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Matargashti Review: बेटी की आजादी और पिता की फिक्र, कैसी है 'मटरगश्ती' की कहानी?

नेटफ्लिक्स पर सीरीज मटरगश्ती स्ट्रीम हो रही है. यह कहानी 19 साल की लड़की धरा के बारे में है, जो अपने पिता प्रकाश के साथ रहती है. प्रकाश, रूढ़िवादी सोच के हैं, जबकि उनकी बेटी खुलकर अपनी लाइफ जीना चाहती है.

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कैसी है सीरीज मटरगश्ती? (Photo: X/@NetflixIndia)
कैसी है सीरीज मटरगश्ती? (Photo: X/@NetflixIndia)
फिल्म:मटरगश्ती
3/5
  • कलाकार : अद्रिजा सिन्हा, राजेश कुमार, सौम्या उनियाल
  • निर्देशक :सिद्धार्थ चौहान

OTT की दुनिया इन दिनों सस्पेंस थ्रिलर, क्राइम और खौफनाक बदला लेने वाली कहानियों से भरी पड़ी है. इस अंधी दौड़ में इमोशंस और पारिवारिक ताने-बाने से जुड़ी कहानियां अब बहुत कम देखने को मिलती हैं. हालांकि, इस मामले में TVF ने हमेशा से परिवारों के आपसी रिश्तों और उनके उतार-चढ़ाव को खूबसूरती से सामने रखा है, लेकिन अब नेटफ्लिक्स के जरिए 'जार पिक्चर्स' (Jar Pictures) ने एक ऐसा फॉर्मूला तैयार किया है जो दर्शकों को और ज्यादा रियल और जमीनी लगता है.

इन दिनों महिलाओं को लीड रोल में दिखाने वाले कई शोज आते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर इतने आक्रामक और 'जैसे को तैसा' वाले तेवर दिखाते हैं कि वे स्वाभाविक लगने के बजाय पुरुषों के वर्चस्व वाले शोज को बस जवाब देते हुए प्रतीत होते हैं. ऐसे माहौल में 'मटरगश्ती' (Matargashti) ने बिल्कुल सही और तरोताजा रास्ता चुना है. लड़कियों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह एक साधारण सी 'ड्रामेडी' (ड्रामा और कॉमेडी) इसलिए असर करती है क्योंकि इसे पूरी तरह से महिलाओं ने ही लिखा है. जब कोई देसी पिता यह देखता है कि उसकी बेटी अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना चाहती है, तो उसका आपा खो बैठना एक ऐसी स्थिति है जिससे हर घर का इंसान आसानी से कनेक्ट हो सकता है. खासकर तब जब ये फैसले डेटिंग या पर्सनल चॉइस से जुड़े हों.

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क्या है 'मटरगश्ती' की कहानी?
इस सीरीज के केंद्र में धरा (अद्रिजा सिन्हा)  नाम की एक होनहार छात्रा है, जो अपनी सेक्सुअलिटी, डेटिंग लाइफ और आजादी के असली मतलब को समझने की जद्दोजहद कर रही है. वहीं दूसरी तरफ उसके पिता प्रकाश (राजेश कुमार)  हैं, जो अपनी बेटी से बेइंतहा प्यार करते हैं लेकिन जरूरत से ज्यादा ओवरप्रोटेक्टिव भी हैं. धरा के इन नए और खुले फैसलों को देखकर प्रकाश पूरी तरह हैरान रह जाते हैं और ठान लेते हैं कि वे किसी भी कीमत पर अपनी बेटी को रोमांस और लड़कों से दूर रखेंगे. अपनी बेटी से खुलकर बात करने के बजाय, प्रकाश छुप-छुपकर कई ऐसी मजेदार और अजीबोगरीब तरकीबें निकालते हैं जिससे धरा के डेटिंग प्लान नाकाम हो सकें. 

उनकी इन बेताब हरकतों की वजह से कई फनी सिचुएशंस पैदा होती हैं, कुछ इमोशनल पल आते हैं, और पिता-बेटी के बीच ऐसे टकराव देखने को मिलते हैं जो सीधे दिल को छू लेते हैं. इस पूरी सीरीज में दोनों अपने बदलते रिश्ते की नजाकत को समझने की कोशिश करते हैं. अगर इस पूरी कहानी को एक लाइन में समेटना हो, तो धरा का मकसद अपनी जिंदगी को खुलकर जीना है, जबकि प्रकाश का एकमात्र मकसद उसे ऐसा करने से रोकना है.

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कैसी है ये सीरीज?
'मटरगश्ती' की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक जाने-पहचाने और पुराने फॉर्मूले को बेहद मानवीय रूप देती है. आमतौर पर छोटे शहरों के बैकड्रॉप वाले शोज में सेक्सुअलिटी को एक 'कलंक' (stigma) की तरह पेश किया जाता है, लेकिन यहां धरा अपनी इस पहचान को लेकर सिर्फ एक्साइटेड नजर आती है. इसके अलावा, शो में प्रकाश के पीछे पड़ी एक 'दोस्ताना' मिजाज वाली तलाकशुदा महिला (तुलिका बनर्जी) का ट्रैक भी बहुत दिलचस्प है. ऐसे किरदारों को अक्सर सिर्फ एक मजाक या हताश इंसान के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन यहां वह धरा के भविष्य और एक पितृसत्तात्मक पिता के रूप में प्रकाश की गलतियों का एक आईना बनकर सामने आती है.

इस बात की पूरी तारीफ करनी होगी कि स्क्रीनप्ले युवाओं की इच्छाओं को कभी भी भद्दे मजाकों या डबल मीनिंग वाले जोक्स में नहीं गिरने देता, जो कि आजकल आम बात हो गई है. इसके बजाय, शो की कॉमेडी तीखी बातचीत और रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं से निकलकर आती है, जो बहुत नेचुरल लगती है. पोर्न से पहली बार सामना होने पर आने वाले रिएक्शन, अंडरगारमेंट्स को लेकर होने वाली झिझक, केमिस्ट की दुकान से कंडोम खरीदने की शर्मिंदगी और इन नए तजुर्बों से जुड़ी अजीबोगरीब स्थितियों को बड़े ही सलीके से दिखाया गया है, जिनमें कुछ भी अश्लील या फूहड़ नहीं लगता.

यहां देखिए सीरीज का ट्रेलर

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धरा और उसकी सहेली चारु (सौम्या उनियाल) के बीच की बातचीत बेहद रिलेटेबल है; जब वे सेक्स और ऑर्गेज्म पर बात करती हैं, तो वह तुरंत उन दबी आवाज में की गई बातों की याद दिला देती है जो हाई-स्कूल की रिसेस या लड़कियों के 'नाइट-आउट' में होती हैं. वहीं, 'प्रकाश' का किरदार उन नासमझ सिंगल पिताओं की याद दिलाता है जो विलेन बिल्कुल नहीं हैं, बल्कि उन्हें बस यह कभी पता ही नहीं चला कि अपनी बेटी के करीब कैसे आएं क्योंकि वे हमेशा अपनी पत्नी पर ही निर्भर रहे थे.

कैसा है कलाकारों का काम?
अद्रिजा सिन्हा ने धरा का किरदार बिना किसी बनावटी ड्रामे या खुद को बहुत आकर्षक दिखाने की कोशिश किए बेहद सरल तरीके से निभाया है, और उनका चेहरा ही उनके मन के सारे भाव बयां कर देता है. राजेश कुमार एक बार फिर एक शांत, फिक्रमंद और ठेठ देसी पिता के रूप में छा जाते हैं, जो हर घर के आम पापा जैसे लगते हैं. पिता-पुत्री के रूप में उनकी और अद्रिजा की केमिस्ट्री ही इस शो की असली जान है.

वहीं, सौम्या उनियाल एक ऐसी पक्की सहेली के रूप में नजर आती हैं जो लीड एक्ट्रेस के लिए किसी भाई-बहन से कम नहीं है. अद्रिजा और सौम्या की ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग इतनी नेचुरल लगती है कि हर लड़की इससे आसानी से जुड़ जाएगी.

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सीरीज की कमजोरियां
हालांकि यह सीरीज कई मामलों में बेहतरीन है, लेकिन कुछेक कमियां इसके प्रभाव को थोड़ा कम करती हैं. पूरी सीरीज में बार-बार पिता का अपनी बेटी पर सीसीटीवी की तरह नजर रखना और उसकी पर्सनल लाइफ में गुप्त तरीकों से ताकझांक करना थोड़ा अजीब और दोहराव भरा लगने लगता है, क्योंकि ये सीन हर बार उतने असरदार नहीं बन पाते.

इसके अलावा, कहानी का रोमांस वाला हिस्सा भी थोड़ा बनावटी सा महसूस होता है. सीरीज की लंबाई काफी छोटी है, जिसकी वजह से कुछ साइड स्टोरीज- खासकर धरा के पिता को रिझाने की कोशिश करने वाले किरदारों की कहानी अधूरी रह जाती है और बहुत जल्दी सिमट जाती है.

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