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चेहरे पर पिंपल, वजन बढ़ना...कहीं आपकी 11 से 12 साल की बेटी को PCOS तो नहीं, AIIMS डॉक्टरों ने बताया बड़ा खतरा

11 से 19 साल की लड़कियों में PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें पीरियड्स का समय पर न आना, चेहरे पर अधिक बाल और मुंहासे प्रमुख लक्षण हैं. दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, माता-पिता को इस बीमारी के प्रति जागरूक रहना चाहिए और लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

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कम उम्र में हो रही PCOS की बीमारी
कम उम्र में हो रही PCOS की बीमारी

अगर आपकी बेटी 11 से 12 साल की हो गई है और उसके पीरियड्स आना शुरू हो गए हैं, लेकिन समय पर नहीं आ रहे या फिर चेहरे पर ज्यादा बाल हैं और मुंहासे होने लगे हैं तो यह PCOS की बीमारी हो सकती है. एम्स दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि अब किशोरावस्था यानी 11 से 19 साल की लड़कियों को भी PCOS हो रहा है. इस उम्र की 3 से 8 फीसदी लड़कियों में यह देखा जा रहा है. यह समस्या पहले 20 से 30 साल की उम्र की लड़कियों में ज्यादा देखी जाती थी. 

इस बारे में दिल्ली AIIMS में प्रोफेसर डॉ रीमा दादा ने Aajtak.in को बताया है. वह कहती हैं अब 11 से 19 साल की लड़कियों को पीसीओएस हो रहा है. खराब खानपान, बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल, मानसिक तनाव, एक्सरसाइज न करना, परिवार में पीसीओएस की हिस्ट्री इसकी वजह हैं .PCOS की समस्या में ओवरी में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन ज्यादा बनता है. इसका असर पीरियड, स्किन, बाल और ओव्यूलेशन पर दिखाई दे सकता है. चिंता की बात यह है कि कई मामलों में प्यूबर्टी के सामान्य बदलाव और पीसीओएस के लक्षण एक जैसे दिख सकते हैं. ऐसे में इसको समझना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में माता- पिता को जागरूक होना जरूरी है. 

पीरियड लेट का मतलब PCOS जरूरी नहीं

डॉ. रीमा दादा बताती हैं कि आम तौर पर ये माना जाता है कि पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे हैं तो ये पीसीओएस है, लेकिन ये जरूरी नहीं है. इसके अलावा कुछ और लक्षणों पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. चेहरे, छाती, पेट या पीठ पर ज्यादा मोटे बाल आना, लगातार या बहुत ज्यादा मुंहासे और वजन बढ़ना जैसे लक्षण भी होने चाहिए. अगर आपकी बच्ची 10 से 12 साल की हो गई है और उसमें ये लक्षण दिख रहे हैं तो उसको पीसीओएस मानकर इलाज कराएं और इसके लिए डॉक्टरों से सलाह लें. ये बिलकुल न समझें कि ये तो कम उम्र है और इसमें ये समस्या नहीं हो सकती है. 

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एक नहीं कई डॉक्टरों की टीम हो सकती है जरूरी?

 दिल्ली AIIMS में पीडियाट्रिक विभाग प्रोफेसर डॉ. रजनी शर्मा ने Aajtak.in से बातचीत में बताया है. वह कहती हैं कि पीसीओएस का असर ओवरी तक सीमित नहीं रहता है. इसलिए इसके मामले में केवल गायनेकोलॉजी की डॉक्टर की नहीं बल्कि पीडियाट्रिक, न्यूट्रीनिस्ट और कुछ मामलों में मानसिक रोग विशेषज्ञ की जरूरत भी पड़ सकती है. इस बात का भी ध्यान रखें कि इस समस्या को समय पर समझें और इलाज कराएं नहीं तो यो आगे चलकर हार्ट डिजीज से लेकर स्ट्रोक तक का कारण बन सकती है. 

योग से हो सकती है कंट्रोल

डॉ रीमा दादा ने बताया कि एम्स में हुई रिसर्च बताती है कि योग से पीसीओएस को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. यहां कई महिलाओं में योग के सहारे इस बीमारी को काबू में किया गया है. माता- पिता को सलाह है कि अगर उनकी बच्ची या परिवार में किसी लड़की को पीसीओएस की समस्या है तो योग का सहारा लें. इसके बिलकुल फायदा मिलेगा. 

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इन लक्षणों पर जरूर रखें नजर

पीरियड समय पर न आना

चेहरे पर पुरुषों की तरह बाल आना

चेहरे पर बहुत अधिक मुंहासे

वजन तेजी से बढ़ना 
 

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