दिवंगत बॉलीवुड सिंगर मोहम्मद रफी की जिंदगी के ऐसे तमाम किस्से हैं जो बड़े ही दिलचस्प हैं. लेकिन क्या आप उस किस्से के बारे में जानते हैं जब लाइट का अचानक चले जाना मोहम्मद रफी की जिंदगी के लिए टर्निंग प्वॉइंट बन गया था. ये यूं तो महज एक इत्तेफाक भर था. लेकिन एक ऐसा खूबसूरत इत्तेफाक जिसने रफी साहब को वो बेशकीमती मौका दे दिया था जिसकी उन्हें बहुत ज्यादा जरूरत थी.
बात तब की है जब एक बार कुंदन लाल सहगल ऑल इंडिया रेडियो में अपना शो करने आए थे. वहां मोहम्मद रफी और उनके बड़े भाई भी उनको सुनने गए थे. तब मोहम्मद रफी की उम्र 13 साल थी. उस वक्त प्रोग्राम में लाइट चले जाने से कुंदन लाल सहगल ने गाने से मना कर दिया. वहां मौजूद पब्लिक ने शोर मचाना शुरू कर दिया.
तभी मोहम्मद रफी के बड़े भाई ने आयोजकों से कहा कि भीड़ को शांत करने के लिए रफी को गाने का मौका दिया जाए. रफी की संगीत में रुचि से उनके भाई अच्छी तरह वाकिफ थे. किस्मत से उन्हें इजाजत मिल गई और उनका गाना लोगों ने बेहत पसंद किया. वहां उस वक्त के मशहूर संगीतकार श्याम सुंदर भी मौजूद थे. वो मोहम्मद रफी की आवाज सुनकर बहुत खुश हुए और उन्हें वहीं गाने का मौका दिया.
कायम है रफी की आवाज का जादू
रफी साहब का पहला गीत एक पंजाबी फिल्म के लिए रिकॉर्ड हुआ था. इसके बाद ये सिलसिला निकल पड़ा और रफी की आवाज का जादू आज भी कायम है. उनके बारे में एक किस्सा ये भी मशहूर है कि रफी बचपन में अपने घर के पास आने वाले फकीर को बहुत ध्यान से सुनते थे. उसकी तरह गाने की कोशिश करते थे. तब उनकी उम्र महज 7 साल थी.