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आलगापुर-काटलिचेरा, असम के बराक घाटी क्षेत्र के हैलाकांडी जिले में स्थित एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है. यह करीमगंज लोकसभा क्षेत्र के छह हिस्सों में से एक है. आलगापुर-काटलिचेरा को इसके मौजूदा स्वरूप में 2023 में, आलगापुर और काटलिचेरा के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया था. जहां आलगापुर मूल रूप से 1978 में बनाया गया था, वहीं काटलिचेरा 1951 से अस्तित्व में था. इस नए विधानसभा क्षेत्र में हैलाकांडी पुलिस थाना क्षेत्र के साथ-साथ सिलचर पुलिस थाना क्षेत्र के सर्कल नंबर 23 और 24 शामिल हैं. यह मुख्य रूप से मुस्लिम-बहुल और भारी बहुमत से ग्रामीण क्षेत्र वाली सीट है.
एक नया विधानसभा क्षेत्र होने के नाते, जहां अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों में पहली बार मतदान होना है, आलगापुर-काटलिचेरा का कोई चुनावी इतिहास नहीं है, सिवाय इसके कि इसने 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदान किया था. आलगापुर-काटलिचेरा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर 119,237 वोटों की भारी बढ़त बनाई थी. इसमें कांग्रेस के हाफिज राशिद अहमद चौधरी को 159,994 वोट मिले, जबकि भाजपा के कृपानाथ मल्लाह (जिन्होंने करीमगंज लोकसभा सीट जीती थी) के पक्ष में 40,757 वोट पड़े. 2024 में आलगापुर-काटलिचेरा में मतदाताओं की भागीदारी (वोटर टर्नआउट) काफी अधिक, यानी 82.66 प्रतिशत रही.
आलगापुर-काटलिचेरा क्षेत्र ने 1978 में अपनी स्थापना के बाद से 11 विधानसभा चुनावों में मतदान किया था, जिसमें 2013 में हुआ एक उपचुनाव भी शामिल है. कांग्रेस पार्टी और असम गण परिषद (AGP) ने चार-चार बार यह सीट जीती (तकनीकी रूप से AGP की पांच जीतें मानी जाती हैं, क्योंकि पार्टी के औपचारिक गठन से पहले 1985 के चुनावों में उसके उम्मीदवार ने एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था). ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने 2016 और 2021 में लगातार दो जीत हासिल करते हुए, इस सीट पर दो बार कब्ज़ा जमाया.
दूसरी ओर, काटलिचेरा विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा चुनावों के दौरान कुल 15 बार मतदान हुआ. यह सचमुच कांग्रेस का गढ़ था, क्योंकि पार्टी ने यह सीट 12 बार जीती, एक बार एक निर्दलीय उम्मीदवार ने, जबकि AIUDF ने 2016 और 2021 के चुनाव जीते.
आलगापुर-काटलिचेरा निर्वाचन क्षेत्र की 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची में 276,901 योग्य मतदाता थे. यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनावों में रहे 262,254 मतदाताओं से ज्यादा है.
इससे पहले, 2021 में आलगापुर में 160,194 और काटलिचेरा में 176,807 मतदाता थे. 2019 में 149,552 और 170,499 मतदाता, 2016 में 142,882 और 161,252 मतदाता और 2011 में 131,548 और 146,058 मतदाता थे. आलगापुर में 55.10 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे और काटलिचेरा में 50.30 प्रतिशत है.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी, जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपात पर आधारित है और जिसे क्षेत्र तथा 2023 के परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजित किया गया है, एक मजबूत मुस्लिम बहुमत का संकेत देती है,परिसीमन से पहले के संयुक्त आंकड़े लगभग 50-55 प्रतिशत थे, जो विलय के बाद भी संभवत, प्रभावी बने रहेंगे या और भी बढ़ सकते हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में बंगाली बोलने वाले मुस्लिम समुदायों, कुछ हिंदू समूहों और बराक घाटी की विशिष्ट कृषि-आधारित आबादी का मिश्रण देखने को मिलता है.
आलगापुर-काटलिचेरा निर्वाचन क्षेत्र बराक घाटी में हैलाकांडी जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यहां बराक नदी प्रणाली के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में छोटी-छोटी पहाड़ियां, आर्द्रभूमियां और उपजाऊ निचले इलाके भी हैं. यहां की जमीन धान की खेती, किनारों पर चाय की खेती और अन्य कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त है, लेकिन बराक, धलेश्वरी, कटखाल जैसी नदियों और उनकी सहायक नदियों से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहां बना रहता है. आलगापुर-काटलिचेरा में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, चाय बागानों में काम, छोटे-मोटे व्यापार और कृषि से संबंधित गतिविधियों पर निर्भर करती है. बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के जरिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क शामिल है. रेल सुविधा हैलाकांडी या सिलचर के स्टेशनों पर उपलब्ध है, जो गांव के हिसाब से लगभग 15-40 किमी दूर हैं. गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, और ग्रामीण सड़कों तथा सिंचाई के क्षेत्र में लगातार विकास कार्य चल रहे हैं.
सबसे नजदीकी बड़ा कस्बा हैलाकांडी है, जो जिले का मुख्यालय भी है और लगभग 15-25 किमी दूर है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 300-350 किमी उत्तर में स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब है, कुछ हिस्सों में यह दूरी बहुत कम है, जिसका असर स्थानीय व्यापार और सीमा पार होने वाली गतिविधियों पर पड़ता है. इसके अलावा, यह बड़े बराक घाटी क्षेत्र में पूर्व/दक्षिण-पूर्व की ओर मिज़ोरम की सीमा से भी सटा हुआ है.
आलगापुर-काटलिचेरा में 2026 के विधानसभा चुनावों में एक दिलचस्प और कई-कोनों वाला मुकाबला होने की उम्मीद है. AIUDF ने काटलिचेरा से अपने मौजूदा विधायक, सुजामुद्दीन लस्कर को मैदान में उतारा है, जबकि AGP ने राज्य के सत्ताधारी NDA की ओर से हैलाकांडी के अपने विधायक, जाकिर हुसैन लस्कर को उम्मीदवार बनाया है. इन दोनों मौजूदा विधायकों को आलगापुर से AIUDF के निवर्तमान विधायक, निजाम उद्दीन चौधरी से कड़ी चुनौती मिलेगी. टिकट न मिलने पर उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में कदम रखा है. कांग्रेस पार्टी ने एक युवा नेता, जुबैर अनम मजूमदार को अपना उम्मीदवार बनाया है. यह एक दुर्लभ स्थिति है कि तीन मौजूदा विधायक एक ही सीट के लिए आमने-सामने हों, और जहां मतदाताओं के मिजाज के बारे में कोई भी निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता. किसी भी पक्ष को कोई बढ़त हासिल नहीं है, क्योंकि आलगापुर-काटलिचेरा अपने पहले विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है.
(अजय झा)
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.