नौकरी की तलाश में कई उम्मीदवार एक साथ दो या उससे ज्यादा कंपनियों में इंटरव्यू देते हैं. कई बार ऐसा होता है कि एक कंपनी से ऑफर लेटर मिलने के बाद उम्मीदवार को दूसरी जगह बेहतर सैलरी या पद का ऑफर मिल जाता है. ऐसे में वह पहली कंपनी में जॉइन करने के बजाय दूसरी कंपनी का ऑफर को स्वीकार कर लेते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना उम्मीदवार के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है? क्या पहली कंपनी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है या उससे जुर्माना वसूल सकती है? इसका जवाब ऑफर लेटर की शर्तों और उम्मीदवार की ओर से दी गई स्वीकृति पर निर्भर करता है.
क्या ऑफर लेटर स्वीकार करना कानूनी समझौता है?
भारतीय कानून में हर नौकरी का ऑफर अपने आप में एक जैसा नहीं होता. भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 2 और धारा 10 के तहत, ऑफर और उसे स्वीकार से अनुबंध बन सकता है, बशर्ते कानून में तय जरूरी शर्तें पूरी हों. इसलिए यह देखना जरूरी है कि उम्मीदवार ने क्या केवल ऑफर लेटर मिला था या उसने इसे स्वीकार भी कर लिया था.
लेकिन अगर उसने इसे स्वीकार कर लिया था तो, उसमें दी गई शर्तें क्या हैं? कई मामले में अगर उम्मीदवार ने ऑफर स्वीकार कर लिया है, तो कुछ परिस्थितियों में कंपनी इसे अनुबंध मानकर उसके उल्लंघन का दावा कर सकती है. हालांकि, हर ऑफर लेटर को बिना उसकी शर्तें देखे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं कहा जा सकता.
क्या दूसरी कंपनी जॉइन करने पर लग सकता है जुर्माना?
अगर उम्मीदवार ने ऑफर स्वीकार करने के बाद जॉइन नहीं किया, तो पहली कंपनी उसके खिलाफ अनुबंध उल्लंघन का दावा करने की कोशिश कर सकती है. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 73 के तहत अनुबंध टूटने से हुए नुकसान के लिए मुआवजे का प्रावधान है. वहीं, धारा 74 के तहत अनुबंध में पहले से तय जुर्माने या रकम की स्थिति में उचित मुआवजा देने की बात कही गई है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी ऑफर लेटर में लिखी कोई भी रकम उम्मीदवार से अपने आप वसूल सकती है. मुआवजे की मांग और उसकी वैधता मामले की परिस्थितियों तथा अनुबंध की शर्तों पर निर्भर होती है.
क्या कंपनी उम्मीदवार को दूसरी जगह नौकरी करने से रोक सकती है?
सिर्फ इसलिए कि उम्मीदवार ने पहली कंपनी का ऑफर छोड़कर दूसरी कंपनी जॉइन कर ली है, पहली कंपनी उसे दूसरी जगह काम करने से अपने आप नहीं रोक सकती. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 व्यापार या पेशे पर अनुचित रोक लगाने वाले समझौतों से संबंधित है. हालांकि, गोपनीय जानकारी, कंपनी के डेटा और अन्य वैध संविदात्मक दायित्वों से जुड़ी शर्तें अलग हो सकती हैं.
क्या है उम्मीदवार के पास विकल्प?
अगर किसी उम्मीदवार को पहली कंपनी का ऑफर मिलने के बाद दूसरी जगह नौकरी मिल जाती है, तो उसे पहली कंपनी को समय रहते इसकी जानकारी देनी चाहिए. HR को ईमेल के जरिए ऑफर स्वीकार न करने या जॉइन न कर पाने की बात साफ तरह से रखनी चाहिए.
उम्मीदवार को ऑफर लेटर में नोटिस पीरियड, जॉइनिंग से जुड़ी शर्तें, बॉन्ड और किसी तरह की पेनल्टी का प्रावधान भी ध्यान से पढ़ना चाहिए. अगर कंपनी जुर्माने या कानूनी कार्रवाई की धमकी देती है, तो दस्तावेजों के साथ किसी योग्य वकील से सलाह लेना उचित होगा.