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Karimganj North Vidhan Sabha Election Results Live: करीमगंज उत्तर विधानसभा का रिजल्ट घोषित, INC ने BJP को हराया
Assam Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Karimganj North Vidhan Sabha Result Live: करीमगंज उत्तर सीट पर हो गया बड़ा उलटफेर! जानें ताजा आंकड़े
Karimganj North Election Results 2026 Live: करीमगंज उत्तर सीट पर यह क्या हो गया! BJP बड़े अंतर से पीछे
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Assam Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
करीमगंज उत्तर असम के श्रीभूमि जिले का एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह करीमगंज लोकसभा सीट के छह हिस्सों में से एक है. करीमगंज उत्तर में शहर के उत्तरी हिस्से और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाके शामिल हैं, जिनमें कई गांव भी आते हैं. इस वजह से इसका स्वरूप शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह का मिला-जुला है. इसके अधिकार क्षेत्र में लगभग 98 गांव आते हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण ही बना हुआ है, जहां 27.13 प्रतिशत शहरी मतदाताओं की तुलना में 72.87 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता हैं. यहां बंगाली भाषी समुदायों, खेती-बाड़ी करने वाले समूहों, छोटे व्यापारियों और बराक घाटी क्षेत्र की विशिष्ट मिश्रित जातीय आबादी का वर्चस्व है.
1951 में स्थापित, करीमगंज उत्तर ने अब तक 16 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है, जिसमें वर्ष 2000 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है. यहां के चुनावी नतीजे पारंपरिक रूप से मिले-जुले रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट छह बार जीती है, भाजपा ने चार बार, निर्दलीय नेताओं ने तीन बार, जबकि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, CPI और AGP ने यह सीट एक-एक बार जीती है. भाजपा और कांग्रेस पार्टी, दोनों ने ही लगातार तीन-तीन बार जीत हासिल की है. इससे पता चलता है कि हाल के समय में इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मिजाज अब पहले की तरह बार-बार बदलने वाला नहीं रहा है.
कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने 2011 से शुरू करके लगातार तीन बार करीमगंज उत्तर सीट जीती. 2011 में उन्होंने भाजपा के चार बार के विधायक मिशन रंजन दास को 17,770 वोटों से हराया था, हालांकि, 2016 में यह जीत का अंतर घटकर महज 468 वोटों का रह गया था. 2021 में पुरकायस्थ ने भाजपा के मानस दास को 8,324 वोटों से हराकर जीत हासिल की.
लोकसभा चुनावों के दौरान करीमगंज उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मतदान के रुझान भी मतदाताओं की निष्ठा में इसी तरह के बदलाव को दर्शाते हैं. 2009 के लोकसभा चुनावों में AIUDF ने कांग्रेस पार्टी पर 3,111 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि भाजपा बहुत कम अंतर से तीसरे स्थान पर रही थी. BJP 2014 में AIUDF से 4,618 वोटों से और 2019 में 14,740 वोटों से आगे निकल गई. BJP ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भी अपनी बढ़त बनाए रखी, क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी से 9,398 वोटों से आगे थी.
मतदाताओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. 2025 के SIR के बाद, 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची में 259,644 योग्य मतदाता थे, यह 2024 की सूची में शामिल 260,358 मतदाताओं की तुलना में 714 मतदाताओं की मामूली कमी को दर्शाता है. इससे पहले, यह संख्या 2021 में 198,921, 2019 में 186,016, 2016 में 170,762 और 2011 में 157,316 थी. यहां के मतदाताओं में मुसलमानों की हिस्सेदारी 52.90 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों की 10.14 प्रतिशत थी, जबकि अनुसूचित जनजातियों की उपस्थिति नाममात्र की थी, जो कुल मतदाताओं का केवल 0.12 प्रतिशत थी. मतदान प्रतिशत लगातार एक जैसा रहा है: 2011 में 79.97 प्रतिशत, 2014 में 78.12 प्रतिशत, 2016 में 76.25 प्रतिशत, 2019 में 75.17 प्रतिशत, 2021 में 77.83 प्रतिशत और 2024 में 79.21 प्रतिशत.
करीमगंज उत्तर निर्वाचन क्षेत्र बराक घाटी के श्रीभूमि ज़िले के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है. यहां कुशियारा और लोंगई नदियों के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में छोटी-छोटी पहाड़ियां और उपजाऊ निचले इलाके भी हैं. यहां की जमीन धान की खेती, कुछ चाय बागानों और अन्य कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त है, लेकिन कुशियारा, लोंगई और सिंगला जैसी नदियों में आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहाँ बना रहता है. करीमगंज उत्तर के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, छोटे-मोटे व्यापार, सीमा से जुड़ी गतिविधियों और कृषि-संबंधी कार्यों पर निर्भर है. उपजाऊ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखती है. बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के जरिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क, करीमगंज स्टेशन पर रेल सुविधा, और शहर में बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं. साथ ही ग्रामीण सड़कों और सिंचाई के क्षेत्र में लगातार विकास कार्य चल रहे हैं.
सबसे नजदीकी बड़ा शहर जिला मुख्यालय श्रीभूमि है, जिसे पहले करीमगंज कहा जाता था. इस निर्वाचन क्षेत्र में शहर के उत्तरी हिस्से शामिल हैं. आस-पास के अन्य शहरों में पश्चिम में पत्थरकांडी (लगभग 20-30 किमी दूर) और पूर्व में हैलाकांडी (लगभग 40-50 किमी दूर) शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 300-350 किमी उत्तर में स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब स्थित है, यहां कुशियारा नदी प्राकृतिक सीमा का एक हिस्सा बनाती है, और श्रीभूमि शहर से लगभग 14 किमी दूर सुतारकांडी जैसे भूमि बंदरगाह व्यापार को बढ़ावा देते हैं. सीमा से यह निकटता स्थानीय अर्थव्यवस्था, प्रवासन के तरीकों और सीमा पार होने वाली गतिविधियों को प्रभावित करती है.
करीमगंज उत्तर में वन्यजीवों की अच्छी-खासी मौजूदगी है, जो बराक घाटी के आरक्षित वनों और उनके बाहरी इलाकों की खासियत है. वन-गांवों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें सियार, सिवेट और कभी-कभार हाथियों का घुस आना शामिल है. हालांकि, एशियाई हाथियों जैसे बड़े स्तनधारी जानवर, अपने प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण, अब घाटी के अधिकांश हिस्सों से लगभग विलुप्त हो चुके हैं.
असम के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के विपरीत, करीमगंज उत्तर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 2023 के परिसीमन (सीमा-निर्धारण) अभ्यास के दौरान मतदाताओं की संख्या में भारी उछाल देखा गया, माना जाता है कि इस बदलाव ने, कुछ हद तक, इस सीट के 'मुस्लिम-बहुल' सीट होने के दर्जे को कमजोर किया है. यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि परिसीमन से पहले भी, भाजपा ने करीमगंज उत्तर विधानसभा सीट पर तीन बार जीत हासिल की थी (इससे पहले कि कांग्रेस ने उसे सत्ता से बेदखल किया हो), इसके अलावा, पिछले तीनों लोकसभा चुनावों में भी इस क्षेत्र में भाजपा लगातार बढ़त बनाए हुए है. हालांकि, इसका श्रेय स्थानीय मुसलमानों के BJP के प्रति प्रेम को नहीं दिया जा सकता. इसका असली कारण कई मुस्लिम उम्मीदवारों की मौजूदगी की वजह से मुस्लिम वोटों का बंटना और हिंदू मतदाताओं का BJP के पीछे एकजुट होना था. 2023 के परिसीमन ने मतदाताओं की बनावट को और भी बदल दिया है, क्योंकि इसका मतदाता आधार 61,437 मतदाताओं से बढ़ गया है. सबसे बढ़कर, कांग्रेस पार्टी के लिए चिंता की बात यह है कि उसके तीन बार के विजयी विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ 2024 में BJP में शामिल हो गए. इससे कांग्रेस पार्टी को 2026 के चुनाव के लिए एक कम-परिचित चेहरे, जकारिया अहमद को अपना उम्मीदवार बनाने पर मजबूर होना पड़ा, इस उम्मीद के साथ कि मुस्लिम वोटों में कोई बंटवारा न हो. अब जब पुरकायस्थ उसके पाले में हैं, और मतदाताओं की बनावट में भी भारी बदलाव आया है, तो BJP के पास यह उम्मीद करने के सभी कारण मौजूद हैं कि वह कांग्रेस पार्टी से यह सीट वापस छीनने में कामयाब हो जाएगी.
(अजय झा)
Dr Manash Das
BJP
Sahabul Islam Choudhury
IND
Nota
NOTA
Nazrul Islam Choudhury
AIFB
Debajyoti Deb Roy (sujan)
IND
Jakir Hussain
IND
Lutfur Rahman
IND
Nazim Uddin Khan
IND
Ahad Uddin
RUC
Sujit Kumar Paul
SUCI
Ruhul Quddus
IND
Md Jubair Ahmed Choudhury
IND
Abdul Jabbar Choudhury
IND
Mohammad Abdul Batin
IND
Gopal Chandra Paul
SP
असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम रही. गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक साझेदारियों और व्यापारिक संभावनाओं के नए केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.
असम चुनाव के बाद आई ADR रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. जहां एक तरफ आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों की संपत्ति में तेज उछाल दर्ज हुआ है. हिमंत बिस्वा सरमा 35 करोड़ की संपति के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके सहयोगी दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF), जिसने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा, और असम गण परिषद (AGP), जिसने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, दोनों ने 10-10 सीटें जीतीं.
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने 100 से अधिक सीटों पर लूट की है. बीजेपी ने वोटों की चोरी की है. उन्होंने मेरा घेराव किया. यह बीजेपी की अनैतिक जीत है. मैंने बंगाल चुनाव आयुक्त से शिकायत की है.
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल में जहां बीजेपी ने टीएमसी को पटखनी दे दी, तो वहीं असम में जीत की हैट्रिक लगाई. तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को सत्ता से उखाड़ फेंका, केरल में कांग्रेस ने 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया और लेफ्ट को हराकर जीत दर्ज की.
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे अपनी-अपनी सीट बचाने में असफल रहे और उन्हें बीजेपी उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा. जनता ने वंशवादी राजनीति को साफ नकार दिया है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में BJP की प्रचंड जीत के बाद पवन खेड़ा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उनका पेड़ा बना दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों से लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए और इसका असर नतीजों में दिखा. BJP गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में विशेष जनसंपर्क और योजनाओं का असर चुनाव नतीजों में साफ दिख रहा है. चाय बागान वाले छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली है. पीएम मोदी के सीधे संपर्क और विकास योजनाओं ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को बीजेपी के मजबूत किले में बदल दिया है.