कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने UGC-NET, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और रिसर्च फेलोशिप व्यवस्था को लेकर सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय का जवाब मौजूदा UGC फेलोशिप सिस्टम की सामान्य जानकारी तक सीमित रहा, जबकि असली मुद्दों पर साफ जवाब नहीं दिया गया. थरूर ने कहा कि सरकार से UGC-NET पास करने वाले उम्मीदवारों और हर साल मिलने वाली JRF की संख्या का डेटा मांगा गया था लेकिन जवाब में साल-दर-साल आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए. उनके अनुसार, मंत्रालय ने केवल मौजूदा योजनाओं और रिसर्च फंडिंग के अन्य विकल्पों की जानकारी दी.
JRF सीटों और योग्य उम्मीदवारों के अंतर पर सवाल
शशि थरूर ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि UGC-NET और JRF क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या और उपलब्ध फेलोशिप के बीच अंतर क्यों बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार JRF की संख्या बढ़ाने या पात्रता नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए आर्थिक सहायता एक बड़ा मुद्दा है और इस पर स्पष्ट नीति की जरूरत है.
UGC नॉन-NET फेलोशिप राशि का मुद्दा
थरूर ने खास तौर पर UGC नॉन-NET फेलोशिप का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इसकी राशि 8,000 रुपये प्रति माह है और यह राशि लंबे समय से नहीं बदली गई है. उनके मुताबिक, यह राशि साल 2006 से लगभग उसी लेवल पर बनी हुई है, जबकि महंगाई और रिसर्च से जुड़ी जरूरतों को देखते हुए समय-समय पर इसमें संशोधन होना चाहिए था. उन्होंने आगे कहा कि साल 2023 में संसद के जीरो आवर के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से इसमें बदलाव को लेकर कोई निश्चित योजना या समयसीमा नहीं बताई गई है.
रिसर्च सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत
थरूर ने कहा कि केवल फेलोशिप राशि बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. देश के रिसर्च इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए संस्थानों में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना, बेहतर अकादमिक गाइडेंस उपलब्ध कराना और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए फेलोशिप सिस्टम की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए, ताकि शोधार्थियों को उनकी योग्यता और मेहनत के अनुरूप बेहतर समर्थन मिल सके.
क्यों अहम है मामला?
UGC-NET और JRF देश में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परीक्षाएं हैं. JRF हासिल करने वाले उम्मीदवारों को शोध कार्य के लिए आर्थिक सहायता मिलती है, जबकि बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार फेलोशिप उपलब्ध न होने के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं. इसी अंतर को लेकर अब फेलोशिप संख्या, राशि और रिसर्च सपोर्ट सिस्टम पर बहस तेज हो गई है.