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जावेद अख्तर ने कहा- 'पद्मावती की कहानी उतनी ही नकली जितनी सलीम की अनारकली'

प्रख्यात गीतकार और शायर जावेद अख्तर पद्मावती की कहानी को ऐतिहासिक नहीं मानते. उन्होंने कहा कि पद्मावती की कहानी उतनी ही नकली है जितनी कि सलीम की अनारकली. इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है. उन्होंने सलाह दी कि अगर लोगों को वाकई इतिहास में अधिक रुचि ही है तो इसे फिल्मों की बजाए गंभीर किताबों से समझाना चाहिए.

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इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी के साथ प्रख्यात गीतकार जावेद अख्तर.
इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी के साथ प्रख्यात गीतकार जावेद अख्तर.

प्रख्यात गीतकार और शायर जावेद अख्तर पद्मावती की कहानी को ऐतिहासिक नहीं मानते. उन्होंने कहा कि पद्मावती की कहानी उतनी ही नकली है जितनी कि सलीम की अनारकली. इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है. उन्होंने सलाह दी कि अगर लोगों को वाकई इतिहास में अधिक रुचि ही है तो इसे फिल्मों की बजाए गंभीर किताबों से समझाना चाहिए.

जावेद साहब ने शनिवार को साहित्य आजतक के लंबे सेशन में ये बातें कहीं. सत्र मॉडरेट कर रहे पुण्य प्रसून वाजपेयी के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं इतिहासकार तो हूं नहीं. मैं तो जो मान्य इतिहासकार हैं उनको पढ़कर आपको ये बात बता सकता हूं.' उन्होंने कहा, 'टीवी पर इतिहास के एक प्रोफ़ेसर को सुन रहा था. वो बता रहे थे कि 'पद्मावत' की रचना और अलाउद्दीन खिलजी के समय में काफी फर्क था. जायसी ने जिस वक्त इसे लिखा और खिलजी के शासनकाल में करीब 200 से 250 साल का फर्क था. इतने साल में जब तक कि जायसी ने पद्मावत नहीं लिखी, कहीं रानी पद्मावती का जिक्र तक नहीं है."

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जावेद अख्तर ने कहा, 'उस दौर (अलाउद्दीन के) में हिस्ट्री बहुत लिखी गई. उस जमाने के सारे रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, लेकिन कहीं पद्मावती का नाम नहीं है. अब मिसाल के तौर पर जोधा-अकबर पिक्चर बन गई. जोधाबाई 'मुगल-ए-आजम' में भी थीं. जबकि फैक्ट ये है कि कोई जोधाबाई, अकबर की पत्नी नहीं थी,  अब वो किस्सा महशूर हो गया. अब रियल हो गई है. मगर हकीकत में अकबर की कोई वाइफ नहीं थी जिसका नाम जोधाबाई था. कहानियां बन जाती हैं उसमें क्या है."

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नई पीढ़ी को इतिहास पर सलाह देते हुए जावेद साहब ने कहा, 'फिल्मों को इतिहास मत समझिए और इतिहास को भी फिल्म के नजरिए से मत देखिए. हां आप गौर से फ़िल्में देखिए और एन्जॉय जरूर कीजिए. इतिहास में रुचि है तो गंभीरता से इतिहास पढ़िए. तमाम इतिहासकार हैं उन्हें आप पढ़ सकते हैं.'

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