बदरुद्दीन अजमल (Badruddin Ajmal) असम के जाने-माने नेता, सफल व्यवसायी, समाजसेवी और इस्लामिक विद्वान हैं. उनका जन्म 12 फरवरी 1950 को असम में हुआ था, उन्होंने अपने जीवन में व्यापार, समाज सेवा और राजनीति, तीनों क्षेत्रों में एक मजबूत पहचान बनाई है.
बदरुद्दीन अजमल All India United Democratic Front (AIUDF) के संस्थापक अध्यक्ष हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने 2005 में की थी. इसके अलावा वे असम में Jamiat Ulema-e-Hind के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.
राजनीति में उनका सफर काफी लंबा रहा है. वे 2009 से 2024 तक असम के धुबरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे. इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास और लोगों की समस्याओं को उठाने में अहम भूमिका निभाई. 2024 के आम चुनाव में वे असम के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल थे, जिनकी घोषित संपत्ति 155 करोड़ रुपये से अधिक थी.
अजमल एक बंगाली मुस्लिम परिवार से आते हैं, जिनकी जड़ें पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के सिलहट क्षेत्र से जुड़ी हैं. उनके पिता हाजी अजमल अली एक साधारण किसान थे, जो 1950 के दशक में मुंबई आए और इत्र (परफ्यूम) के कारोबार में हाथ आजमाया. बाद में अजमल परिवार का यह छोटा सा व्यवसाय एक बड़े ब्रांड में बदल गया. Ajmal Perfumes आज मिडिल ईस्ट सहित कई देशों में जाना-माना नाम है. बदरुद्दीन अजमल इस कंपनी के प्रमुख लोगों में शामिल हैं और उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई.
बदरुद्दीन अजमल ने Darul Uloom Deoband से इस्लामिक थियोलॉजी (धर्मशास्त्र) और अरबी भाषा में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसी वजह से उन्हें एक इस्लामिक विद्वान के रूप में भी सम्मान दिया जाता है.
अजमल समाज सेवा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं. वे Ajmal Foundation के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं. इस फाउंडेशन के जरिए उन्होंने करीब 25 शैक्षणिक संस्थान, स्कूल और अस्पताल स्थापित किए हैं, जिससे हजारों लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं.
असम चुनाव नतीजों के बाद हिमंता बिस्वा सरमा और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. दोनों नेताओं ने पार्टी पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोप लगाए हैं.
Badruddin Ajmal Vidhan Sabha Chunav Result: असम में बिन्नाकंडी विधानसभा सीट की काउंटिंग पूरी हो चुकी है. यहां जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें AIUDF के बदरुद्दीन अजमल ने 35380 वोटों की बढ़त के साथ जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस समर्थित रेजाउल करीम चौधरी को हराया है, यहां चौधरी को कुल 84341 वोट मिले हैं.
देश के पांच राज्यों के चुनावी तस्वीर साफ हो गई है, लेकिन मुस्लिम आधार वाले दलों के लिए चुनाव नतीजे निराश करने वाले हैं. असम में पिछले दो चुनाव से अहम रोल में रहने वाले बदरुद्दीन अजमल पूरी तरह फ्लाप रहे तो बंगाल में हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी बेअसर साबित हुए.
असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुए थे, जिनके फाइनल नतीजे 4 मई को आएंगे. क्या बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाती नजर आ रही है तो कांग्रेस को पांच साल के लिए फिर से सियासी वनवास झेलना होगा?