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बोरखोला (जिसे 2023 से पहले बरखोला लिखा जाता था) असम की बराक घाटी में कछार जिले का एक कस्बा है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और सिलचर लोकसभा क्षेत्र के सात हिस्सों में से एक है. हालांकि इस विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी, लेकिन 2023 में हुए परिसीमन के दौरान इसकी सीमाओं में बदलाव किए गए. इसमें पिछले अल्गापुर विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा और पिछले सोनाई विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाके शामिल किए गए.
बरखोला में अब तक 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं. कांग्रेस ने यहां सबसे ज्यादा बार जीत हासिल की है. 1951 से शुरू करके उसने कुल 11 चुनाव जीते हैं, जिसमें 1972 तक लगातार पांच जीत का सिलसिला भी शामिल है. 1978 में जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की, जिसके बाद 1983 और 1985 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. 1991 में जनता दल ने जीत हासिल की, जिसके बाद 1996 और 2001 में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की. 2006 में BJP की उम्मीदवार रूमी नाथ ने जीत हासिल की, लेकिन 2011 में अगले चुनाव से पहले वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं. 2011 में उन्होंने फिर से जीत हासिल की, लेकिन इस बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार मिस्बाहुल इस्लाम लस्कर को 10,635 वोटों के अंतर से हराया, जबकि BJP उम्मीदवार इन दोनों से काफी पीछे तीसरे स्थान पर रहे. 2016 में, BJP उम्मीदवार किशोर नाथ ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे मिस्बाहुल इस्लाम लस्कर को सिर्फ 42 वोटों के मामूली अंतर से हराया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार रूमी नाथ तीसरे स्थान पर रहीं. 2021 में, मिस्बाहुल इस्लाम लस्कर (जो अब कांग्रेस के उम्मीदवार थे) ने जीत हासिल की और BJP उम्मीदवार अमलेन्दु दास को 7031 वोटों के अंतर से हराया. मिस्बाहुल इस्लाम लस्कर को 64,433 वोट मिले, जबकि BJP उम्मीदवार को 57,402 वोट मिले. 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान बंरखोला विधानसभा क्षेत्र में, AIUDF ने BJP के मुकाबले 4,855 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर थी और ज्यादा पीछे नहीं थी. 2014 में, कांग्रेस ने BJP के मुकाबले 3,608 वोटों की छोटी बढ़त बनाई, और AIUDF तीसरे स्थान पर रही. 2019 में, कांग्रेस ने BJP के मुकाबले 2,490 वोटों की मामूली बढ़त बनाई. हालांकि, 2024 में, अब पुनर्गठित बोरखोला विधानसभा क्षेत्र में, BJP ने कांग्रेस के मुकाबले 45,475 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की. बरखोला विधानसभा क्षेत्र की 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची में 205,807 योग्य मतदाता थे, जो 2024 में पंजीकृत 201,645 मतदाताओं की संख्या से अधिक है. जहां SIR 2025 का यहां बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा, वहीं 2023 में किए गए परिसीमन अभ्यास के दौरान, 2021 में मौजूद 152,054 मतदाताओं के आधार में 49,591 नए मतदाता जुड़ गए. इससे पहले, यह संख्या 2019 में 142,324, 2016 में 129,524, 2014 में 124,533 और 2011 में 113,232 थी.
मतदान प्रतिशत लगातार उच्च बना रहा है: 2011 में 78.38 प्रतिशत, 2014 में 75.46 प्रतिशत, 2016 में 80.67 प्रतिशत, 2019 में 81.21 प्रतिशत, 2021 में 81.21 प्रतिशत और 2024 में 82.46 प्रतिशत.
2023 के परिसीमन से पहले, 2011 की जनगणना के अनुसार, मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा मतदाता वर्ग था, जिसमें 47.10 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम थे. जबकि अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 14.74 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम थी. मतदान के रुझान यह दर्शाते हैं कि 2021 तक इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय बहुमत में आ गया था. हालांकि, 2023 के परिसीमन अभ्यास के बाद इस स्थिति में बदलाव आने की उम्मीद है, क्योंकि बरखोला विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के साथ ही यहां की मतदाता जनसांख्यिकी भी बदल गई है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण प्रकृति का है, जहां 95.42 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं, जबकि शहरी मतदाताओं का प्रतिशत मात्र 4.58 है. बरखोला विधानसभा क्षेत्र में असमिया भाषी हिंदू, मुस्लिम और चाय बागान समुदायों (आदिवासियों) का एक मिश्रित स्वरूप देखने को मिलता है, जो यहां के विविध ग्रामीण मतदाता वर्ग को और भी समृद्ध बनाता है. बरखोला निर्वाचन क्षेत्र बराक घाटी में कछार जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है और इसमें बराक नदी के किनारे समतल जलोढ़ मैदान, साथ ही आर्द्रभूमि, बील (झीलें) और हल्की ऊबड़-खाबड़ जमीन शामिल है. यह इलाका खेती, चाय की खेती और आर्द्रभूमि में मछली पकड़ने के काम के लिए उपयुक्त है, लेकिन बराक नदी और उसकी सहायक नदियों से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहां बना रहता है. बरखोला में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, चाय बागानों, छोटे-मोटे व्यापार, कृषि से जुड़ी गतिविधियों और पर्यटन से जुड़ी कुछ सेवाओं पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है.
बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग 6 के जरिए सड़क संपर्क शामिल है, साथ ही बरखोला-फुलर्टोल सड़क भी है, जिसे बेहतर बनाया जा रहा है और जो बरखोला शहर को पास के फुलर्टोल इलाके से जोड़ती है; इसके अलावा एक नई सड़क भी बन रही है जो बरखोला और आस-पास के गांवों के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी. रेल सुविधा हैलाकांडी रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध है, जो बरखोला शहर से लगभग 5-7 किमी दूर है, और सिलचर रेलवे स्टेशन पर भी, जो दक्षिण की ओर लगभग 25-40 किमी दूर है. बुनियादी सुविधाओं में ग्रामीण सड़कों का चल रहा विकास और बराक नदी तथा उसकी सहायक नदियों से चलने वाली मानक छोटी सिंचाई योजनाएं शामिल हैं, जबकि इको-टूरिज्म (पर्यावरण-पर्यटन) की सुविधाएं स्थानीय बीलों और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास केवल बुनियादी सेवाओं तक ही सीमित हैं.
पास के शहरों में दक्षिण की ओर सिलचर शामिल है, जो लगभग 30-40 किमी दूर है. राज्य की राजधानी,दिसपुर, लगभग 300 किमी उत्तर में स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा के करीब स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र कुछ हिस्सों में बांग्लादेश की सीमा के बहुत करीब है, सिर्फ 27.3 km दूर.
बरखोला की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो बराक घाटी से जुड़ी है. यहां असमिया और बंगाली परंपराओं का मेल है, प्राचीन मंदिर हैं और औपनिवेशिक काल से चले आ रहे चाय बागानों की विरासत है. यहां स्थानीय बाजार और सामुदायिक उत्सव होते हैं, और आज यहाँ आधुनिक कृषि और छोटे उद्योगों की ओर झुकाव देखने को मिल रहा है.
2016 और 2019 के बीच मतदाताओं की अचानक और संदिग्ध आमद चिंता का विषय बन गई थी, ठीक उसी समय जब BJP को बढ़त मिलनी शुरू हुई थी, क्योंकि 2021 तक यहां हिंदुओं का बहुमत घटकर अल्पसंख्यक स्थिति में आ गया था. बरखोला में कांग्रेस ने एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा और 2021 में जीत हासिल की. हालांकि, पुनर्गठित बरखोला निर्वाचन क्षेत्र अब हिंदुओं के बहुमत वाली सीट प्रतीत होती है. मुसलमानों की उपस्थिति अभी भी काफी है, लेकिन हिंदुओं के वोट BJP के पक्ष में एकजुट होते दिख रहे हैं. 2024 में BJP को 61 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 34 प्रतिशत. इसकी पूरी संभावना है कि मुसलमानों के जितने भी वोट बचे हैं, वे कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो गए हैं.
बरखोला सीट के लिए कुल छह उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें BJP के किशोर नाथ, कांग्रेस के अमित कुमार कलवार, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) की सोमपा डे, और तीन निर्दलीय उम्मीदवार, अमलेंदु दास, ज़हूरुल इस्लाम बरभुइया और हिफज़ुर रहमान लस्कर शामिल हैं.
BJP के लिए मुश्किल यह है कि उसका 2021 का उम्मीदवार, अमलेंदु दास, जिसे 2021 में 46 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहा है. किशोर नाथ, जो 2016 में बहुत कम अंतर से जीते थे, इस बार BJP के उम्मीदवार हैं. BJP को उम्मीद है कि लोग पार्टी के आधार पर ही वोट देंगे. लेकिन एक संभावना यह भी है, हालांकि इसकी गुंजाइश बहुत कम है, कि अमलेंदु दास BJP के मुख्य वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं, जिससे कांग्रेस का उम्मीदवार बहुत कम अंतर से जीत हासिल कर सकता है. इस स्थिति ने 2026 के असम चुनावों में बरखोला निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक बेहद दिलचस्प मुकाबले की जमीन तैयार कर दी है.
(अजय झा)
Amalendu Das
BJP
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Mehbub Rahman Barbhuiya
ASMJTYP
Hifzur Rahman Laskar
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Nazmul Hoque Laskar
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Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.