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पश्चिम बंगाल के मालदा में अधिकारियों के घेराव मामले में NIA की एंट्री... 12 FIR दर्ज, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच शुरू

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NIA ने 12 FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. टीम मौके पर पहुंच चुकी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है.

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मालदा में घेराव मामले की NIA जांच तेज हो गई है (Photo: PTI)
मालदा में घेराव मामले की NIA जांच तेज हो गई है (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से जुड़े काम पर गए न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था. इस गंभीर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया और 6 अप्रैल 2026 को NIA को जांच सौंपने का आदेश दिया. अब 8 अप्रैल को NIA ने 12 FIR दोबारा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारी गए थे. ये लोग SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के काम के लिए गए थे. SIR का मतलब होता है वोटर लिस्ट को ठीक करना, उसमें नए नाम जोड़ना या गलत नाम हटाना. यह काम चुनाव आयोग करवाता है.

जब ये अधिकारी अपना काम कर रहे थे, तब कुछ लोगों ने इन्हें घेर लिया. यानी इनके आसपास भीड़ इकट्ठा हो गई और इन्हें काम नहीं करने दिया गया. यह घटना मालदा जिले के मोथाबाड़ी और कालीचक थाना इलाके में हुई.

FIR क्या दर्ज हुई थी?

इस घटना के बाद पुलिस ने कुल 12 FIR दर्ज की थीं. इनमें से 7 FIR मोथाबाड़ी थाने में और 5 FIR कालीचक थाने में दर्ज हुई थीं. लेकिन शुरुआत में यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने लिया मामले का संज्ञान

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया, यानी किसी ने याचिका नहीं दी थी, कोर्ट ने अपने आप इसे गंभीरता से लिया. 6 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के दफ्तरों और प्रशासन में राजनीति घुस गई है. 

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस सब से सरकारी अधिकारियों की साख यानी उनकी इज्जत और भरोसा कम हो रहा है. इसीलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि इन सभी 12 मामलों की जांच अब NIA करेगी. राज्य पुलिस से यह केस लेकर NIA को सौंप दिया गया.

यह भी पढ़ें: बंगाल: मालदा हिंसा पर NIA का बड़ा खुलासा! साजिश के तहत जुटाई गई भीड़, कट्टरपंथी नेटवर्क पर शक

NIA ने 8 अप्रैल को क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के दो दिन बाद यानी 8 अप्रैल 2026 को NIA ने बड़ा कदम उठाया. NIA ने देर रात एक बयान जारी किया और कहा कि उसने इन सभी 12 FIR को अपने नाम पर दोबारा दर्ज कर लिया है.

NIA ने साफ कहा कि यह कदम 6 अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में उठाया गया है और जांच की टीमें मालदा पहुंच भी चुकी हैं.

आगे जांच किस दिशा में जाएगी?

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NIA सिर्फ घेराव की घटना तक ही नहीं रुकेगी. जानकारी के मुताबिक NIA इस पूरे मामले में दो बड़े एंगल से जांच कर सकती है. पहला, क्या यह घेराव पहले से सोची-समझी साजिश थी? दूसरा, क्या यह कोई संगठित हिंसा थी यानी क्या किसी संगठन या गुट ने मिलकर इसे अंजाम दिया? इन दोनों पहलुओं की गहराई से जांच होगी.

यह मामला इतना बड़ा क्यों है?

यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि जो लोग वोटर लिस्ट सुधारने गए थे, वे न्यायिक अधिकारी थे, यानी कोर्ट से जुड़े लोग थे. उन्हें घेरना और उनके काम में रुकावट डालना एक बहुत गंभीर बात है. इससे यह सवाल उठता है कि क्या पश्चिम बंगाल में चुनावी काम करने वाले सरकारी अधिकारी सुरक्षित हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे इतनी गंभीरता से लिया कि खुद संज्ञान लेकर NIA जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपी.

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