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दमदार लुक्स मगर फीका चार्म, इन कमजोर विलेन को देखकर फैन्स हुए निराश

एक फिल्म में विलेन कितना जरूरी होता है, ये हर कोई जानता है. विलेन जितना हीरो के लिए मुसीबत बढाता है, उतना ही फिल्म का मजा बढ़ता है. लेकिन क्या हो जब एक विलेन, हीरो के मुकाबले कमजोर हो? तो आइए, उन कमजोर विलेन की लिस्ट पर एक नजर डालते हैं...

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बॉलीवुड के विलेन
बॉलीवुड के विलेन

विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओ रोमियो' थिएटर्स में रिलीज हुई है, जिसे ऑडियंस देखने भी पहुंच रही है. फिल्म को लोगों से काफी मिक्स रिव्यू मिल रहे हैं. शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के काम की तारीफ हो रही है. फैंस को उनकी केमिस्ट्री और लव स्टोरी अच्छी लग रही है. लेकिन इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छिड़ी हुई है. 

'ओ रोमियो' में 'लैला-मजनू' वाले अविनाश तिवारी भी हैं, जिन्होंने फिल्म के मेन विलेन जलाल का रोल निभाया है. इसमें उनका लुक बेहद खतरनाक है और उनकी एक्टिंग भी काफी जबरदस्त है. लेकिन जैसे ही उनका किरदार शाहिद कपूर के उस्तारा के सामने आता है, उसकी कहानी पल-भर में खत्म हो जाती है. 

क्यों 'ओ रोमियो' में अविनाश के रोल से निराश फैंस?

सोशल मीडिया पर यही बहस जारी है कि अविनाश बतौर विलेन वो न्याय नहीं कर पाए, जितनी उनके किरदार से उम्मीदें थीं. पूरी फिल्म के दौरान जलाल का आतंक सेटअप किया गया. लेकिन क्लाइमैक्स में खत्म हुई उसकी कहानी ने कई लोगों को निराश किया. उनका मानना है कि अगर जलाल और उस्तारा का फेस-ऑफ और तगड़े तरीके से पेश होता, तो फिल्म देखने का मजा डबल हो जाता. 

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हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं कि एक दमदार विलेन अगर हीरो पर भारी पड़ता है, तो फिल्म का लेवल काफी ऊपर उठ जाता है. बॉलीवुड और साउथ सिनेमा ने ये हमें कई बार दिखाया भी है. 'केजीएफ चैप्टर 2', 'पद्मावत', 'अग्निपथ', जैसी फिल्मों के विलेन आज भी इसलिए याद आते हैं क्योंकि उनके किरदारों ने जो टक्कर फिल्म के हीरो को दी, वो देखने में सिनेमा लवर्स को काफी पसंद आया. 

फिल्मों में विलेन का किरदार निभाने के लिए एक्टर्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है. अपनी आवाज से लेकर चाल-ढाल सब बदला पड़ता है. आज हम आपको उन विलेन्स के बारे में बताते हैं जिसे एक्टर्स ने पूरे विश्वास के साथ निभाया और पूरी फिल्म में उसका डर कायम रहा. लेकिन हीरो के सामने चुटकियों में उनकी कहानी का 'द एंड' हो गया.

जाट

फिल्म 'जाट' में रणदीप हुड्डा ने श्रीलंका से आए राणातुंगा का रोल प्ले किया था, जो इंडिया में आकर गांव वालों की जमीन हड़पता है. वो उन्हें बुरी तरह मारता है, और जुल्म करता है. राणातुंगा का खौफ फिल्म में इतना दिखाया है कि उसका नाम लेने से भी गांव वाले डरते हैं. उससे कोई भिड़ नहीं सकता, अगर कोई उसके भाई को मार दे तो वो उसे जान से मार देता है.

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लेकिन सनी देओल के किरदार ने स्क्रीन पर आते ही राणातुंगा को एक के बाद एक हराना शुरू किया. जब क्लाइमैक्स आया, तब दोनों की तगड़ी फाइट की उम्मीद लगाई गई. मगर राणातुंगा, जाट से कुछ ही पलों में मार खाकर मर गया. फिल्म में रणदीप का काम तो जबरदस्त था, मगर उनके कमजोर विलेन होने के चलते वो मजा फिल्म का अंत तक बरकरार नहीं रह पाया. 

केजीएफ चैप्टर 1

यश की फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 1' में गरुड़ा ने कितना आतंक मचाया, इसके बारे में शायद हर किसी को मालूम होगा. जिन्होंने उस फिल्म को देखा है, वो जानते हैं कि गरुड़ा ने शुरू से लेकर अंत तक लोगों पर कितने अत्याचार किए. उसकी केजीएफ में जो भी शख्स रह रहा था, वो मौत से बदतर जिंदगी जी रहा था. 

लेकिन तभी वहां रॉकी नाम के हीरो की एंट्री हुई, जिसने उसके बनाए साम्राज्य पर राज करना चाहा. वो गरुड़ा तक जल्दी तो नहीं, मगर क्लाइमैक्स में पहुंचा और एक ही झटके में उसका सिर धर से अलग कर दिया. रॉकी के सामने गरुड़ा की एक ना चल पाई. हालांकि उसे हम कमजोर विलेन नहीं कह सकते. लेकिन रॉकी और गरुड़ा का अगर एक दमदार वेस-ऑफ होता, तो फिल्म देखने में मजा और आता.

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थामा

मैडॉक हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स की 'थामा' एक एंटरटेनिंग फिल्म थी. इसने सभी को हंसाया, लेकिन थोड़ा डराया भी. मगर फिल्म का विलेन यकशासन, जिसे नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने प्ले किया, वो इस यूनिवर्स का कमजोर विलेन साबित हुआ. 'स्त्री 2' में जैसे सरकटे का आतंक दिखाया गया, उस हिसाब से यकशासन काफी कमजोर लगा. 

यकशासन का लुक खतरनाक था, लेकिन उसकी कॉमेडी की वजह से वो स्क्रीन पर फनी दिखा जिससे फिल्म का मजा और नहीं बढ़ पाया. जिस तरह सरकटे ने लोगों को डराकर रखा था और हीरो की मुसीबतें बढ़ाई हुई थीं, उस लिहाज से 'थामा' में यकशासन वैसा कुछ नहीं कर पाया जिससे हीरो की परेशानियां बढ़ सके. 

मर्दानी 3

रानी मुखर्जी की 'मर्दानी' फ्रेंचायजी अपने खूंखार विलेन्स के लिए ही मशहूर है. पहले पार्ट से लेकर दूसरे पार्ट तक, जिस हिसाब से विलेन ने रानी के किरदार की मुसीबतें बढ़ाई, वो फिल्म में मेन स्पॉटलाइट बना. विशाल जेठवा के काम की तो काफी सराहना हुई. लेकिन 'मर्दानी 3' में जिस हिसाब से अम्मा बनी मल्लिका प्रसाद को विलेन के रूप में सामने रखा गया वो दिल तोड़ने जैसा था. 

'मर्दानी 3' के ट्रेलर में जिस हिसाब से अम्मा का डर और आतंक दिखाया गया था, उसने सभी के मन में फिल्म देखने की दिलचस्पी को बढ़ाया. फिल्म के पहले हाल्फ में भी अम्मा ने जबरदस्त माहौल बनाया. लेकिन जैसे ही दूसरे हाफ में अम्मा के किरदार की सच्चाई सामने आई, वो लोगों को निराश कर गई. सरप्राइज के चक्कर में अम्मा जैसी विलेन इस फ्रेंचायजी की सबसे कमजोर विलेन बन गई. 

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