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क्या यूपी में चुनाव वक्त से पहले होंगे? सपा सतर्क, बीजेपी भी जुटी तैयारी में

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव समय से पहले हो सकते हैं, क्योंकि जनगणना फरवरी-मार्च में होनी है, उस समय चुनाव का वक्त होता है. ऐसे में एक साथ दोनों ही काम नहीं कराए जा सकते हैं, जिसके चलते माना जा रहा है कि 2026 के आखिर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं?

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जनगणना के चलते समय से पहले होंगे यूपी चुनाव? (Photo-ITG)
जनगणना के चलते समय से पहले होंगे यूपी चुनाव? (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन अब सूबे में वक्त से पहले ही चुनाव कराए जा सकते हैं. जनगणना की तरफ से निर्वाचन आयोग को बता दिया गया है कि फरवरी और मार्च में देश भर में राष्ट्रीय जनगणना का काम तेजी से किया जाना है. कैबिनेट के जरिए इस समय सीमा को हरी झंडी दे दी गई है, जिसके चलते इसी साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव कराए जाने के कयास लगाए जाने लगे हैं? 

जनगणना अभियान के तहत प्रशासनिक अमले और कर्मचारियों को एक-एक घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करना है. देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक है. ऐसे में जनगणना विभाग ने चुनाव आयोग (Election Commission) को आगाह यानी फ्लैग कर दिया है कि फरवरी-मार्च के दौरान उनकी पूरी मशीनरी जनगणना के काम में व्यस्त रहेगी.

यूपी में वक्त से पहले हो सकते हैं चुनाव
प्रशासनिक अमले के लिए एक ही समय में देश की इतनी बड़ी जनगणना करना और उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न कराना लगभग असंभव होगा. चुनाव आयोग के पास सूबे में चुनाव को तय समय से आगे टालने का विकल्प नहीं है, क्योंकि ऐसा करने पर उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है. 

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के 6 महीने पहले कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं. इसके लिए संसद से किसी विशेष मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती. यही वजह है कि फरवरी-मार्च की बजाय चुनाव को प्रीपोन (समय से पहले) करके नवंबर-दिसंबर में कराने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.

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सपा के बाद बीजेपी में सियासी मंथन
सूत्रों के मुताबिक सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की मीटिंग में नेताओं और कार्यकर्ताओं से साफ-साफ कह चुके है कि सरकार वक्त से पहले चुनाव करवा सकती है. बीजेपी के भीतर भी इस बात की चर्चा चल रही है कि हर हाल में वक्त से पहले अगर चुनाव हो तो उसकी तैयारी रखनी चाहिए.

हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से अभी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है, लेकिन यह चर्चा पॉलिटिकल पार्टियों में खासकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के भीतर बहुत तेजी से उभरी है कि चुनाव वक्त से पहले हो सकते हैं. देश के पांच राज्यों में चुनाव है और अगर चुनाव वक्त से पहले हुए तो सभी राज्यों में होंगे अकेले उत्तर प्रदेश नहीं लेकिन उत्तर प्रदेश में इसकी चर्चा खूब है. 

यूपी चुनाव का कार्यकाल कब तक

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 14 मई 2027 तक है. राज्य में 18वीं विधानसभा के चुनाव मार्च 2022 में संपन्न हुए थे और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार विधानसभा का कार्यकाल इसकी पहली बैठक की तारीख से 5 वर्ष तक होता है. ऐसे में 14 से पहले चुनाव ही नहीं बल्कि सरकार के गठन का कार्य पूरा हो जाना चाहिए. 

यूपी विधानसभा का कार्यकाल को देखते हुए माना जा रहा था कि फरवरी-मार्च 2027 तक विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके मुताबिक ही राजनीतिक दल चुनावी तैयारी में जुटी थी, लेकिन अब जनगणना के चलते 2026 के आखिर में विधानसभा चुनाव कराए जाने की प्लानिंग हो रही है. इस लिहाज से सियासी दलों ने अपनी तैयारी का गियर भी बदल दिया है. 

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ठंड के चलते जनवरी में चुनाव संभव नहीं

उत्तर प्रदेश में जनगणना और चुनाव एक साथ कराना काफी मुश्किल है. विधानसभा के कार्यकाल से पहले  यदि चुनाव जनवरी में कराए जाते हैं, तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में कड़ाके की ठंड, कोहरा और धुंध एक बड़ी बाधा बनते हैं.

खराब मौसम के कारण नेताओं के हेलीकॉप्टर उड़ने और लैंड करने में समस्या होती है और चुनाव प्रचार भी बुरी तरह प्रभावित होता है. इसलिए नवंबर और दिसंबर (जब गुलाबी ठंड होती है) को चुनाव के लिए सबसे मुफीद समय माना जा रहा है. 

सपा और बीजेपी की प्लानिंग क्या है?
केंद्र सरकार या चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियां बुनना शुरू कर दिया है.

बीजेपी के नेताओं का कहना है कि वे हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहते हैं. बीजेपी को लगता है कि हालिया विधानसभा चुनावों में मिली जीत का जो मोमेंटम देश में बना हुआ है, उसका फायदा उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी मिलेगा. हालांकि, इतिहास गवाह है कि जब 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने चुनाव प्रीपोन किए थे, तो 'इंडिया शाइनिंग' के माहौल के बावजूद बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था.

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वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का भी दावा है कि उनका संगठन चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे चुनाव जब भी हों. सपा का मानना है कि सत्ता पक्ष इस मोमेंटम का फायदा उठाने के लिए जल्द चुनाव कराना चाहता है, लेकिन जनता बदलाव के लिए तैयार है.

सपा की सहयोगी कांग्रेस भी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी एक्सरसाइज शुरू कर दी है. कांग्रेस ने कैंडिडेट की तलाश शुरू कर दी है. इसके अलावा अलग-अलग मंडल में बैठक कर सियासी रणनीति भी बनाई जा रही है. बसपा प्रमुख मायावती भी यूपी चुनाव को लेकर लगातार बैठकें कर रही है और उम्मीदवार के चयन में जुटी हैं. 
 

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