असम विधानसभा चुनाव 2026 में राज्य की सीटों के लिए सुबह आठ बजे से वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. राज्य में 126 सीटों पर 722 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल की राजनीतिक अग्निपरीक्षा पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि उनकी पार्टी इस बार सिर्फ 27 सीटों पर ही मैदान में है और मुकाबला कठिन माना जा रहा है.
AIUDF का मुख्य आधार निचले असम के वे इलाके हैं, जो बांग्लादेश सीमा से सटे हैं और जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं. इस क्षेत्र की लगभग 50 सीटों पर हमेशा से कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है, जहां पिछली बार 2021 में एनडीए ने 23 सीटें और कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन ने 27 सीटें जीती थीं.
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इस बार हालात पूरी तरह बदल चुके हैं, क्योंकि कांग्रेस और AIUDF अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में बदरुद्दीन अजमल के सामने बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत और पार्टी की प्रासंगिकता दोनों की परीक्षा मानी जा रही है.
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10:23AM: एआईयूडीएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल बढ़त बनाए हुए हैं. रेजाउल करीम चौधरी 7,283 वोटों के साथ पीछे चल रहे हैं, जबकि शाहाब उद्दीन मजूमदार 1,864 वोटों के साथ काफी पीछे हैं.
10:00AM: रेजाउल करीम चौधरी 3,681 वोटों के साथ 31 वोटों की मामूली बढ़त बनाकर आगे चल रहे हैं. मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल (एआईयूडीएफ) 3,650 वोटों के साथ बेहद करीबी मुकाबले में पीछे हैं, जबकि शाहाब उद्दीन मजूमदार 1,117 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं.
8:00AM: वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. इसके कुछ ही देर बाद शुरुआती रुझान आना शुरू हो जाएंगे.
7:00AM: सभी पार्टियों ने भी अपनी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं. विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती आज सुबह 8 बजे शुरू होगी.
6:00AM: मतगणना से पहले सभी केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
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बदरुद्दीन अजमल ने 2005 में बनाई थी पार्टी
असम की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक की अहम भूमिका को देखते हुए मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने 2005 में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) का गठन किया था. उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की आवाज के रूप में बनाई और 2009 से 2024 तक धुबरी से सांसद रहे.
विधानसभा चुनावों में भी AIUDF ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की- 2006 में 10 सीटें, 2011 में 18 सीटें, 2016 में 13 सीटें और 2021 में 16 सीटों तक पार्टी पहुंची. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अजमल को बड़ा झटका लगा, जब वे अपनी ही सीट हार गए और कांग्रेस की बढ़ती पकड़ ने मुस्लिम वोटों के समीकरण को फिर से बदल दिया. इसी वजह से 2026 का यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.