पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं. कुल 3.6 करोड़ मतदाताओं में से 92.88 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. इस हिसाब से करीब 3.344 करोड़ मतदाता वोट डाल चुके हैं. इलेक्शन कमीशन की ओर से बताए गए आंकड़ों के मुताबिक ये अब तक सबसे रिकार्ड तोड़ हाई लेवल वोटिंग प्रतिशत है.
हालांकि, अभी इस आंकड़े में पोस्टल बैलेट और सर्विस वोटर्स के वोट शामिल नहीं हैं. इनकी सटीक संख्या 4 मई को मतगणना के दिन ही स्पष्ट हो पाएगी. चुनाव आयोग के अनुसार, अंतिम आंकड़ों में और बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुल मतदान प्रतिशत में हल्का इजाफा देखने को मिल सकता है.
वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि, पश्चिम बंगाल में प्रथम चरण में ऐतिहासिक मतदान कर लोकतंत्र के महापर्व में सहभागिता के सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए प्रदेश के मतदाताओं का अभिनंदन करता हूं. उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा कि, बंगाल के इतिहास के सबसे शांतिपूर्ण और सुरक्षित मतदान के लिए माननीय चुनाव आयोग, सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPFs) के बहादुर जवानों और हमारी पश्चिम बंगाल पुलिस का भी अभिनंदन करता हूं.' यह बंगाल में सुशासन के नए युग की आहट है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान ने इस बार चुनावी पंडितों और राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है. पहले चरण में मतदान का जो आंकड़ा सामने आया है, उसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. 152 सीटों पर 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ. यह 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 83.2 प्रतिशत मतदान से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है.
16 जिलों में कहां हुई कितने प्रतिशत वोटिंग
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. यानी आप ऐसे समझिए कि दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए.
दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. यानी जिन सीटों पर हिन्दू वोटर्स निर्णायक हैं, उस जिले में सबसे ज्यादा मतदान हुआ है.
दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग इतना ही 92.7 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. और इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है और अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी. लेकिन अब हुमायूं कबीर उनके लिए चुनौती बन गए हैं.
क्या टीएमसी के लिए चुनौती बनेंगे हुमायूं कबीर?
हुमायूं कबीर वही नेता हैं, जो मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनवा रहे हैं और उन्होंने अपनी अलग पार्टी से चुनाव लड़ा है. अगर हुमायूं कबीर मुस्लिम वोटों का विभाजन करते हैं तो यहां मुर्शिदाबाद की कम से कम 13 सीटों पर समीकरण बदल जाएंगे. और हुमायूं कबीर और TMC की लड़ाई में बीजेपी को यहां फायदा हो सकता है. अब हुमायूं कबीर कैसे मुर्शिदाबाद में असर डाल सकते हैं, उसके लिए इन आंकड़ों पर गौर करना जरूरी है.
हुमायूं कबीर रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां 2021 में 85.5 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन इस बार यहां 91.2 प्रतिशत वोटिंग हुई है. हुमायूं जिस दूसरी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उसका नाम है नौदा. इस सीट पर पिछली बार 86.2 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन इस बार यहां भी 93 प्रतिशत मतदान हो चुका है. अब मुर्शिदाबाद में सारा खेला इसी बात पर टिका है कि हुमायूं ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में कितनी सेंध लगाते हैं और इसका बीजेपी को भी कितना फायदा मिलता है.
पहले चरण की सीटों पर हिंदू-मुस्लिम वोटर्स का समीकरण
पहले चरण के मतदान की एक और खास बात ये है कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा मतदान हुआ है, उनमें ज्यादातर सीटें मिक्स हैं. यानी इन सीटों पर मुसलमान भी बहुसंख्यक हैं और हिन्दू भी बहुसंख्यक हैं. जैसे मुर्शिदाबाद की भगवानगोला सीट पर 96.5 प्रतिशत मतदान हुआ, जहां 85 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है. सिर्फ 14.2 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है.
इसके बाद रघुनाथगंज में 96.3 प्रतिशत मतदान हुआ है और ये सीट भी मुर्शिदाबाद में आती है, जहां 80 प्रतिशत वोटर्स मुस्लिम हैं. मुर्शिदाबाद की ही लालगोला सीट पर 96 प्रतिशत मतदान हुआ है, यहां भी हिन्दू अल्पसंख्यक हैं और मुसलमानों की आबादी 80 प्रतिशत से ज्यादा है. फरक्का सीट पर 95.7 प्रतिशत मतदान हुआ है, जहां मुस्लिम आबादी 67 प्रतिशत है और हिंदू आबादी 32 प्रतिशत है. जबकि जंगीपुर सीट पर 94.8 प्रतिशत मतदान हुआ है, जहां 62 मुस्लिम आबादी और 37 प्रतिशत हिंदू आबादी है.
जिन सीटों पर हिन्दू बहुंख्यक हैं, उन सीटों पर भी बंपर वोटिंग हुई है लेकिन मुस्लिम सीटों के मुकाबले हिन्दू बहुल सीटों में औसतन 2 से 2 प्रतिशत वोटिंग कम हुई है. और इसी में पहले चरण की वोटिंग का पूरा नतीजा छिपा है. यहां एक सवाल ये भी है कि क्या इस बंपर वोटिंग से बीजेपी के चांस बढ़ गए हैं? क्योंकि बीजेपी अब तक ये आरोप लगाती थी कि टीएमसी के डर से बहुत सारे लोग चुनावों में भयमुक्त होकर यानी बिना डरे वोट नहीं डालते थे.