पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में कांग्रेस के लिए गुड न्यूज आई है केरलम से. 10 वर्षों के बाद केरलम में कांग्रेस की अगुआई में UDF सरकार बनाने जा रही है. केरलम में कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF को 99 सीटें मिली. केरलम में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली LDF सरकार लगातार दो बार सत्ता में रही है. 10 साल के शासन के बाद सत्ता विरोधी लहर का पनपना स्वाभाविक था, इसका सीधा फायदा कांग्रेस और UDF को मिला.
केरलम में कांग्रेस की इस वापसी के पीछे सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ सबसे बड़ा फैक्टर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की जोड़ी को माना जा रहा है. इसके अलावा कांग्रेस नेता वीडी सतीशन का भी इस जीत में बड़ा रोल रहा है.
2019 के लोकसभा चुनाव से ही राहुल गांधी ने केरलम को अपना दूसरा राजनीतिक घर बना लिया था. वायनाड लोकसभा क्षेत्र में जीत के साथ राहुल गांधी वहां पूरी तरह से सक्रिय हो गए. दरअसल जब कांग्रेस उत्तर भारत में कमजोर थी उस समय भी केरलम कांग्रेस के लिए सहारे की तरह खड़ा हुआ. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने केरलम में कुल 20 में से 15 सीटें जीतीं, जबकि United Democratic Front को 19 सीटें मिलीं.
राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' का केरलम में प्रभावी असर पड़ा. इस यात्रा ने केरलम में जमीन पर पार्टी कैडर को फिर से जिंदा किया.
2024 में कांग्रेस ने यहां 14 सीटें जीतीं, जबकि UDF को कुल 20 में से 18 सीटें मिलीं.
2024 के आम चुनावों के बाद जब राहुल गांधी ने वायनाड सीट छोड़ी तो प्रियंका गांधी ने वायनाड उपचुनाव के जरिए चुनावी राजनीति में कदम रखा. इससे केरलम की जनता के साथ गांधी परिवार का रिश्ता और भी गहरा हो गया. वायनाड से प्रियंका ने न सिर्फ अपना सियासी रिश्ता बनाया बल्कि उन्होंने वहां की जनता को इमोशनल कनेक्ट का भी एहसास दिलाया.
इस विधानसभा चुनाव में प्रियंका और राहुल की संयुक्त रैलियों ने UDF के पक्ष में एक जबरदस्त माहौल बनाया. प्रियंका गांधी का महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद कांग्रेस को जनता से जोड़ने में बड़ा रोल निभाया.
राहुल ने केरलम चुनाव में धुआंधार रैलियां की. राहुल गांधी ने 29 मार्च को पथनामथिट्टा में हुई रैली से माहौल गरमा दिया. ये वो जगह है जहां भगवान अयप्पा को समर्पित मशहूर सबरीमाला पहाड़ी मंदिर स्थित है. राहुल ने भीड़ से पूछा- स्वर्णम कट्टातु अरप्पा? यानी भगवान का सोना किसने चुराया?भीड़ गरजी और जवाब दिया- 'सघाक्कालाने अयप्पा यानी कि कॉमरेडों ने चुराया.
इससे सीपीएम के लिए मंदिर से गायब सोने का मामला मुश्किल का सबब बन गया.
कांग्रेस केरलम चुनाव के लिए लंबे समय से तैयारियां कर रही थी. इसके लिए पार्टी ने तेलंगाना में पार्टी की जीत के सूत्रधार चुनावी रणनीतिकार सुनील कानूगोलू को लाया. हरेक निर्वाचन क्षेत्र में जीताऊ उम्मीदवार की पहचान के लिए तीन सर्वे करवाए गए. इसके अलावा सहयोगी दलों केरलम कांग्रेस (जोसेफ गुट) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयूएमएल) के साथ सीटों के बंटवारे पर गंभीरता से विचार किया.
कांग्रेस ने 2026 के चुनाव को एलडीएफ के 10 सालों के भ्रष्टाचार और वित्तीय बदइंतजामी पर जनमत संग्रह के तौर पर पेश किया.
वायनाड से सांसद बनने के बाद प्रियंका गांधी केरलम की मांगों को लेकर मुखर रहीं. उन्होंने ग्रासरूट आउटरीच के तहत पीड़ितों की मदद और स्थानीय मुद्दों जैसे कृषि, आदिवासी, पर्यटन पर फोकस किया.
प्रियंका ने कांग्रेस पार्टी की ओर से 100 घर बनाने का ऐलान किया और राहुल के साथ मिलकर इसकी नींव रखीं. प्रियंका ने उयिर्प प्रोजेक्ट के तहत भूस्खलन पीड़ितों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप वितरित की. वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के लिए प्रियंका गृह मंत्री अमित शाह से मिलीं और उनके लिए मदद की मांग की.
प्रियंका ने LDF सरकार की विफलताओं और केंद्र की नीतियों के खिलाफ तीखा हमला करते हुए मतदाताओं को UDF की '5+1 गारंटी' से जोड़ा. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान घर-घर जाकर गारंटी पेम्फलेट वितरित किए जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ. उनके संसदीय क्षेत्र वायनाड में सातों सीटों पर UDF की जीत सुनिश्चित करने में उनकी व्यक्तिगत अपील निर्णायक साबित हुई.