सनी देओल और डायरेक्टर राजकुमार संतोषी की जोड़ी सुपरहिट है. इतिहास गवाह है कि दोनों जब-जब साथ आए हैं, तब-तब उनकी फिल्मों ने धमाल मचाया है. बात चाहें 1990 में रिलीज घायल की हो, 1993 के कोर्ट रूम ड्रामा दामिनी या फिर 1996 में आई घातक की. इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की.
अब 30 साल बाद दोनों की जोड़ी फिर पर्दे पर लौट रही है. पार्टिशन फिल्म बंटवारा 1947 आमिर खान के प्रोडक्शन तले बनी है और 14 अगस्त को रिलीज हो रही है. फिल्म को राजकुमार संतोषी ने डायरेक्ट किया है.
सनी देओल को बंटवारा 1947 फिल्म की स्क्रिप्ट उनके घर पर सुनाई गई थी. उस समय उनके दिवंगत पिता धर्मेंद्र भी मौजूद थे. फिल्म की कहानी सुनकर वो बहुत इमोशनल हो गए थे क्योंकि फिल्म की कहानी उनके परिवार की आपबीती से काफी मिलती-जुलती है.
इस पर सनी बताते हैं कि पंजाब में हमारी ज्वॉइंट फैमिली थी. हमने वहां बंटवारे के दर्द को महसूस किया है. मैंने अपनी बचपन में अपने दादा-दादी और रिश्तेदारों से बंटवारे की कहानियां खूब सुनी हैं. इसलिए जब राज ने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई तो मैं उससे रिलेट कर पाया. बंटवारा कभी होना नहीं चाहिए था क्योंकि उस समय बटंवारे के दौरान बहुत लोग मारे गए थे. बहुत से निर्दोष लोग मारे गए.
बता दें कि सनी देओल की 2001 की फिल्म गदर भी बंटवारे के ईर्द-गिर्द बुनी गई थी. अनिल शर्मा निर्देशित गदर में सनी ने तारा शर्मा नाम के भारतीय सिख युवक की भूमिका निभाई थी, जो अपनी पत्नी के लिए सरहद पार जाता है. बटंवारे 1947 के ट्रेलर में भी हमें सनी देओल को लड़ते देखा है. लेकिन इन दोनों फिल्मों की तुलना को वो खारिज करते हैं.
सनी ने कहा कि तारा सिंह बहुत ही फन लविंग आदमी था. रोमांटिक सरदार था, जिसे संगीत पसंद था. जब वो एक ऐसी लड़की से मिलता है, जो उसे स्तर से कहीं ऊपर है तो वो कल्पना भी नहीं करता कि उसकी उससे शादी होगी. लेकिन दोनों में प्यार होता है. ये एक ट्रक ड्राइवर की लव स्टोरी है लेकिन बंटवारा 1947 में वो पहले से ही शादीशुदा शख्स है, जिसके बच्चे हैं लेकिन बंटवारे के बाद उसके परिवार को भारत छोड़ना पड़ता है और लाहौर जाकर बसना पड़ता है.
राजकुमार संतोषी फिल्म में सनी देओल के किरदार को सुपरहीरोज से कहीं बेहतर बताते हैं. वो कहते हैं कि गदर में तारा सिंह अपने अधिकारों के लिए लड़ा था. लेकिन बंटवारा 1947 में सनी किसी ओर की जंग लड़ रहा है. वह अपने परिवार की सुरक्षा को भी ताक पर रखकर किसी की हिफाजत करता है. मुझे यकीन है कि मैं बेहतरीन एक्शन हीरोज गढ़ सकता हूं, फिर चाहे वह घातक या घायल हो. लेकिन इस फिल्म में मैंने सनी के लिए जो किरदार लिखा है. मैं उसे सुपरमैन, आयरन मैन और बाकी सभी सुपरहीरोज से बेहतर बताऊंगा क्योंकि लोग किसी एक व्यक्ति, किसी समूह या पूरी सेना से लड़ सकते हैं लेकिन यहां सनी कट्टरता के खिलाफ लड़ रहे हैं और कट्टरता ऐसी ताकत है जिसके सामने बड़े-बड़े लोग भी टिक नहीं पाते.