संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के कंटेंट पर एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने आपत्ति जताई है. उन्होंने भंसाली को ओपन लेटर लिखकर फिल्म में दिखाए गए जौहर सीन को महिमामंडित करने की बात कही है. स्वरा ने ट्वीट करते हुए द वायर में प्रकाशित अपने ओपन लेटर को पोस्ट किया है. इसके बाद स्वरा की इस आपत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग होनी शुरू हो गई.
एक यूजर ने लिखा है, भंसाली की जान ले लो, पहले अनपढ़ पीछे पड़े थे, अब अनपढ़ पीछे पड़े हैं. एक अन्य यूजर ने लिखा है कि सती होने और जौहर होने में काफी अंतर है. एक यूजर ने लिखा है स्वरा को तीन तलाक और हलाला पर लिखना चाहिए, न कि उस प्रथा पर जो सात सौ साल पहले चलती थी. एक यूजर ने कहा कि यदि कोई गुलामी पर फिल्म बनाता है तो ऐसा नहीं है कि गुलामी का मंहिमामंडन किया जा रहा है. एक यूजर ने लिखा है कि आपने भी रांझणा में स्टॉकिंग को ग्लोरिफाई किया है.
I loved the performances by all the actors in - The film is seductive in its grandeur, scale, beauty, power of its actors’s performances, music, design, vision... and therein lies the problem! Some thoughts.. sorry abt the length 🙈🙈🙈
— Swara Bhasker (@ReallySwara)
Ohh really?? Then y did I do ranjhana where stalking was glorified??
— Chirag Shah (@iamchiragshah97)
There are lots of movies made on slavery, doesn’t mean that slavery is endorsed.
— Surendra Nevatia (@SurendraNevatia)
If you write same letter on "Triple Talak" and "Halala".. Then it will be very educative. By the way story is about 700 years ago and Sati pratha is not exist in Society now , it's banned and also one thing during Johar what Rani padmini thinks , we can not predict her situation.
— Bhupendra Bhoi (@bvbhoi)
😻😻😻
— ⚡ ਸਿਮਰਨਜੀਤ ਕੌਰ ⚡ (@Simranjeet_k971)
Jaan le lo bhansali ki.
Pehle anpadh peeche pade hue the abb padhe-likhon ki bari hai., just ignore.
— Karan Gogia (@Karangogia)
Ridiculous! There is a difference between Jauhar and Sati. He has just depicted what happened then in 13th century-"Jauhar". Why so much of ruckus over this. Such a big letter using obscene language just to prove someone wrong. Watch it and leave it off your mind, its jst a movie
— Pia 🇮🇳 (@listen2pia)
बता दें कि स्वरा ने अपने ओपन लेटर की शुरुआत ‘At The End of Your Magnum Opus… I Felt Reduced to a Vagina – Only’ हेडिंग से करते हुए की है. स्वरा ने लिखा है कि इस फिल्म के जरिए भंसाली जी ने सती और जौहर प्रथा का महिमामंडन किया है. स्वरा फिल्म के जरिए स्त्रियों की पेश हुई छवि से बहुत नाराज हैं. ओपन लेटर की शुरुआत में तो स्वरा भास्कर ने भंसाली की और से फिल्म में काम करने वाले स्टार्स की तारीफ की. आगे उन्होंने लिखा कि महिलाओं को ‘वजाइना’ के तौर पर सीमित कर दिया है. फिल्म के आखिर में रानी पद्मावती द्वारा इज्जत की रक्षा के लिए खुद को जला देने के दृश्य पर वह लिखती हैं, ‘सर, महिलाओं को रेप का शिकार होने के अलावा जिंदा रहने का भी हक है.'
पुरुष का मतलब आप जो भी समझते हो-पति, रक्षक, मालिक, महिलाओं की सेक्शुअलिटी तय करने वाले, उनकी मौत के बावजूद महिलाओं को जीवित रहने का हक है.’ स्वरा आगे और भी तल्ख रुख अपनाते हुए कहती हैं, ‘महिलाएं चलती-फिरती वजाइना नहीं हैं. हां महिलाओं के पास यह अंग होता है लेकिन उनके पास और भी बहुत कुछ है. इसलिए लोगों की पूरी जिंदगी वजाइना पर केंद्रित, इस पर नियंत्रण करते हुए, इसकी हिफाजत करते हुए, इसकी पवित्रता बरकरार रखते हुए नहीं बीतनी चाहिए.’