दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं कुछ दूसरे राज्यों में भी केस सामने आ रहे हैं. देश में पूरे साल में बारिश के मौसम में ही इस बीमारी के अधिक केस आते हैं, लेकिन बारिश और स्वाइन फ्लू का क्या कनेक्शन है. ये फ्लू कितना खतरनाक है और आम फ्लू से कितना अलग है इस बारे में जानते हैं.
डॉक्टर बताते हैं कि मानसून में हवा में नमी का स्तर 80-90% तक पहुंच जाता है. इस वातावरण में H1N1 वायरस की बूंदें हवा और सतहों पर लंबे समय तक जिंदा रहती हैं. ऐसे में इनके संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस मौसम में
तापमान घटता है, जिससे वायरस तेजी से फैलने लगता है. बारिश से बचने के लिए लोग घरों, मेट्रो और दफ्तरों में बंद खिड़कियों के बीच एक साथ रहते हैं. खराब वेंटिलेशन की वजह से एक मरीज की छींक या खांसी से पूरा कमरा संक्रमित हो सकता है.
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स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू के लक्षणों में क्या अंतर होता है
बीएलके मैक्स हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में एचओडी डॉ. राजिंद्र कुमार सिंघल ने इस बारे में बताया है. डॉ सिंघल कहते हैं कि सामान्य फ्लू में बुखार हल्का होता है, लेकिन स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार होने लगता है. फ्लू में शरीर में हल्का दर्द होता है, लेकिन स्वाइन फ्लू में मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द व ऐंठन होने लगती है. स्वाइन फ्लू में बहुत कमजोरी और थकावट हती है और लगातार खांसी आती रहती है जो सूखी होती है. कुछ मामलों में सांस लेने में भी परेशानी होन लगती है. अगर किसी को ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो फिर डॉक्टर से सलाह लेकर अस्पताल में इलाज कराना जरूरी है.
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किनको है सबसे ज्यादा खतरा?
अधिकांश लोगों में यह बीमारी 5 से 7 दिनों में खुद ठीक हो जाती है, लेकिन 5 साल से छोटे बच्चे और 65 साल से ऊपर के बुजुर्ग में ज्यादा खतरा होता है. जिन लोगों को पहले से ही डायबिटीज है या सांस की कोई बीमारी है तो उनको भी
अधिक रिस्क हो सकता है. बारिश के इस मौसम में इन लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है.