खराब खानपान और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल के कारण लिवर की बीमारियां बढ़ रही है. खासतौर पर फैटी लिवर बहुत कॉमन हो गया है. लिवर पर फैट बढ़ने से ये समस्या होती है, हालांकि फैटी लिवर को लिवर खुद ही ठीक कर सकता है, लेकिन इसके बाद एक ऐसी स्टेज आती है जिसमें लिवर को ठीक होने का मौका मिलता नहीं या एक बहुत मुश्किल से ठीक हो पाता है. इस स्टेज को क्या कहते हैं. ये कब आती है इस बारे में जानते हैं.
लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता कैसे होती है?
लिवर की एक खास बात यह है कि इसमें खुद को दोबारा बनाने की क्षमता होती है. मेडिकल साइंस में इसे लिवर रीजनरेशन कहते हैं. जब लिवर के कुछ हिस्से को सर्जरी से निकाल दिया जाता है या किसी कारण से इसकी कुछ सेल्स खत्म हो जाती हैं, तो बची हुई स्वस्थ सेल्स बढ़कर लिवर के आकार और काम करने की क्षमता को फिर से पहले जैसा कर सकती हैं. यहां तक की जब कोई व्यक्ति अपना लिवर का हिस्सा डोनेट करता है तो उसके बाद भी कुछ महीनों में लिवर की क्षमता पहले जैसी हो जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लिवर हर तरह के नुकसान से पूरी तरह उबर सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि नुकसान कितना हुआ है, उसकी वजह क्या है और बीमारी किस स्टेज में है.आमतौर पर लिवर फाइब्रोसिस में इसके खराब होने की शुरुआत हो जाती है.
यह भी पढ़ें: क्या रोज पैकेट वाला फ्रूट जूस पीने से लिवर खराब हो सकता है? डॉक्टर ने बताया किनको ज्यादा खतरा
लिवर फाइब्रोसिस क्या होता है.
राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरि ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर लिवर लगातार खराब हो रहा है और इसकी हेल्थ पर ध्या नहीं दे रहे हैं तो लिवर में सूजन आ सकती है. अगर ऐसा लगातार होता रहे तो लिवर में कोलेजन जमा होने लगते हैं. इससे स्वस्थ टिश्यू की जगह निशान जैसा टिश्यू बनने लगता है, इस स्थिति को लिवर फाइब्रोसिस कहते हैं. अगर इसको कंट्रोल न करें तो सिरोसिस बन सकता है.
यह भी पढ़ें: तेजी से वजन घटाने के लिए खाना छोड़ना पड़ सकता है भारी, हार्ट और लिवर पर कितना खतरा?
सिरोसिस होने पर क्या होता है?
जब लिवर में निशान बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं और उसकी सामान्य बनावट बिगड़ने लगती है, तो इस स्थिति को सिरोसिस कहते हैं।
इसमें निशान वाले टिश्यू लिवर के सामान्य कामकाज में रुकावट पैदा करते हैं. सिरोसिस की वजह से पेट में पानी भरना, खून की उल्टी होना, आसानी से खून बहना और दिमाग के कामकाज पर असर पड़ने लगता है. ये वही कंडीशन है जिसमें लिवर खराब होने लगता है और कई मामलों में ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है.