scorecardresearch
 

सांस फूलना हार्ट की बीमारी या फेफड़ों का इंफेक्शन? डॉक्टर ने बताया कैसे करें पहचान

सांस फूलने की समस्या को कुछ लोग हल्का इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते है, लेकिन यह हार्ट या फेफड़ों की गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, लेकिन कैसे पता चले कि सांस फूलना लंग्स की बीमारी है या हार्ट की. इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.

Advertisement
X
हार्ट और लंग्स
हार्ट और लंग्स

सांस फूलने की समस्या को लोग थकान या सांस से जुड़े इंफेक्शन की वजह से होने वाली परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर बार-बार सांस फूल रही है तो यह दिल या फेफड़ों से जुड़ी किसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है. लेकिन पता कैसे चलें कि ये नॉर्मल इंफेक्शन है या लंग्स और हार्ट की कोई गंभीर बीमारी? इस बारे में डॉक्टर ने बताया है. 

फेफड़ों की बीमारियों में सांस क्यों फूलती है?

फेफड़े शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन जब कोई इंफेक्शन या बीमारी हो जाती है तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है.अगर इंफेक्शन हल्का है तो गंभीर समस्या नहीं होती है, लेकिन अगर ये ज्यादा दिनों तक बना रहे तो इससे अस्थमा, सीओपीडी निमोनिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं. अगर किसी को  सांस फूलने के साथ घरघराहट, लगातार खांसी, सीने में जकड़न है तो ये साइन है कि लंग्स में इंफेक्शन ज्यादा है और लंग्स की कोई बीमारी हो हई है. 

यह भी पढ़ें: सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना कहीं हार्ट की बीमारी तो नहीं? कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने पर भी क्यों है खतरा?

सांस फूलना कब दिल की बीमारी हो सकता है?

सी.के. बिरला हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट में डायरेक्टर डॉ. विकास मित्तल ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों में लिक्विड जमा होने लग सकता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है. अगर रोजमर्रा के काम करते समय, लेटने पर या रात में सोते हुए सांस फूलती है, थोड़ा सा पैदल चलले समय भी सांस फूल रही है और छाती में हल्का दर्द भी है तो इसकी वजह दिल से जुड़ी समस्या भी हो सकती है. खासकर अगर इसके साथ पैरों में सूजन, दिल की धड़कन तेज जैसी परेशानी हो रही है तो ये सिर्फ लंग्स की समस्या नहीं बल्कि हार्ट की बीमारी होती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Risk of heart disease: महिलाओं को शराब पीने से हार्ट की बीमारी का खतरा अधिक! जानें कितनी मात्रा सुरक्षित

किस टेस्ट से चलता है पता

फेफड़ों की जांच के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, छाती का एक्स-रे होता है. वहीं, दिल की धड़कन और उसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी देखने के लिए ईसीजी, दिल की बनावट और कामकाज की जांच के लिए इकोकार्डियोग्राफी की जाती है, लेकिन ये सभी टेस्ट आपको डॉक्टर की सलाह पर और लक्षणों के हिसाब से कराने चाहिए.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement