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'सेल्फिश बनो... बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी मत करो', बेटी से बोली दिग्गज एक्ट्रेस, सुनाया गीता का उपदेश, भावुक है वजह

मौसमी चटर्जी ने बेटी मेघा को शादी को लेकर खास सलाह दी. उन्होंने कहा कि बॉयफ्रेंड हो सकता है, लेकिन उससे शादी करना जरूरी नहीं है.

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मौसमी चटर्जी ने बेटी को खास सलाह दी (Photo: ITGD)
मौसमी चटर्जी ने बेटी को खास सलाह दी (Photo: ITGD)

वेटरन एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी ने अपनी पहली ही फिल्म ‘बालिका बधू’ से जबरदस्त कामयाबी हासिल की थी. साल 1967 में रिलीज हुई इस फिल्म के वक्त वह प्री-टीन उम्र में थीं, यानी उनकी उम्र करीब 12 से 15 साल के बीच बताई जाती है. फिल्म की सफलता के बाद उनकी जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया और परिवार ने उनकी शादी मशहूर कंपोजर-सिंगर हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से कर दी.

मौसमी चटर्जी कई मौकों पर इस बात का जिक्र कर चुकी हैं कि उनकी जिंदगी में शादी और मां बनने जैसी जिम्मेदारियां बेहद कम उम्र में आ गई थीं. अब 70 साल की उम्र में एक्ट्रेस ने अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को जिंदगी और शादी को लेकर ऐसी सलाह दी है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है.

‘बॉयफ्रेंड रख सकती हो, लेकिन उससे शादी जरूरी नहीं’

नयनदीप रक्षित के साथ बातचीत के दौरान मौसमी चटर्जी ने खुद को ‘प्रोग्रेसिव’ बताया. इसी दौरान उन्होंने अपनी बेटी मेघा को दी गई सलाह का खुलासा करते हुए कहा, “मैं अपनी बेटी से कहती हूं, ‘तुम्हारा बॉयफ्रेंड हो सकता है, लेकिन तुम्हें उस इंसान से शादी करने की जरूरत नहीं है.’” एक्ट्रेस की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी चौंक गए. मौसमी ने इसके बाद वहां मौजूद महिलाओं को भी अपनी जिंदगी को प्राथमिकता देने की सलाह दी.

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‘थोड़ा सेल्फिश और सेल्फ-सेंटर्ड बनो’

मौसमी चटर्जी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा, “तुम लड़कियां, आज सावधान रहो. थोड़ी सेल्फिश और सेल्फ-सेंटर्ड बनो, क्योंकि अब समय बदल गया है. गीता में भी लिखा है, ‘परिवर्तन संसार का नियम है (Change is the only constant)’.”

उन्होंने कहा कि समय बदल चुका है और आज की महिलाएं पहले के मुकाबले आगे आई हैं. हालांकि, उनके मुताबिक परिवार और समाज की सोच में अभी भी कुछ पुरानी धारणाएं मौजूद हैं.

मौसमी ने कहा- अब बदलाव आ गया है और हम पुराने समय के मुकाबले आगे आए हैं. हम अपनी बेटियों को ससुराल की देखभाल करना सिखाते हैं, लेकिन हम अपने बेटों को नहीं सिखाते. हम सोचते हैं कि महिला को घर के काम करने हैं, यह पुरुष का काम नहीं है. आज की युवा पीढ़ी बहुत तनाव में है. वे अपनी जिंदगी का आनंद नहीं ले पा रहे हैं. उनके पास अपने लिए समय नहीं है.

‘किसी को कुछ साबित करने के लिए कुछ मत करो’

एक्ट्रेस ने लोगों को अपनी गलतियों से सीखने और उन्हें दोहराने से बचने की सलाह भी दी. मौसमी ने अपनी जिंदगी का मंत्र बताते हुए कहा- दूसरों को कुछ साबित करने के लिए कुछ मत करो. मैं अब 70 साल की हो गई हूं. जो आपको पसंद है, वो करो, लेकिन हद से आगे मत जाओ. अगर आप एक बार गलती करते हैं, तो उसे दोबारा मत दोहराओ. मैंने भी अपनी जिंदगी में गलतियां की हैं. लेकिन एक बार जब मुझे पता चला कि यह सही नहीं था, तो मैंने उसे दोबारा नहीं दोहराया. हम इंसान हैं, हमारे पास अंतरात्मा है, लेकिन हम उसका विश्लेषण नहीं करते.

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जब मौसमी चटर्जी ने खोई अपनी बड़ी बेटी पायल

मौसमी चटर्जी ने साल 2019 में अपनी बड़ी बेटी पायल को खो दिया था. पायल लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रही थीं और मौत से पहले करीब दो साल तक कोमा में थीं.

पायल की मौत के बाद मौसमी ने एक पुराने इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के पति और ससुराल वालों ने उसकी मेडिकल केयर को लेकर लापरवाही बरती और उन्हें अपनी बेटी से मिलने से भी रोका गया. साल 2018 में एक्ट्रेस ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जिसमें उन्होंने पायल का अभिभावक बनाए जाने की मांग की थी.

‘यह खालीपन जिंदगीभर रहेगा...’

नयनदीप रक्षित के साथ पहले हुई बातचीत में मौसमी ने अपनी बेटी पायल को खोने के दर्द के बारे में भी खुलकर बात की थी. उन्होंने कहा था- मुझे नहीं लगता कि मेरे पति पायल की मौत से पूरी तरह उबर पाए हैं. मैं भी इससे उबर नहीं पाई हूं. यह खालीपन हमारी पूरी जिंदगी रहेगा. हम इस दुख से उबर नहीं सकते. जब किसी बच्चे की मौत होती है, तो कोई भी इससे उबर नहीं सकता. पायल मेघा (छोटी बेटी) के लिए बहुत मां जैसी थी, क्योंकि दोनों के बीच आठ साल का अंतर था. कभी-कभी वह (पति जयंत) रात में उठकर पायल का नाम लेकर जोर-जोर से रोते थे. इन चीजों को शब्दों में नहीं समझाया जा सकता.

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मौसमी चटर्जी की जिंदगी में कम उम्र में शादी से लेकर मातृत्व और फिर बेटी को खोने का गहरा दर्द रहा है. ऐसे में अपनी बेटी मेघा को लेकर उनकी यह सलाह सिर्फ एक मां की बात नहीं, बल्कि उनके लंबे जीवन और निजी अनुभवों से निकली सीख के तौर पर भी देखी जा रही है.

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