसे फायदेमंद
डेटा को अलग-अलग एक्सरसाइज़ ग्रुप्स ,जैसे रेजिस्टेंस ट्रेनिंग, योग और वॉकिंग में बांटा गया. रिसर्चर्स ने एक्सरसाइज की डोज का हिसाब मेटाबोलिक इक्विवेलेंट ऑफ़ टास्क' मिनट्स प्रति हफ्ते के जरिए लगाया. यह असल में एनर्जी बर्न और एक्सरसाइज की तेजी को नापता है.
डेटा से पता चला कि हड्डियों को मजबूत करने के मामले में तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग) या जॉगिंग सबसे बेहतर रही मिली. रिसर्च में पता चला कि रोज ब्रिस्क वॉकिंग करने से हड्डियों की मजबूती बनी रहती है और बुढ़ापे में हड्डियों के कमजोर होने से भी काफी हद तक बचाव किया जा सकता है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस से भी बचाव होता है.
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ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी में भी फायदेमंद
ऑस्टियोपोरोसिस दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है और अकसर इससे हड्डियां टूट सकती हैं. माना जाता है कि ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी कमजोरी के कारण हर साल 5,00,000 से ज्यादा हड्डियां टूटती हैं. इन फ्रैक्चर से सेहत से जुड़ी और भी परेशानियां हो सकती हैं और समय से पहले मौत भी हो सकती है, खासकर बुज़ुर्गों में, हड्डियों को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है,जिसका मतलब है कि उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और लंबे समय तक हिल-डुल नहीं पाते है. स्टडी से यह पता चला कि इस एक्सरसाइज के जरिए इनमें से कुछ चोटों और समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है.