| Gender | male |
| Age | 49 |
| State | KERALA |
| Constituency | KOTHAMANGALAM |
शिबू चलाकट्टू केरल विधानसभा चुनाव 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. उनकी उम्र 49 साल है और उनकी शैक्षिक योग्यता 10th Pass है. उन पर दर्ज केसों की संख्या (0) है. उनकी कुल संपत्ति 12.7Lac रुपये है, जबकि उन पर 0 रुपये की देनदारी है.
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Serious IPC Counts
Education
Cases
self profession
| Property details | 2026 |
|---|---|
| Total Assets | 12.7Lac |
| Movable Assets | 6.7Lac |
| Immovable Assets | 6Lac |
| Liabilities | 0 |
| Self Income | 0 |
| Total Income | 0 |
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरलम समेत पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना हो रही है. पश्चिम बंगाल के रुझानों में जहां बीजेपी ने सौ का आंकड़ा पार कर लिया है, टीएमसी पर बढ़त बना ली है तो वहीं असम में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. फैसला किसके पक्ष में होगा इसके लिए आप इस पेज को रिफ्रेश करते रहें...
Kerala Vidhan Sabha Chunav Results Live Updates: केरलम की 140 विधानसभा सीटों के लिए सुबह आठ बजे से मतगणना चल रही है. मुख्यमंत्री पी. विजयन की एलडीएफ सरकार, जहां तीसरी बार वापसी की उम्मीद में है तो वहीं, यूडीएफ और एनडीए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं.
आज पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आए हैं. मुकाबला 3-2 का रहा है. बंगाल, असम में बीजेपी ने अकेले मैदान मार लिया है. पुडुचेरी में बीजेपी गठबंधन की जीत हुई है. केरल में कांग्रेस गठबंधन जीता है, तमिलनाडु में टीवीके के रूप में नये सितारे का उदय हुआ है. अब कांग्रेस उसके साथ शामिल होने की कोशिश में है. लेकिन हम आज बात बंगाल की करेंगे. बंगाल की जीत के साथ ही आज हिंदुस्तान की 78 फीसदी आबादी और 72 फीसदी जमीन पर बीजेपी का राज चल रहा है. क्योंकि बिहार से बहकर गंगाजी बंगाल में पहुंच गई. और बंगाल में कमल खिल गया. बीजेपी बंगाल जीत गई.
Pinarayi Vijayan Vidhan Sabha Chunav Result Updates: केरल विधानसभा चुनाव में धर्मादम सीट पर पिनाराई विजयन ने जीत तो दर्ज कर ली, लेकिन उनकी पार्टी को बड़ी हार का सपना करना पड़ा. इस हार के साथ ही विजयन का मुख्यमंत्री बनने का सपना भी टूट गया.
Rajeev Chandrasekhar Vidhan Sabha Chunav Result Updates: निमोम विधानसभा सीट पर 25 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने CPI के सिवनकुट्टी को 4,978 वोटों से हराया. सिवनकुट्टी को कुल 52,214 वोट मिले, जबकि चंद्रशेखर को 57,192 वोट प्राप्त हुए. परिणाम के साथ ही इस सीट पर बीजेपी ने बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की.
केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ को बड़ा झटका लगा, जहां 21 में से 13 मंत्री हार गए. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत कुछ ही मंत्री जीत सके. स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज सहित कई बड़े चेहरे हार गए. परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार भी पहली बार चुनाव हारे. कुल मिलाकर नतीजे एलडीएफ के लिए निराशाजनक रहे, जबकि विपक्षी यूडीएफ को इसका सीधा फायदा मिला.
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे लगातार आ रहे हैं. अब तक के नतीजों के हिसाब से पश्चिम बंगाल में इस बार परिवर्तन हो गया है. बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए ममता बनर्जी की पार्टी TMC को हरा दिया है. इस हार के साथ ममता बनर्जी का चौथी बार सीएम बनने का सपना ध्वस्त हो गया है. वहीं तमिलनाडु में भी बड़ा उलटफेर हुआ है. पहली बार चुनावी जंग में उतरी सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK के तमिलनाडु में अपना परचम लहरा दिया है. TVK तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं DMK तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है. वहीं असम में हेमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में बीजेपी ने जीत का हैट्रिक लगा दी है. वहीं केरल से कांग्रेस के लिए राहत की खबर आई है. लेफ्ट के आखिरी किले को ढहाकर यहां UDF की सरकार बनती दिख रही है. वहीं पुदुचेरी में एक बार फिर NDA की सरकार बन रही है.
केरल में 10 साल के एलडीए शासन के बाद लोगों ने बदलाव के लिए वोट दिया है. एलडीएफ सरकार के शुरुआती वर्षों में पेंशन, फूड किट और विकास कार्यों से उम्मीद जगी, लेकिन समय के साथ लोगों में असंतोष बढ़ा. मिडिल क्लास और युवाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ा- नौकरी और महंगाई बड़े मुद्दे बने. धीरे-धीरे सरकार में लोगों का भरोसा कमजोर हुआ और उन्होंने नए विकल्प की ओर रुख किया.
केरल चुनाव के नतीजों में लेफ्ट को तगड़ा झटका लगा है. कांग्रेस ने CPM के किले में सेंध लगा दी है. ‘विजयन फैक्टर’ भी लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ को नहीं बचा पाया और कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF ने केरल में जोरदार वापसी कर ली.
केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार का जाना केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के एक बड़े युग का अंत होगा. साल 2016 से सत्ता में रही यह सरकार देश में कम्युनिस्टों का आखिरी मजबूत गढ़ थी, जो अब ढह चुका है. साल 1977 के बाद यह भारतीय इतिहास में पहली बार हो रहा है जब देश के किसी भी राज्य में कोई कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री नहीं होगा.