बीते कुछ दिनों से केरल में शिगेला इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे एक महीने के भीतर ही 5 मरीजों की मौत हो चुकी है और करीब 70 लोग संक्रमित हो गए हैं. बढ़ते मामलों को लेकर केरल का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. केरल में केस बढ़ने से अन्य राज्यों में भी शिगेला के फैलने का रिस्क बना हुआ है. ऐसे में इसके बारे में जानना जरूरी है. शिगेला क्या है इसके मामले क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं और ये कितना खतरनाक है. यह जानने के लिए Aajtak.in ने डॉक्टरों से बातचीत की है.
शिगेला इंफेक्शन एक बीमारी है जो आंतों पर अटैक करती है. इसे शिगेलोसिस भी कहा जाता है. यह शिगेला बैक्टीरिया नाम के कीटाणुओं के कारण होती है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों को शिगेला इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज़्यादा होता है, लेकिन यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है. इसके लिए जिम्मेदार कीटाणु संक्रमित व्यक्ति के जरिए आसानी से फैलते हैं. कीटाणुओं के शरीर में जाने के बाद यह होता है. कुछ मामलों में ये काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
शिगेला इंफेक्शन के लक्षण क्या होते हैं
दस्त जिसमें खून आ सकता है
बुखार
पेट दर्द
शरीर में हल्का दर्द
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कहां मौजूद होते हैं शिगेला फैलाने वाले बैक्टीरिया
इस बारे में सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया है. डॉ. किशोर बताते हैं कि शिगेला फैलाने वाले बैक्टीरिया कई जगह पर हो सकते हैं. खासतौर पर गंदे पानी और खराब भोजन में ये होते हैं. इसके अलावा दूषित सतहें जैसे दरवाजों के हैंडल, टॉयलेट की सीट पर भी ये हो सकते हैं. जो व्यक्ति शिगेला से संक्रमित होते हैं उनके मल में भी ये बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. मक्खियों के जरिए भी यह भोजन तक पहुंच सकते हैं.
अगर किसी व्यक्ति ने शिगेला वाले बैक्टीरिया से संबंधित सतह से संपर्क किया है तो फिर उसके हाथों से मुंह में ये बैक्टीरिया चल जाता है. ऐसा आमतौर पर संक्रमित भोजन करने और पानी पीने से होता है.
शिगेला कितना खतरनाक
डॉ.किशोर के मुताबिक, शिगेला अधिकतर मामलों में उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण करता है, लेकिन कुछ मरीजों में यह काफी खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है उनको रिस्क अधिक है. शिगेला इन्फेक्शन होने से कुछ बच्चों को दौरे पड़ सकते हैं. दौरों के कारण व्यवहार में बदलाव, शरीर में झटके लगना और बेहोशी हो सकती है. ये उन बच्चों में ज़्यादा आम हैं जिन्हें तेज़ बुखार होता है. अगर दौरे पड़ रहे हैं और सही समय पर इलाज न हो तो यह खतरनाक हो सकता है.
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कब जानलेवा साबित होता है शिगेला
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. एल.एच घोटेकर ने इस बारे में बताया है. डॉ. घोटेकर बताते हैं कि शिगेला से पीड़ित कुछ मरीजों में हीमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम का खतरा रहता है. यह खून पर गंभीर असर करता है. इससे किडनी फेल होने का भी रिस्क होता है. कुछ मरीजों में टॉक्सिक मेगाकोलन भी होता है. इसकी वजह से शरीर से मल और गैस बाहर निकलने में परेशानी होती है. इससे कोलन का साइज बढ़ता रहता है. अगर सही समय पर इलाज न मिले तो कोलन के फटने का खतरा रहता है. ये स्थिति जानलेवा साबित होती है.
शिगेला से बचाव के लिए क्या करें
हाथ धोकर भोजन करें
पानी को उबालकर पीना शुरू करें
अगर किसी को तेज बुखार है तो उसके संपर्क में आने से बचें
स्ट्रीट फूड से परहेज करें
शिगेला के लक्षण दिखने पर इलाज कराएं.