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बैठने से जम रहा खून! युवाओं में बढ़ा डीप वेन थ्रोमबोसिस का खतरा, ये लोग रहें सावधान

एक जानलेवा बीमारी युवाओं में चुपचाप घर कर रही है. दरअसल, युवा आज कल घंटों बैठे रहते हैं और बैठने की यही आदत डीप वेन थ्रोमबोसिस (DVT) का खतरा बढ़ा रही है. अगर इस बीमारी पर ध्यान ना दिया जाए तो ये जानलेवा भी बन सकती है. जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के आसान तरीके.

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डीप वेन थ्रोमबोसिस के लक्षण शुरुआत में बहुत ही हल्के नजर आते हैं. (Photo: ITG)
डीप वेन थ्रोमबोसिस के लक्षण शुरुआत में बहुत ही हल्के नजर आते हैं. (Photo: ITG)

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'काम ज्यादा, मूवमेंट कम' लोगों का नया नॉर्मल बन गया है. ये एक ऐसा सच बन चुका है, जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता है. सुबह से लेकर रात तक ज्यादातर लोग ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर लैपटॉप या मोबाइल देखते ही रह जाते हैं. आजकल की नौकरियों की डिमांड ही घंटों बैठकर लैपटॉप पर काम करना होती है. ऑफिस से घर लौटने के बाद लोग इतना दिमागी रूप से इतना थक जाते हैं कि आराम से बैठकर या लेटकर रेस्ट करना चाहते हैं. ऐसे में घंटों एक ही जगह बैठे रहना अब हमारी आदत बन गया है. काम तो होता रहता है, लेकिन शरीर का मूवमेंट ना के बराबर रह जाता है.

आपको ये पढ़ने में बहुत ही नॉर्मल लग रहा होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये आदत धीरे-धीरे आपके शरीर के लिए कितनी खतरनाक बन सकती है? दरअसल, ये आदत चुपचाप एक खतरनाक बीमारी को जन्म दे रही है. डॉक्टरों के मुताबिक, युवाओं में डीप वेन थ्रोमबोसिस (Deep Vein Thrombosis) चलिए जानते हैं क्या है ये बीमारी और कितनी खतरनाक है.

क्या होती है डीप वेन थ्रोमबोसिस?
डॉक्टर्स का कहना है कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में खून का बहाव (ब्लड सर्कुलेशन) पर असर होता है, इसका असर खासकर पैरों में देखने को मिलता है. जब खून सही तरीके से नहीं बहता, तो नसों में थक्का (क्लॉट) बनने लगता है. इसे डीप वेन थ्रोमबोसिस कहा जाता है. ये आमतौर पर पैरों के बहुत अंदर की नसों में होता है और शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं.

अगर यs थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो ये जानलेवा भी बन सकता है. पहले ये बीमारी उम्रदराज लोगों या ऑपरेशन के बाद देखी जाती थी, लेकिन अब ये युवाओं में भी देखने को मिल रही है.

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क्यों बढ़ रहा है खतरा?
डॉक्टर्स के मुताबिक, लोगों की बदलती लाइफस्टाइल ही इस गंभीर बीमारी के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बन गई है. आजकल ज्यादातर लोग घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, जिससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बहुत धीमा हो जाता है और खून का थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है.

फिजिकल एक्टिविटी लगातार घटना भी इसकी बड़ी वजह है. लोग घंटों बैठे रहते हैं और उन्हें एक्सरसाइज या वॉक करने का समय ही नहीं मिल पाता है. इसके साथ ही बहुत से लोग पानी कम पीते हैं, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है, जो डीप वेन थ्रोमबोसिस होने के खतरे को और बढ़ाता है.

इतना ही नहीं स्मोकिंग, ज्यादा स्ट्रेस और अनियमित दिनचर्या भी इस समस्या को गंभीर बना रहे हैं. वहीं, वर्क फ्रॉम होम का बढ़ता चलन, घंटों गेमिंग, लगातार बिंज वॉचिंग और लंबी ट्रैवलिंग जैसी आदतें की वजह से भी इस बीमारी के खतरे को और तेजी से बढ़ा रही हैं.

क्या फिट लोगों को भी हो सकती है ये बीमारी?
अब एक सवाल ये उठता है कि क्या रोजाना वॉक करने वाले, घंटों जिम में पसीना बहाने वाले 'फिट' लोगों को भी ये बीमारी हो सकती है? तो इसका जवाब है हां, बिल्कुल हो सकती है. ये एक बड़ा मिथक है कि सिर्फ अनफिट लोग ही डीप वेन थ्रोमबोसिस का शिकार होते हैं. सच्चाई ये है कि फिट दिखने वाले लोग भी इसके खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं.

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जिम जाने वाले लोग, एथलीट, स्टूडेंट्स, गेमर्स और बार-बार फ्लाइट में लंबा सफर करने वाले लोग इन सभी में भी डीप वेन थ्रोमबोसिस का खतरा हो सकता है. इसकी वजह साफ है अगर ये लोग भी लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, बीच-बीच में मूवमेंट नहीं करते और पानी कम पीते हैं, तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है. यानी फिटनेस अच्छी होने के बावजूद अगर लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठना शामिल है, तो खतरा बना रहता है. इसलिए सिर्फ फिट होना काफी नहीं, एक्टिव रहना भी उतना ही जरूरी है.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डीप वेन थ्रोमबोसिस धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए इसके लक्षण शुरुआत में अक्सर बहुत ही हल्के लगते हैं. लेकिन आपका ध्यान रखना जरूरी है. अगर आपको लगातार नीचे दी गई परेशानी हो रही हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

  • पिंडली में दर्द
  • एक पैर में सूजन
  • भारीपन या जकड़न महसूस होना
  • स्किन का गर्म या लाल होना
  • खड़े होने या पैर मोड़ने पर दर्द बढ़ना

क्यों खतरनाक है डीप वेन थ्रोमबोसिस?
डीप वेन थ्रोमबोसिस को हल्के में लेना आपकी बहुत बड़ी गलती हो सकती है. अगर पैर की नसों में बना खून का थक्का टूटकर शरीर में आगे बढ़ जाए और फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो ये पल्मोनरी एम्बोलिज्म बन सकता है. ये स्थिति जानलेवा हो सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है.

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अगर डीप वेन थ्रोमबोसिस इस स्टेज तक पहुंच जाती है तो आपको अचानक सांस फूलने की परेशानी हो सकती है, सीने में तेज दर्द हो सकता है और दिल की धड़कन तेज होने की समस्या हो सकती है.

कैसे करें बचाव? 
ये कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. थोड़ी-सी सावधानी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. अपनी लाइफस्टाइल में कुछ चीजें शामिल करें, जैसे: 

हर 30–60 मिनट में उठकर थोड़ा टहलें
दिनभर अच्छे से पानी पिएं
बैठकर भी पैरों की हल्की एक्सरसाइज करें
सही पॉश्चर में बैठें और पैरों को लंबे समय तक क्रॉस करके न रखें
लंबी यात्रा के दौरान बीच-बीच में उठकर जरूर चलें

छोटी-छोटी ये आदतें आपके ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाए रखती हैं और डीप वेन थ्रोमबोसिस जैसे खतरों से बचाने में मदद करती हैं.

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