scorecardresearch
 

फेज-1 में BJP की परीक्षा, फेज-2 में TMC का दबदबा... बंगाल चुनाव का पूरा गणित यहां समझें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में पहला चरण चुनावी मुकाबले का सबसे अहम चरण माना जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार इस चरण में बीजेपी की कई कमजोर सीटें हैं, जबकि दूसरे चरण में टीएमसी की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्र शामिल हैं.

Advertisement
X
बंगाल चुनाव में पहला फेज निर्णायक - कई करीबी मुकाबले वाली सीटों पर नजर (Photo: ITG)
बंगाल चुनाव में पहला फेज निर्णायक - कई करीबी मुकाबले वाली सीटों पर नजर (Photo: ITG)

2026 के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल इकलौता ऐसा राज्य है जहां वोटिंग दो चरणों में होगी. और डेटा साफ बता रहा है कि असली मुकाबला पहले चरण में होगा. क्योंकि यहीं पर BJP की ज़्यादातर कमजोर सीटें हैं और सबसे ज्यादा कांटे के मुकाबले भी यहीं हैं. पहला चरण 23 अप्रैल, दूसरा चरण 29 अप्रैल और नतीजे: 4 मई को आएंगे.

BJP की हालत क्या है?

2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 77 सीटें जीती थीं. इनमें से 59 सीटें पहले चरण में हैं. और इन 59 में से 26 सीटें ऐसी थीं जहां BJP पांच फीसदी से भी कम के अंतर से जीती थी. यानी अगर वोटों में तीन-चार फीसदी का भी उलटफेर हुआ, तो इन सीटों पर नतीजा पलट सकता है.
दूसरे चरण में BJP की सिर्फ 18 सीटें हैं.

लेकिन 2021 का आंकड़ा तो बस शुरुआत है. असल हालत इससे भी ज़्यादा खराब है. उपचुनावों और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की वजह से BJP की मौजूदा ताकत विधानसभा में 77 से घटकर 65 रह गई है. बहुमत का आंकड़ा 148 है. यानी BJP को अभी जितनी सीटें हैं, उससे 83 ज़्यादा सीटें जीतनी होंगी. दूसरी तरफ TMC की मौजूदा ताकत 223 सीटें है. 2021 में जीती 215 सीटों से भी ज़्यादा.

Advertisement

TMC किस हाल में है?

पहले चरण में TMC 92 सीटें डिफेंड कर रही है. इनमें से 29 सीटें ऐसी हैं जहां उसने 2021 में 20 फीसदी से ज़्यादा के अंतर से जीत हासिल की थी यानी काफी मज़बूत ज़मीन. दूसरा चरण तो TMC का असली गढ़ है. वहां की 142 सीटों में से 123 पर TMC का झंडा है.

गठबंधन का मामला

TMC 294 में से 291 सीटों पर अकेले उतरने का प्लान बना रही है. बाकी तीन सीटें - दार्जिलिंग ज़िले की कालिम्पोंग, दार्जिलिंग और कुर्सियांग, उसके सहयोगी दल BGPM यानी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा को दी गई हैं. 

BGPM के अनित थापा की पार्टी ने तीनों सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. कालिम्पोंग से रुडेन सदा लेपचा, दार्जिलिंग से विजय कुमार राय और कुर्सियांग से अमर लामा.

यह भी पढ़ें: बंगाल में अफसरों के ट्रांसफर पर ममता बनर्जी का विरोध, चुनाव आयोग के फैसले पर जताई आपत्ति

BJP शायद सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़े. यहां तक कि उन तीन पहाड़ी सीटों पर भी, जहां BGPM पहले से मैदान में है. विपक्ष की बाकी ताकत बिखरी हुई है. वामपंथी मोर्चा CPI(M), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, CPI और RSP, इंडियन सेकुलर फ्रंट, CPI(ML) लिबरेशन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के साथ मिलकर बड़ा गठबंधन बनाने की कोशिश में है. लेकिन 3 मार्च तक की जानकारी के मुताबिक, वाम मोर्चा और CPI(ML) लिबरेशन की बातचीत में "कोई प्रोग्रेस नहीं" हुई थी. ख़बर लिखे जाने तक वाम मोर्चे ने उम्मीदवारों की लिस्ट तक जारी नहीं की थी.

Advertisement

कांग्रेस वाम मोर्चे के साथ नहीं है. अगस्त 2025 में ही वाम दलों ने कांग्रेस से गठबंधन के खिलाफ रुख साफ कर दिया था. अब कांग्रेस की बंगाल इकाई अलग से सीटों पर उतरेगी - कितनी, यह अभी तय नहीं.

AIMIM ने भी चुनाव में उतरने का ऐलान कर दिया है. हुमायूं कबीर की नई पार्टी "आम जनता उन्नयन पार्टी" को 5 मार्च को चुनाव आयोग से मान्यता मिली.

ISF के चीफ नवसाद सिद्दीकी, जिनकी पार्टी ने 2021 में एक सीट जीती थी ने जनवरी में कहा कि TMC और BJP दोनों "हमें डर में रखना चाहते हैं" और उन्होंने वाम-ISF-कांग्रेस गठबंधन की वकालत की। लेकिन वो गठबंधन अब तक नहीं बन सका.

वोटर लिस्ट का झगड़ा

चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को फाइनल वोटर रोल जारी किया. रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें 63 लाख से ज़्यादा नाम काट दिए गए. कुल रजिस्डर्ड मतदाताओं की संख्या करीब 7.04 करोड़ है, 3.6 करोड़ पुरुष और 3.44 करोड़ महिलाएं.

किन बातों पर नज़र रखें?

पहले चरण में सबसे कमज़ोर वो 26 BJP सीटें हैं जहां जीत का अंतर पांच फीसदी से कम था. तीन-चार फीसदी का झटका भी इन सीटों को पलट सकता है. पहले चरण में BJP के पास सिर्फ एक ऐसी सीट है जो उसने 2021 में 20 फीसदी से ज़्यादा अंतर से जीती थी.

Advertisement

2026 में विपक्ष के बिखरे होने का फायदा-नुकसान दोनों तरफ हो सकता है. एक तरफ, कांग्रेस अकेले और वाम मोर्चा बिना ठोस गठबंधन के लड़ें, तो TMC-विरोधी वोट बंट सकते हैं और इससे BJP को अपनी संकरी जीतें बचाने में मदद मिल सकती है. दूसरी तरफ, TMC उन सीटों पर और मज़बूत हो सकती है जहां संयुक्त मोर्चे का वोट बंटा हुआ रहे.

दूसरे चरण में सबसे ज़्यादा नजर भवानीपुर पर होगी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट. 2021 के आम चुनाव में वो नंदीग्राम से BJP के सुवेंदु अधिकारी से हार गई थीं, फिर अक्टूबर 2021 के उपचुनाव में भवानीपुर से जीतकर वापस आईं. नंदीग्राम, शभुेंदु अधिकारी की सीट और 2021 की सबसे बड़ी लड़ाई का प्रतीक भी दूसरे चरण में है.

दो चरण क्यों, आठ नहीं?

2021 में बंगाल में 27 मार्च से 29 अप्रैल तक आठ चरणों में वोटिंग हुई थी पांच हफ्ते में. उस वक्त कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता, सुरक्षा बलों की ज़रूरत और कोविड-19 के बाद की लॉजिस्टिक्स की वजह से शेड्यूल इतना लंबा था.

पांच साल बाद, चुनाव आयोग ने इसे सिर्फ दो चरणों में समेट दिया. नतीजे 4 मई को आएंगे. असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के साथ.

यह भी पढ़ें: 'मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच जारी रहेगी', सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार की NIA जांच पर रोक की अपील ठुकराई

Advertisement

चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर इसकी वजह नहीं बताई. लेकिन माना जा सकता है कि या तो 2021 के बाद सुरक्षा हालात बेहतर हुए हैं, या केंद्रीय बलों की तैनाती ज़्यादा कुशल हो गई है या दोनों.

डेटा एक बात साफ कहता है - दोनों चरणों का राजनीतिक वज़न बराबर नहीं है. पहले चरण में BJP की लगभग सभी प्रतिस्पर्धी सीटें हैं. दूसरा चरण TMC की मज़बूत ज़मीन है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement