सेशनः गट्स है ग्लोरी
स्पीकरः फरहान अख्तर
इंडिया टुडे माइंड रॉक्स समिट 2013 के आखिरी सेशन की मॉडरेटर बनीं इंडिया टुडे ग्रुप की सिनर्जी ऑफीसर कली पुरी. इस सेशन के गेस्ट हैं बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, बेस्ट स्क्रीन प्ले, बेस्ट लिरिक्स का अवॉर्ड जीत चुके फरहान अख्तर.
अख्तर आया और छा गया...
फरहान अख्तर जैसे ही स्टेज पर आए बैकग्राउंड में बजने लगा मेरी लांड्री का एक बिल और थिरकने लगे फरहान. फिर वह खुद भी माइक पर यह गाना गुनगुनाने लगे. शोर कुछ सेकंड को रुका तो बोले, आई विश, मेरे बैंड का मैनेजर ये देखता और खुश हो जाता.
कली पहला सवाल पूछते ही ठिठक गईं. शोर सुरीला बढ़ता ही जा रहा था समंदर की तरह. फरहान बोले, ऐसा लग रहा है कि एक टब में बैठा हूं और धुड़ूम धुड़ूम बुलबुले आकर लग रहे हैं. फिर फरहान को ही बोलना पड़ा. मेरे पास कहने को भी बहुत कुछ है. आप यूं देखते रहेंगे मुझे. यहां की एनर्जी शानदार है. मैं हर साल माइंड रॉक्स आऊंगा.

सुनिए और क्या कहा फरहान ने कली के सवालों पर...
सवालः क्या आप 100 करोड़ क्लब की परवाह करते हैं?
जवाबः मेरा जवाब होगा कि हां, मुझे खुशी है कि फिल्में इतनी पसंद आ रही हैं, कमा रही हैं. मसलन, भाग मिल्खा भाग, जिसमें राकेश, प्रसून, सोनम, सबकी मेहनत थी. लोगों ने उसकी तारीफ की. मगर 100 करोड़ का सोचकर काम नहीं चल सकता, कि चलो एक फिल्म बनाते हैं, जो इतना कमाएगी. मैं चाहता हूं कि लोग मुझे एक्टर और डायरेक्टर दोनों के ही तौर पर याद रखें. जब मैं डायरेक्ट करता हूं, तो पूरी तरह से उसी में डूब जाता हूं. एक्टिंग करता हूं तो पूरी तरह खर्च हो जाता हूं. दोनों में ही सहज हूं. बेहतर किसमें कर पाता हूं, ये जनता ही तय कर सकती है. मैं तो इतना ही कहूंगा कि मैं अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ता. मसलन, रॉक ऑन के लिए बैंड की मैकेनिज्म समझनी पड़ी. भाग मिल्खा भाग के लिए फिजिकल ट्रेनिंग करनी पड़ी. मैंने एक बार कहा था कि हर शख्स में एक मिल्खा है. हर शख्स असंभव को हासिल कर सकता है. जरूरत है उस संभावना को पहचानने की और फिर अपना सब कुछ उसके लिए झोंक देने की. बीच रास्ते में छोड़ देना आसान है. मगर आखिरी तक डटे रहना और सोचे हुए को मुमकिन करना कठिन है. मगर आप टिके रहें आखिरी तक, तो आप ज्यादा मजबूत, ज्यादा बुद्धिमान होकर उभरेंगे.

सवालः भाग मिल्खा भाग के एक्सपीरियंस के बारे में.
जवाबः मेरे लिए इस फिल्म को करना एक नई लकीर खींचने की तरह था. सब सवाल पूछ रहे थे. फरहान कैसे करेगा. एथलीट का रोल, सरदार कैसे बनेगा... ये आपके लिए एक चुनौती गढ़ने का काम करता है. आप पर है, आप इसे निगेटिव सेंस में लें या चुनौती की तरह, मौके की तरह लें. किसी भी चीज को करने लायक हैं आप, ये उसे मेहनत से हासिल करके ही साबित किया जा सकता है. भाग मिल्खा भाग हो या सिनेमा के दूसरे शिखर, उनके सफर में यही दर्शन काम आया है. महत्वाकांक्षा ये नहीं रही कि किसी और से बेहतर होना है या किसी को पछाड़ना है. मकसद बस ये हो कि अपना बेस्ट करना है.
बहन जोया की फरहान करते हैं बहुत इज्जत...
एक वक्त था, जब इंडस्ट्री में कंपटीशन लगता था. जोया मेरी बहन, उसका मुझ पर बहुत असर रहा. मैं बहुत झूठ बोलता था बचपन में. मैं ये यकीन करना चाहता था कि मैं झूठ नहीं बोलता, स्टोरी गढ़ता हूं. जोया ही एक मात्र थी, जो पहचान जाती थी. कुछ गड़बड़ करता था, तो वो पकड़ लेती थी. पास आती थी और कहती थी कि जाओ और मां को इसके बारे में बताओ. इसीलिए मैं उसकी बहुत-बहुत इज्जत करता हूं. इसीलिए आज भी मैं खोया होता हूं, कन्फ्यूज होता हूं, तो उसके पास ही जाता हूं. और हां, वह बिलाशक बहुत प्रतिभाशाली राइटर और डायरेक्टर भी है.
सवालः वो क्या भूख है, जो इतना सब कुछ हासिल करने के बाद भी आपको एक्साइट करती है?
जवाबः फरहान बोले कि आप एक क्षण में फैसला करते हैं और फिर उस फैसले के हिसाब से आगे का रास्ता तय करते हैं. जब मिल्खा वाली फिल्म मिली, तो लगा कि ये मुझे मेरे कंफर्ट जोन से बाहर निकालती थी. और ये आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी था.
सवालः भाग मिल्खा भाग की मुश्किल ट्रेनिंग के दौरान कभी कठिनाई लगी हो, लगा हो कि अब और नहीं कर सकता?
जवाबः हमममम यंगस्टर्स को ध्यान में रखकर ये सवाल पूछा गया है. पर मैं सही नहीं हूं इसका जवाब देने के लिए. मैंने कॉलेज सेकंड ईयर में ही छोड़ दिया था. पर अब लगता है कि वो फैसला सही नहीं था. सबसे बड़ी गलती थी. दोस्तों के असर में कोर्स ले लिया और फिर रास्ता भटक गया. अपनी फिल्म लक्ष्य में मैंने यही दिखाया. दोस्तों के असर में मैंने कॉमर्स ले लिया था. जबकि मुझे आर्ट्स लेना चाहिए था. सबसे जरूरी चीज ये है मुश्किल में, दर्द के वक्त, कि आप खुद से सवाल पूछें कि जो कर रहे हैं, उसे करने में मजा नहीं आ रहा है क्या, तभी तो दर्द आ रहा है. उस सवाल का जवाब खोज लिया तो सब हल मिल जाएंगे.
सवालः आप झूठ बोलते थे. कॉलेज छोड़ दिया, बैकबेंचर थे. मगर इतने सफल हैं. अब इस ट्रैक को कैसे डिस्क्राइव किया जाए?
जवाबः हमेशा से ऐसा नहीं था. बीच में डल फेज था. लगता था कि इस जिंदगी में कुछ नहीं कर पाऊंगा. मां से बात करता था. कुछ समझ नहीं आ रहा था. अब लगता है उस वक्त ये भूख या कहें कि कॉम्प्लेक्स डिवेलप हो गया. मैं बहुत जल्दी उखड़ जाता हूं. तो फिर ऐसी फील्ड में आया, जहां जल्दी-जल्दी एनर्जी की निकासी बदल सकूं. तो लिखता हूं, उससे डन हुआ, तो डायरेक्शन है. एक्टिंग है, गाना है. मगर याद रखें कि डन तभी होते हैं जब अपना बेस्ट दे देते हैं.
सवाल युवाओं की तरफ से...
सवालः जब आप स्टूडेंट थे. तो पढ़ने में मन नहीं लगता था, बस फिल्में ही देखते रहते थे?
जवाब फरहान काः हां, मैं कोने में बैठा सोचता रहता था कि यार ये मैं क्या कर रहा हूं.फिर तय कर लिया कि वही करूंगा जो करना है. मैं रोज सुबह उठता था. एक फिल्म देखता था और फिर स्कूल जाता था. पर मैं स्कूल में ज्यादा फिल्मी नहीं रहता था.
अगला सवालः आप जो भी काम करते हैं सिनेमा में जिस भी रोल होते हैं, वो सफल हो जाता है.
जवाबः सफल का नहीं पता, जिसके लिए कनविक्शन होता है, वही करता हूं, बाकी सब बस हो जाता है.
अब बारी थी सिंगर गिटारिस्ट फरहान अख्तर की. सब सांस रोके कर रहे थे इंतजार कि क्या निकलता है उनके सुर खजाने से पहला गाना था पिंक फ्लायड का...
अब बारी कुछ सीरियस बात की. फरहान का कैंपेन. मर्द. मैन अगेंस्ट रेप एंड डिस्क्रिमनेशन. ये इसलिए जेहन में नहीं आया कि मेरी बेटी है. सबकी बेटियां थीं ध्यान में. लगा कि सभी को जिम्मेदारी उठानी चाहिए. मुझे लगा कि एक नागरिक के तौर पर सबकी जिम्मेदारी है. मेरी जिम्मेदारी है. तो मैं अपनी तईं इसकी कोशिश कर रहा हूं. आप अगर फर्क पैदा करना चाहते हैं तो खुद से करें, अपने आसपास से करें. वहीं से शुरुआत होती है हमेशा.
आखिरी में हुआ कदमों का कमाल, सबने किया हवन करेंगे पर डांस. फिर जाते जाते फरहान ने गाया रॉक ऑन गाना...