
AI से 80 के दशक की तस्वीरें बनाने के हालिया ट्रेंड के बीच उज्जैन में एक हार चुराने वाली महिला के पकड़े जाने का कथित वाकया सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर हो रहा है. ऐसा कहने वाले किसी अखबार का कथित स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं जिसकी हेडलाइन है- "1980 में सुनार की दुकान से सोने का हार चुरा कर भागी थी महिला, 2025 में AI से अपनी फोटो अपलोड कर बैठी मुसीबत में... 45 साल बाद ऐसे पकड़ी गई!"
इस ‘रिपोर्ट’ में किसी महिला की तीन तस्वीरें लगी हैं. इनमें से एक 80 के दशक के स्टाइल वाली फोटो है जिसमें महिला यंग नजर आ रही है, और उन्होंने एक सोने का नेकलेस पहना हुआ है. वहीं दूसरी तस्वीर में महिला कुछ उम्रदराज लग रही है. तीसरी फोटो में उम्रदराज महिला पुलिस की गिरफ्त में नजर आ रही है.
‘खबर’ में लिखा है कि 1980 में महिला ने एक सोने का हार चुराया था लेकिन उस वक्त पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला था. जिस दुकान में चोरी हुई थी, वहां के सुनार ने जब 2025 में फेसबुक पर उस महिला की 80 के दशक की तस्वीर देखी तो वो उसे पहचान गया और उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसने पूछताछ में अपना जुर्म भी कबूल कर लिया.

इंस्टाग्राम पर ये कहानी शेयर करने वाले एक पोस्ट पर खबर लिखे जाने तक 2.6 मिलियन व्यूज आ चुके थे.
इंडटुडे (इंडिया टुडे नहीं) और गौरवशाली भारत जैसे कुछ न्यूज आउटलेट्स ने भी इस कहानी को असली खबर बताकर छाप दिया.
हमने पाया कि ये कहानी पूरी तरह फर्जी है. उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने भी आजतक फैक्ट चेक से इस बात की पुष्टि की है.
कैसे पता चली सच्चाई?
हमें ऐसी किसी घटना से संबंधित कोई खबर किसी भी विश्वसनीय वेबसाइट पर नहीं मिली.
इसके बाद हमने वायरल हो रही अखबार की कटिंग की अलग-अलग एआई इमेज डिटेक्टर्स की मदद से जांच की. isfake.ai और ओपन एआई के इमेज डिटेक्शन टूल्स ने इसे एआई जेनरेटेड बताया.

आजतक के उज्जैन संवाददाता संदीप कुलश्रेष्ठ ने इस बारे में जिले के एसपी प्रदीप शर्मा से बात की. उन्होंने बताया कि कोई भी सुनार इस तरह की चोरी के बारे में बताने के लिए पुलिस के पास नहीं आया है. ये खबर पूरी तरह फर्जी है.
एआई से फोटो एडिट करवाने पर हो सकता है गलत इस्तेमाल
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब हम एआई से अपनी तस्वीरें बनवा कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, तो ये खतरा बना रहता है कि उनका इस्तेमाल बिना हमारी सहमति के, फेशियल रेकोग्निशन मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया जाएगा. इन तस्वीरों का इस्तेमाल डीपफेक वीडियो बनाने के लिए भी किया जा सकता है. इसके अलावा, चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट भी लोगों की तस्वीरों और अन्य डाटा को अपना मॉडल ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. अगर कोई व्यक्ति सेटिंग्स में जाकर डाटा शेयरिंग के इस विकल्प को ऑफ न करे, तो वो ऑन ही रहता है.
साफ है, 80 के दशक की तस्वीरों के ट्रेंड के बहाने एक फर्जी कहानी परोसकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है.