ब्रेस्टफीडिंग से महिलाओं को मिलते हैं कई फायदे,इतनी बीमारियों से हो सकता है बचाव अक्सर ब्रेस्टफीडिंग को सिर्फ बच्चे की अच्छी ग्रोथ और न्यूट्रिशन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ब्रेस्टफीडिंग मां की हेल्थ के लिए भी उतनी ही जरूरी है. यह महिलाओं को कई बीमारियों से बचा सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को बच्चे के जन्म के एक घंट के भीतर ही उसकी ब्रेस्ट फीडिंग करा देनी चाहिए. इससे सेहत को काफी फायदा मिलता है.
यह डिलीवरी के बाद शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करती है और भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम कर सकती है. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन बनता है, जिससे यूट्रस जल्दी अपनी सामान्य स्थिति में लौटता है. इससे डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग का खतरा कम हो सकता है. साथ ही, दूध पिलाने में शरीर से कैलोरी खर्च होती है, जिससे प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है.
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ब्रेस्टफीडिंग से कई बीमारियों का खतरा होता है कम
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मानिनि पटेल ने इस बारे में बताया है. वह कहती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग से एक नहीं कई बीमारियों का खतरा कम होता है. लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और ओवेरियन कैंसर का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का जोखिम भी कम होने की संभावना रहती है. यह हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखने में भी मदद करती है.
मेंटल हेल्थ भी अच्छी रहती है
ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ मां की शारीरिक सेहत ही नहीं, बल्कि उसकी मानसिक सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है. इस दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोन बनते हैं, जो मानसिक तनाव कम करने, मन को शांत रखने और मूड बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इससे मां और बच्चे के बीच बॉन्डिंग मजबूत होता है और मां को अपने शिशु के साथ सुरक्षा व अपनापन महसूस होता है.
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जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू कर देनी चाहिए
डॉ. मानिनि बताती हैं कि बच्चे के जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू कर देनी चाहिए. जन्म से लेकर पहले छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यही उसके लिए पूरा पोषण और रोगों से सुरक्षा का सबसे बेहतर सोर्स है.