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ब्लड टेस्ट में LFT की रिपोर्ट नॉर्मल है, क्या फिर भी खराब हो सकता है लिवर? डॉक्टर ने बताया कब है खतरा

पेट दर्द और बार-बार उल्टी की समस्या होने पर डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराने की सलाह देते हैं, जिसमें ALT, AST और बिलीरुबिन के लेवल देखे जाते हैं. क्या LFT रिपोर्ट सामान्य होने का मतलब है कि लिवर बिलकुल ठीक है?

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ब्लड टेस्ट
ब्लड टेस्ट

अगर किसी को पेट दर्द या अकसर उल्टी आने की परेशानी होती है तो डॉक्टर आमतौर पर  LFT यानी लिवर फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. इस टेस्ट में  ALT (SGPT), AST (SGOT), बिलीरुबिन के लेवल का पता चलता है.  इनकी मदद से डॉक्टर समझते हैं कि लिवर की सेल्स को नुकसान हो रहा है या नहीं.लेकिन क्या अगर एलएफटी टेस्ट में सब कुछ नॉर्मल है तो क्या इसका मतलब लिवर बिलकुल ठीक है या  किसी दूसरे टेस्ट की भी जरूरत है? 

डॉक्टर बताते हैं कि लिवर की कुछ बीमारियां जैसे फैटी लिवर का पता  LFT टेस्ट से भी चल सकता है. अगर ALT (SGPT), AST (SGOT) बढ़ा है तो ये संकेत है कि लिवर में कुछ खराबी शुरू हो गई है. हालांकि कुछ समस्याएं बिना लक्षणों के बढ़ सकती हैं. मसलन, फैटी लिवर में लिवर की सेल्स में ज्यादा फैट जमा होने लगता है. इसके बावजूद कई मरीजों में ALT और AST का स्तर सामान्य रह सकता है. इसी तरह, लिवर में फाइब्रोसिस यानी घाव के निशान बनने में भी  LFT रिपोर्ट सामान्य सीमा में आ सकती है. इसलिए सिर्फ LFT ब्लड टेस्ट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि लिवर पूरी तरह स्वस्थ है.

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लिवर की बीमारी का पता लगाने के लिए कौन-सी जांच होती है?

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. एल.एच घोटेकर ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर आपको वजन घटना, पेट में हमेशा दर्द बने रहना, पाचन सही न होना और उल्टी की शिकायत रहती है तो फिर दूसरे टेस्ट भी जरूरी हैं. जैसे आप अल्ट्रासाउंड जरूर करा लें. इससे  लिवर में फैट जमा होने और दूसरी समस्याओं का पता चल सकता है. हालांकि, शुरुआती फैटी लिवर या फाइब्रोसिस को पहचानने में इसकी सीमाएं हैं.

डॉक्टर की सलाह पर आप फाइब्रोस्कैन करा सकते हैं, जिससे फाइब्रोसिस का अंदाजा लगाया जा सकता है. इससे लिवर में फैट का भी आकलन किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हेपेटाइटिस के टेस्ट, एल्ब्यूमिन और प्लेटलेट्स जैसी जांच भी करा सकते हैं.

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क्या सभी के लिए ये टेस्ट जरूरी हैं? 

डॉ. घोटेकर बताते हैं कि  हर व्यक्ति को ये सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती. कौन-सी जांच सही रहेगी, यह डॉक्टर तय करते हैं.

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

अगर आंखों में पीलापन आ रहा है, पेट या पैरों में सूजन, पेट में पानी भरना जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो इस मामले में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए. 

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