शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर और शाहजहांपुर जिले का मुख्यालय है. इस शहर का नाम मुगल सम्राट शाहजहां के नाम पर रखा गया है. इसकी स्थापना 1647 में पठान भाइयों दिलेर खान और बहादुर खान ने की थी. शाहजहां ने दिलेर खान को इस क्षेत्र में बस्ती बसाने और एक किला बनाने की अनुमति दी थी. गारा और खन्नौत नदियों के संगम के पास विकसित हुआ शाहजहांपुर धीरे-धीरे रुहेलखंड का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक, व्यापारिक और सैन्य केंद्र बन गया. आज शाहजहांपुर इस क्षेत्र के प्रमुख शहरी केंद्रों में से एक और एक महत्वपूर्ण सड़क तथा रेलवे जंक्शन है.
1951 के परिसीमन आदेश के तहत गठित शाहजहांपुर एक सामान्य, गैर आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और शाहजहांपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव किया गया था. अब इसमें कानूनगो सर्किल नगर, शाहजहांपुर कैंटोनमेंट बोर्ड, शाहजहांपुर नगर पालिका बोर्ड और इसके बाहरी क्षेत्र तथा शाहजहांपुर तहसील की रेलवे सेटलमेंट रोजा नगर पंचायत शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से शहरी है और शहर तथा आसपास की बस्तियां इसके अधिकांश मतदाताओं का हिस्सा हैं.
शाहजहांपुर में 1952 में पहली बार मतदान होने के बाद से अब तक 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1959 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती दशकों में कांग्रेस का प्रभाव रहा और 1952 से 1985 के बीच हुए 10 चुनावों में कांग्रेस ने छह बार जीत दर्ज की. भारतीय जनसंघ ने 1969 में यह सीट जीती, जबकि 1977 में जनता पार्टी ने जीत हासिल की. शुरुआती वर्षों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी दो बार जीत दर्ज की. 1989 में विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आया, जब भाजपा के सुरेश खन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार नवाब सिकंदर अली खान को हराया. इसके बाद खन्ना इस सीट से कभी नहीं हारे और उन्होंने लगातार नौ चुनाव जीते. कुल मिलाकर भाजपा ने इस सीट पर 10 बार जीत दर्ज की है, जिसमें जनसंघ की जीत भी शामिल है, जबकि कांग्रेस को छह जीत मिली हैं. भाजपा के उभरने से पहले इस सीट पर कई मुस्लिम उम्मीदवार भी चुनाव जीत चुके थे, लेकिन खन्ना के आने के बाद यह स्थिति तेजी से बदल गई.
सुरेश खन्ना के व्यक्तिगत चुनावी रिकॉर्ड ने शाहजहांपुर को उत्तर प्रदेश में भाजपा के सबसे भरोसेमंद गढ़ों में शामिल कर दिया है. उन्होंने 2012 में अपना लगातार सातवां चुनाव जीता और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार तनवीर खान को 16,178 वोटों से हराया. दोनों नेता 2017 में फिर आमने-सामने आए, जब खन्ना ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाकर 19,203 वोट कर दिया. 2022 में लगातार तीसरी बार दोनों के बीच मुकाबला हुआ, लेकिन इस बार अंतर काफी कम हो गया. खन्ना को 109,942 वोट मिले, जबकि तनवीर खान को 100,629 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 9,313 वोटों से जीत दर्ज की. इस परिणाम के साथ खन्ना ने इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौवां कार्यकाल हासिल किया.
शाहजहांपुर में भाजपा का दबदबा लोकसभा चुनावों में भी दिखाई देता है. 2009 के बाद हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की है. 2009 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी के मुकाबले 13,538 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में बसपा ने सपा की जगह भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी का स्थान लिया, लेकिन भाजपा की बढ़त बढ़कर 48,196 वोट हो गई. 2019 में भी भाजपा ने बसपा के खिलाफ बढ़त बनाई और यह अंतर 17,682 वोट रहा, जबकि उस चुनाव में बसपा और सपा सहयोगी दल थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर काफी बदल गई. भाजपा उम्मीदवार अरुण कुमार सागर को शाहजहांपुर विधानसभा क्षेत्र में 96,786 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार ज्योत्सना गोंड को 93,603 वोट मिले. भाजपा की बढ़त केवल 3,183 वोट रह गई, जो 2009 के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की सबसे कम बढ़त थी.
शाहजहांपुर में समय के साथ मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 308,540 थी, जो 2017 में बढ़कर 359,008 हो गई. 2019 में यह संख्या 374,859, 2022 में 411,563 और 2024 में 431,214 हो गई. हालांकि मतदान प्रतिशत में इसके उलट रुझान देखने को मिला. 2012 में मतदान प्रतिशत 58.83 था, जो 2017 में थोड़ा घटकर 57.39 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और घटकर 50.42 प्रतिशत रह गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 54.59 हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 46.73 प्रतिशत रह गया, जो इस अवधि का सबसे कम मतदान प्रतिशत था.
शाहजहांपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी की भी बड़ी हिस्सेदारी है. अनुमान के अनुसार मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 35.60 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 12.05 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में ओबीसी और सवर्ण समुदायों की विभिन्न जातियां शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से शहरी है, जहां करीब 74.14 प्रतिशत आबादी शहरी और 25.86 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. बड़ी मुस्लिम आबादी के कारण यह समुदाय ऐतिहासिक रूप से चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है. हालांकि हाल के चुनावों में मुस्लिम वोट अपने दम पर भाजपा के व्यापक सामाजिक गठबंधन को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं रहे हैं.
शाहजहांपुर का इतिहास मुगल काल से गहराई से जुड़ा हुआ है. शाहजहां से जुड़े पठान सैन्य अधिकारियों दिलेर खान और उनके भाई बहादुर खान ने 1647 में इस बस्ती की स्थापना की थी. दिलेर खान को मुगल सम्राट के प्रति अपनी सेवाओं के बदले क्षेत्र में किला बनाने की अनुमति मिली थी. इसके बाद अफगान परिवारों को यहां बसाया गया, जिससे किले और दोनों नदियों के आसपास नई बस्ती का विकास हुआ. ब्रिटिश शासन के दौरान 1813 में शाहजहांपुर को जिला मुख्यालय बनाया गया और तब से यह अपना प्रशासनिक महत्व बनाए हुए है.
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भी शाहजहांपुर का महत्वपूर्ण स्थान है. यह शहर राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारियों से जुड़ा रहा है. बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान 1925 की काकोरी ट्रेन कार्रवाई से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे और बाद में उन्हें ब्रिटिश शासन ने फांसी दे दी थी.
आर्थिक रूप से शाहजहांपुर आसपास के बड़े कृषि क्षेत्र के लिए एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है. आसपास के ग्रामीण इलाकों में कृषि महत्वपूर्ण है और उपजाऊ मैदानों में धान, गेहूं, गन्ना तथा अन्य फसलों की खेती की जाती है. शहर की अर्थव्यवस्था में व्यापार, परिवहन, सरकारी सेवाएं, शिक्षा, छोटे उद्योग और कृषि आधारित प्रसंस्करण भी शामिल हैं. महत्वपूर्ण सड़क और रेलवे मार्गों पर स्थित होने के कारण शाहजहांपुर आसपास के क्षेत्रों के लिए बाजार और सेवा केंद्र के रूप में भी काम करता है.
शाहजहांपुर सड़क और रेल दोनों माध्यमों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. शहर लखनऊ को बरेली और मुरादाबाद से जोड़ने वाले प्रमुख रेलवे मार्ग पर स्थित है और यहां से उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए नियमित रेल संपर्क उपलब्ध है. सड़क मार्ग से बरेली करीब 85 किलोमीटर, पीलीभीत करीब 80 किलोमीटर, हरदोई करीब 100 किलोमीटर और लखीमपुर खीरी करीब 120 किलोमीटर दूर है. लखनऊ करीब 180 किलोमीटर, आगरा करीब 300 किलोमीटर और नई दिल्ली करीब 330 किलोमीटर सड़क मार्ग से दूर है.
शाहजहांपुर में भाजपा का रिकॉर्ड मजबूत रहा है. पार्टी ने पिछले नौ विधानसभा चुनाव लगातार जीते हैं और 2009 के बाद हुए हर लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. हालांकि समाजवादी पार्टी ने धीरे-धीरे अंतर कम किया है और अब वह भाजपा के मुकाबले पिछले कई दशकों की तुलना में ज्यादा करीब दिखाई देती है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सपा को 9,313 वोटों से हराया था और दोनों दलों के वोट शेयर में करीब 4.15 प्रतिशत अंक का अंतर था. 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त घटकर केवल 3,183 वोट रह गई और वोट शेयर का अंतर करीब 1.60 प्रतिशत अंक रह गया.
ये आंकड़े भाजपा के लिए चेतावनी माने जा सकते हैं. तीन दशकों से अधिक समय तक लगातार जीत के बाद घटता हुआ अंतर मतदाताओं में बदलाव की इच्छा, किसी वर्ग में असंतोष या पार्टी के पारंपरिक समर्थकों में संभावित उदासीनता की ओर इशारा कर सकता है. 2024 का परिणाम खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा ने संगठनात्मक मजबूती बनाए रखते हुए लोकसभा सीट जीती थी. इसके बावजूद विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी भाजपा से केवल 3,183 वोट पीछे रही. इससे पता चलता है कि लंबे चुनावी रिकॉर्ड के बावजूद यह विधानसभा क्षेत्र अब भाजपा के लिए पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है.
फिलहाल मुकाबला इतना करीब आ गया है कि भाजपा शाहजहांपुर में अपने दबदबे को हल्के में नहीं ले सकती. समाजवादी पार्टी अब उस स्थिति में पहुंच गई है जहां वह दशकों से चले आ रहे भाजपा के नियंत्रण को समाप्त करने की संभावना देख सकती है. उसकी सबसे बड़ी चुनौती हाल के लाभ को बनाए रखना, भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को रोकना और विधानसभा स्तर पर ऐसा सामाजिक गठबंधन तैयार करना होगी जो सुरेश खन्ना की व्यक्तिगत लोकप्रियता और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को चुनौती दे सके. बसपा की स्थिति और मुस्लिम तथा अन्य गैर भाजपा वोटों का बंटवारा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
हालांकि सबसे बड़ा सवाल मतदान प्रतिशत को लेकर है. 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं में से आधे से अधिक लोगों ने मतदान नहीं किया. 2027 में मतदान प्रतिशत में बड़ी वृद्धि मौजूदा चुनावी समीकरणों को बदल सकती है, खासकर अगर अतिरिक्त मतदान उन समुदायों या इलाकों में अधिक होता है जहां भाजपा का समर्थन कमजोर है.
भाजपा की लगातार दसवीं जीत आसान नहीं होगी. शाहजहांपुर अभी भी भाजपा का गढ़ है, लेकिन उसकी बढ़त का आकार स्पष्ट रूप से कम हुआ है. अगर समाजवादी पार्टी हाल के लाभ को बनाए रखती है, गैर भाजपा वोटों के बंटवारे को रोकती है और विधानसभा क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत को बढ़ाकर अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने में सफल होती है, तो उसके पास भाजपा के करीब चार दशक लंबे प्रभाव को समाप्त करने का वास्तविक मौका हो सकता है. ऐसे मुकाबले में जहां जीत का अंतर पहले ही कुछ हजार वोटों तक सिमट चुका है, मतदान प्रतिशत में हर बदलाव और हर वोट महत्वपूर्ण हो सकता है.
(अजय झा)
Tanveer Khan
SP
Sarvesh Chandra Dhandhu
BSP
Smt. Poonam
INC
Nota
NOTA
Manoj Kumar
RSPS
Lokesh Shrivastava
IND
Rajiv Kumar
AAAP
Ajay Mera Pandey
IND
Wakar Ahamad Khan
IND
Aradhana
IND
Sanjay Kumar
IND
Shahadeva Kumar
SDU
Rahul Mohan
LJPRV
Rajeev Kumar Saxena
BKrD
Ram Dayal
BSRD
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