मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के कद्दावर अभिनेता है. दशकों से बेहतरीन एक्टिंग से मनोरंजन कर रहे मनोज ने इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि एक एक्टर के तौर पर उनकी क्षमताओं का अभी बहुत छोटा सा हिस्सा ही सामने आया है.
उन्होंने बॉलीवुड में कलाकारों को बार-बार एक ही तरह के किरदारों (टाइपकास्ट) में बांधने की आलोचना की है. उनका कहना है कि कई टैलेंटेड एक्टर्स को वे रोल और पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार थे.
अपनी आने वाली नेटफ्लिक्स फिल्म 'गजब रात' (जिसका पुराना नाम 'घूसखोर पंडत' था) की रिलीज से पहले, मनोज ने अपने करियर पर बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि फिल्म निर्माता अभी तक उनकी एक्टिंग क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं.
बॉलीवुड के बारे में एक्टर ने क्या कहा?
'ज़ूम' से बातचीत में, मनोज बाजपेयी ने बताया कि कैसे एक्टर अक्सर एक ही तरह के किरदारों में फंसकर रह जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी एक्टिंग क्षमता को और निखारने का मौका नहीं मिल पाता. उनका मानना है कि इस इंडस्ट्री ने कई बेहतरीन कलाकारों को बिना उनकी सही पहचान या मौके दिए हाथ से जाने दिया है. अपने खुद के सफर को याद करते हुए उन्होंने माना कि उन्हें भी लगता है कि उनकी बहुत सी क्षमताएं अभी भी सामने आनी बाकी हैं.
मनोज बाजपेयी ने कहा, 'कई एक्टर्स को 'टाइपकास्ट' कर दिया जाता है, और इस इंडस्ट्री में ऐसा करके हमने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को बर्बाद कर दिया है. मैंने हमेशा कहा है कि इस इंडस्ट्री की बदनामी रही है और इसका एक तरह से 'बुरा कर्म' भी है कि इसने महान प्रतिभाओं को सेट पर कुछ भी नहीं समझा- चाहे वह रोल देने की बात हो या उनके साथ किए गए बर्ताव की. कई लोग बिना किसी पहचान के ही गुमनामी में खो गए. मेरा हमेशा से मानना रहा है कि मेरी एक्टिंग क्षमताओं का केवल 25 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ है; अभी बहुत कुछ बाकी है. लेकिन मुझे लगता है कि यह एक एक्टर का लालच या उसकी भूख है, और मुझे खुशी है कि मेरे अंदर सीखने और कुछ करने की वह आग अभी भी जल रही है.'
इंडस्ट्री को बदलने का श्रेय OTT को दिया
हालांकि मनोज अतीत में बॉलीवुड द्वारा एक्टर्स के साथ किए गए बर्ताव के आलोचक रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स (OTT) के आने से एक बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि OTT ने दर्शकों को एक्टिंग और कहानी कहने के तरीके पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है. अब दर्शक खुलकर अपनी राय रखते हैं कि उन्हें क्या पसंद आया और क्या नहीं.
उन्होंने आगे कहा, 'खासकर हमारे यहां OTT के आने के बाद, चीजें पूरी तरह से बदल गई हैं. हमें अपने देश में OTT के आने का शुक्रगुजार होना चाहिए. अब परिवार साथ बैठकर फिल्में देखते हैं. वे आसानी से बता सकते हैं कि क्या अच्छा है और क्या नहीं, और वे इस पर विस्तार से चर्चा भी करते हैं.'