रूस की एक एंटी प्लेग लैब में काम करने वाली एक महिला की निमोनिया से मौत हो गई. इसके बाद करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है. महिला की मौत का कारण सीधे तौर पर प्लेग नहीं बताया गया है. उनके शरीर में प्लेग बैक्टीरिया मिलने की बात भी सामने नहीं आई है, लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर लैब के एक बड़े हिस्से को आइसोलेशन में रखा गया है. ये वही हिस्सा जहां महिला कर्मचारी काम कर रही थी.
इस घटना के बाद ये जानना जरूरी है कि आखिर ये प्लेग क्या है. कैसे फैलता है और इंसानों को इससे कितना खतरा है. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इसके बारे में बताया है.
डॉ. सुभाष बताते हैं कि प्लेग यर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से फैलता है.यह बैक्टीरिया आमतौर पर चूहों और कुछ दूसरे छोटे संक्रमित जानवरों के शरीर पर रहने वाले पिस्सू में पाया जाता है. चूहों के अलावा गिलहरी, प्रेयरी डॉग, जरबिल और गिनी पिग से भी प्लेग फैलने का रिस्क होता है. क्योंकि इनके शरीर पर भी संक्रमित पिस्सू हो सकते हैं. जब ये पिस्सू किसी इंसान को काट लेता है तो उसमें प्लेग की बीमारी हो जाती है. संक्रमित जानवर का कच्चा या अधपका मांस खाने से आपको प्लेग हो सकता है.
यह भी पढ़ें: रूस में प्लेग का खौफ! महिला रिसर्चर की मौत के बाद 200 लोग क्वारंटीन में भेजे गए
इंसानों के लिए कितना खतरनाक है प्लेग
डॉ. सुभाष कहते हैं कि प्लेग कई तरीके का होता है. इनमें सबसे ज्यादा सर्कुलेशन में ब्यूबोनिक प्लेग रहता है. जब इससे संक्रमित पिस्सू किसी इंसान को काटता है तो ये बैक्टीरिया इंसान के लिम्फ नोड तक पहुंचता है. इसमें सबसे पहले उस हिस्से में सूजन होती है और तेज दर्द होने लगता है. इसको बबोज (Buboes) कहते हैं.
ब्यूबोनिक प्लेग के अलावा न्यूमोनिक प्लेग भी इंसानों को ंफैल सकता है और ये सबसे खतरनाक माना जाता है. इसमें पिस्सू के काटने के बाद बैक्टीरिया का संक्रमण लंग्स पर होने लगता है. इससे निमोनिया जैसे लक्षण दिखते हैं. इसको ही न्यूमोनिक प्लेग कहते हैं. अगर ये हो जाए और समय पर इलाज न मिले तो कुछ मामलों में निमोनिया मौत का कारण भी बन सकता है.
डॉ. सुभाष कहते हैं कि प्लेग इस दुनिया की सबसे पुरानी महामारियों में से एक है. इसका इतिहास दशकों पुराना है. दुनिया में कई बार ये बीमारी फैली है और इससे लाखों लोगों की मौतें भी हुई हैं.
यह भी पढ़ें: जब यूरोप में फैला 'ब्लैक डेथ', दुनियाभर में प्लेग से मरे थे 2.5 करोड़ लोग
एक इंसान से दूसरे तक कैसे पहुंचता है प्लेग?
प्लेग के कई प्रकारों में न्यूमोनिक फ्लेग का इंसानों में संक्रमण का रिस्क ज्यादा होता है. अगर कोई इंसान इससे संक्रमित हो जाता है तो उसके खांसने या छींकने पर ये संक्रमण दूसरे व्यक्ति में चला जाता है. यह कुछ ऐसा ही है जैसे कोई दूसरा वायरल संक्रमण एक से दूसरे इंसान में जाता है.
प्लेग के लक्षण क्या होते हैं
अचानक तेज बुखार
सांस लेने में दिक्कत तक
ठंड लगना
सिरदर्द
शरीर में दर्द
कमजोरी
खांसी
सीने में दर्द
निमोनिया
बचाव में किन बातों का रखें ध्यान?
प्लेग से बचने के लिए जरूरी है कि पिस्सुओं के काटने से बचें. इसके लिए संक्रमित या मरे हुए जानवरों को हाथ न लगाएं. अगर किसी व्यक्ति को न्यूमोनिक प्लेग होने का संदेह हो तो उसके बेहद करीब जाने से बचना चाहिए, खासकर खांसते व्यक्ति के साथ लंबे समय तक नजदीकी संपर्क से बचना जरूरी है.
अपने पालतू जानवरों को सुरक्षित रखें. उन्हें बाहर खुले में न घूमने दें, खासकर अगर आप ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां प्लेग फैला हुआ है.
क्या प्लेग का इलाज संभव है?
डॉ. सुभाष कहते हैं कि प्लेग इतनी पुरानी बीमारी है कि इसका बहुत अच्छा इलाज मौजूद है. अगर इसका पता शुरुआती दौर में चल जाए तो एंटीबायोटिक दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है.